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Coal Stock in India: बिजली संयंत्रों के लिए खदानों में 5.2 करोड़ टन से अधिक कोयला भंडार, सरकार ने बिजली कंपनियों को दिए रैक खरीदने का निर्देश

Mon, 20 Jun 2022 12:29 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 20 Jun 2022 12:29 AM IST
सार

कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 16 जून 2022 तक विभिन्न घरेलू कोयला खदानों पर कोयले का 5.2 करोड़ टन से अधिक भंडार है जो ऊर्जा संयंत्रों की करीब 24 दिन की जरूरत से अधिक है।

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Coal stock at over 52 Million tonnes enough for about 24 days requirement of power plants
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

विभिन्न कोयला खदानों में कोयले का 5.2 करोड़ टन से अधिक भंडार है। यह देशभर में ऊर्जा संयंत्रों की 24 दिनों की ईंधन आवश्यकता के लिहाज से पर्याप्त है। कुछ हफ्ते पहले ही देश के विभिन्न ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन की कमी के कारण ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ था। सरकार का यह बयान उन आरोपों के कई सप्ताह बाद रविवार को आया है, जिसमें कहा गया था कि ईंधन की कमी के चलते बिजली उत्पादन पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है।

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कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘16 जून 2022 तक विभिन्न घरेलू कोयला खदानों पर कोयले का 5.2 करोड़ टन से अधिक भंडार है जो ऊर्जा संयंत्रों की करीब 24 दिन की जरूरत से अधिक है।’’ इसके अलावा, करीब 45 लाख टन कोयला विभिन्न गोदामों, निजी वॉशरी और बंदरगाहों पर रखा है जिसे ऊर्जा संयंत्रों तक भेजा जाना है।
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रैक उपलब्धता में 26 प्रतिशत की वृद्धि
सरकार ने कहा कि बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) द्वारा ऊर्जा क्षेत्र को अब तक की सर्वाधिक आपूर्ति भी की जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र को रैक आपूर्ति 2020-21 के 215.8 रैक प्रतिदिन से बढ़कर 2021-22 में 271.9 रैक प्रतिदिन हो गई है, जो रैक उपलब्धता में 26 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। चालू वर्ष में भी (16 जून, 2022 तक) सीआइएल से बिजली क्षेत्र को रैक आपूर्ति पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा रही।
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कोयले की सुगम आपूर्ति के लिए सरकार का बिजली उत्पादक कंपनियों को रैक खरीदने का निर्देश
सरकार ने बिजली उत्पादक कंपनियों (जेनको) को अपने खुद के इस्तेमाल (कैप्टिव) के लिए रैक की खरीद करने का निर्देश दिया है। इससे मानसून के सीजन में बिजली उत्पादक कंपनियों को कोयले की सुगम आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी।

केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा कि हर साल मानसून के दौरान घरेलू कोयले के उत्पादन में गिरावट आती है। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार मानसून के दौरान उत्पादन और आपूर्ति के मुद्दों के मद्देनजर रैक की व्यवस्था कर रही है, मंत्री ने इसका सकारात्मक जवाब दिया।

सिंह ने कहा, ‘‘रैक एक और समस्या है।’ कोयला मंत्रालय कह रहा है कि कई ऐसे स्थान हैं जहां शुष्क ईंधन उपलब्ध है लेकिन उपलब्धता के अनुरूप इनका परिवहन नहीं हो पा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि रैक की कमी के अलावा कुछ मार्गों पर ‘भीड़भाड़’ की वजह से भी आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

सिंह ने कहा कि रेलवे को इन मार्गों पर भीड़भाड़ की समस्या के हल को कार्रवाई करने की जरूरत है, जिससे इन स्थानों से ज्यादा कोयला निकाला जा सके। कुछ ऐसे क्षेत्र जहां पर्याप्त रैक उपलब्ध हैं वहां कोयला मंत्रालय को उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने कोई ब्योरा दिए बिना कहा, ‘‘भारतीय रेल अधिक रैक की खरीद कर रही है। मैंने जेनको को रैक में निवेश करने का निर्देश दिया है।’’

मंत्री ने कहा कि यदि आपके पास अपना रैक होगा तो आपकी परिवहन की लागत बचेगी। रैक करीब 25-30 साल चलता है। एनटीपीसी के पास पहले से अपने रैक हैं। वे अपने रैक की संख्या बढ़ा रहे हैं। मैंने सभी राज्यों की बिजली उत्पादक कंपनियों से कहा है कि वे अपने रैक खरीदें। इससे रेलवे पर बोझ कम होगा।


उन्होंने कहा कि सरकार मानसून के दौरान बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार बढ़ाकर चार करोड़ टन पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अभी इन संयंत्रों के पास 2.29 करोड़ टन का भंडार है।

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