'राम भक्त होते तो चुप नहीं रहते': मंदिर के दान में कथित घोटाले पर कांग्रेस हमलावर; पीएम मोदी से पूछे ये सवाल
कांग्रेस ने राम मंदिर चंदे में कथित गबन के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, ट्रस्ट को भंग करने और सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पार्टी ने सरकार, ट्रस्ट और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
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विस्तार
कांग्रेस ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गबन के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए और इस कथित 'घोटाले' में शामिल सभी लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए, क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी दिखाई देती हैं।
राम मंदिर के ट्रस्ट ने वित्तीय जांच-पड़ताल के लिए एजेंसियों को नियुक्त किया था। उन एजेंसियों ने कई सुझाव दिए, लेकिन ट्रस्ट के लोगों ने उन सुझावों को नजरअंदाज कर दिया
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• जब चोरी की घटनाओं का खुलासा होने लगा। मंदिर के कैश काउंटिंग एजेंट महिपाल सिंह ने कई बातें सार्वजनिक कीं तो… pic.twitter.com/oheyjKte5Qविज्ञापन विज्ञापन— INC TV (@INC_Television) June 27, 2026
दान चोरी पर चुप क्यों हैं प्रधानमंत्री?
उन्होंने ट्रस्ट के उन जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं। साथ ही कहा कि ट्रस्ट को भंग कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि उसने लोगों का भरोसा खो दिया है। सिंह ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि भाजपा के नेता "सच्चे राम भक्त" नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने स्वयं निष्पक्ष जांच का आदेश देकर भगवान राम की 'मर्यादा' का पालन नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने बड़े मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्हें आगे आकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।'
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो घोटाले की जांच
सिंह ने आगे कहा, 'अगर वे वास्तव में राम भक्त होते, तो भगवान राम की मर्यादा बनाए रखते और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच के सख्त निर्देश देते, क्योंकि यह ट्रस्ट भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही गठित किया गया था।' सिंह ने आगे कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट पर लोगों का भरोसा खत्म हो चुका है, इसलिए इसे तत्काल भंग कर देना चाहिए।
क्या ईडी और सीबीआई सिर्फ विपक्ष के लिए?
सिंह ने सरकार के कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, 'अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? अगर किसी विपक्षी नेता का नाम सामने आता, तो ईडी और सीबीआई तुरंत कार्रवाई करती और यह कहती कि आरोपी बाहर रहा तो जांच प्रभावित होगी। क्या ईडी और सीबीआई सिर्फ विपक्ष के लिए हैं? क्या अयोध्या मामले के आरोपी जांच को प्रभावित नहीं कर सकते?'
मंदिर परिसर से क्यों हटाए गए सीसीटीवी कैमरे'
सिंह ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने वित्तीय जांच और ऑडिट के लिए एजेंसियां नियुक्त की थीं। उन एजेंसियों ने कई अहम सुझाव भी दिए, लेकिन ट्रस्ट ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। जब चोरी की घटनाएं सामने आने लगीं और मंदिर के कैश काउंटिंग एजेंट महिपाल सिंह ने कई मामलों का सार्वजनिक खुलासा किया, तो उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। जैसे-जैसे और खुलासे सामने आते गए, मंदिर परिसर से सीसीटीवी कैमरे हटा दिए गए और उनकी रिकॉर्डिंग भी डिलीट कर दी गई। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन उनमें केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए।
“देते हैं भगवान को धोखा, इन्सां को क्या छोड़ेंगे…”
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 27, 2026
जानी मानी फिल्म ‘उपकार’ की ये पंक्तियाँ श्रीराम मंदिर के चोरों और उनके संरक्षकों पर पूरी तरह से सटीक हैं।
जब आस्था, राष्ट्रभक्ति और नैतिकता के बड़े-बड़े दावे हों, पर जवाबदेही पर सन्नाटा तो-
इनके लिए ‘कसमें वादे देशभक्ति वफ़ा…
'कसमें, वादे, देशभक्ति और वफादारी सिर्फ शब्द बनकर रह गए'
अखिलेश प्रसाद सिंह के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी कथित चंदा चोरी को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने हिंदी फिल्म उपकार के मशहूर संवाद का हवाला देते हुए कहा, 'देते हैं भगवान को धोखा, इंसान को क्या छोड़ेंगे...' उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, 'फिल्म उपकार की ये पंक्तियां राम मंदिर के चोरों और उन्हें बचाने वालों पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जब आस्था, देशभक्ति और नैतिकता के बड़े-बड़े दावे किए जाएं, लेकिन जवाबदेही के सवाल पर चुप्पी साध ली जाए, तब कसमें, वादे, देशभक्ति और वफादारी सिर्फ शब्द बनकर रह जाते हैं।'
My take is that it's really tragic.
The people from all over the country, those who believe and those who have faith, gave donations and now those donations have been stolen. I think it is tragic.
I think it is shameful and the government needs to inquire into what has… pic.twitter.com/RQwOrQSlJR — Congress (@INCIndia) June 27, 2026
आखिर इसके लिए जवाबदेह कौन?
वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अयोध्या की घटनाओं को 'बेहद दुखद' और 'शर्मनाक' बताया। उन्होंने वायनाड में पत्रकारों से कहा, 'देशभर के लोगों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ दान दिया था। अगर उस दान में गड़बड़ी हुई है, तो यह बेहद दुखद और शर्मनाक है। सरकार को इसकी पूरी जांच करानी चाहिए कि आखिर क्या हुआ, कैसे हुआ और क्यों हुआ। यह धन देश के करोड़ों नागरिकों ने आस्था के साथ दिया था और इसे जुटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया था। अगर यह धन आपने लोगों से इकट्ठा किया है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आपकी ही है। आखिर इसके लिए जवाबदेह कौन है?'
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अब तक आठ लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी का मामला अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। एसआईटी की जांच में मंदिर के दान प्रबंधन तंत्र में कई कमियां सामने आई हैं। कैश और कीमती सामान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।