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कर्नाटक: CM सिद्धारमैया ने नई जाति पुनर्गणना करना का किया एलान, कहा- 60-70 दिनों में पूरी होगी गणना

Wed, 11 Jun 2025 07:47 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 11 Jun 2025 07:47 PM IST
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CM Siddaramaiah says Karnataka to conduct fresh Caste re-enumeration in 60-70 days
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : ANI

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को एलान किया कि राज्य सरकार आगामी 60 से 70 दिनों के भीतर राज्य में नई जाति पुनर्गणना कराएगी। यह निर्णय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्गणना की रूपरेखा और प्रक्रिया पर गुरुवार को कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी।

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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, हाईकमान ने कहा कि कुछ शिकायतें आई हैं क्योंकि सर्वे 2015-16 में हुआ था और अब उसे 9-10 साल हो चुके हैं। इसलिए अल्प समय में लगभग 60-70 दिनों में पुनः गणना की जाएगी। हम पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को पूरी तरह अस्वीकार नहीं कर रहे हैं। उस रिपोर्ट को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया गया है, लेकिन केवल पुनर्गणना की जाएगी।
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जब सीएम सिद्धारमैया से पूछा गया कि क्या वे कैबिनेट के विचाराधीन रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के बजाय पुनर्गणना के पार्टी हाईकमान के निर्देश से निराश हैं? तो उन्होंने कहा, यह मेरा या सरकार का निर्णय नहीं है, यह कांग्रेस हाईकमान का निर्णय है और हम उसके निर्देशों का पालन करेंगे। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (जिसे आमतौर पर जाति जनगणना कहा जाता है) राज्य कैबिनेट के समक्ष विचाराधीन थी।
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पुराना डेटा अब अप्रासंगिक हो चुका है- खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कलबुर्गी में मीडिया को बताया कि पुनर्गणना आवश्यक है क्योंकि पुराना डेटा अब अप्रासंगिक हो चुका है। उन्होंने कहा, पहले सर्वे में जिन मानदंडों का उपयोग किया गया था, वे बरकरार रहेंगे। अगर कुछ छूट गया था तो उसे जोड़ा जाएगा। लेकिन चूंकि डेटा दस साल पुराना है और इस दौरान कई जातियां ओबीसी में शामिल हुई हैं, इसलिए नए सर्वेक्षण की आवश्यक है। 

दरअसल कर्नाटक की दो प्रभावशाली जातियों वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत ने पुरानी जाति जनगणना को अवैज्ञानिक बताते हुए इसे खारिज करने और नए सर्वे की मांग की थी। राज्य के भीतर भी कई वर्गों ने पुरानी जाति गणना को लेकर आपत्ति जताई थी और कांग्रेस पार्टी के भीतर से भी इसके खिलाफ आवाजें उठी थीं।


लंबे इंतजार के बाद कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सर्वेक्षण रिपोर्ट 11 अप्रैल को पहली बार कैबिनेट के सामने रखी गई थी। सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (2013-2018) ने 2015 में राज्य में सर्वेक्षण शुरू किया था। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को उसके तत्कालीन अध्यक्ष एच कंथाराजू के नेतृत्व में जाति जनगणना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया था। सर्वेक्षण का काम 2018 में सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री के रूप में पहले कार्यकाल के अंत में पूरा हो गया था और रिपोर्ट को कंथाराजू के उत्तराधिकारी के जयप्रकाश हेगड़े ने फरवरी 2024 में अंतिम रूप दिया था।

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