राहुल के राजस्थान दौरे से पहले पायलट की मांग- कृषि कानून निरस्त करे केंद्र, प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाए
कांग्रेस नेता व राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केंद्र सरकार से कृषि कानून निरस्त करने और इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाने की मांग की है। पायलट ने किसानों व राज्यों से सलाह के बाद नए सिर से कृषि कानून का मसौदा तैयार करने को कहा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पायलट ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार को जिद छोड़कर इन कानूनों को तत्काल निरस्त करना चाहिए। भाजपा अकाली दल जैसे अपने सहयोगियों को कृषि कानूनों पर विश्वास नहीं दिला पाई। ऐसे में वह यह कैसे उम्मीद करती है कि किसान इन कृषि कानूनों को स्वीकार करेंगे।
राहुल के राजस्थान दौरे से पहले दिया बयान
पायलट ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित राजस्थान दौरे से एक दिन पहले यह टिप्पणी की है। राहुल गांधी तीनों कानूनों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए राजस्थान के कई इलाकों का दौरा करेंगे। राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे कानून लेकर आने चाहिए जो किसान चाहते हैं और ऐसा कुछ नहीं हो कि यह किसानों पर थोपा जाए। उन्होंने कांग्रेस पर भाजपा की ओर से ‘यूटर्न’ का आरोप लगाए जाने को लेकर पलटवार किया और कहा कि भाजपा ‘यूटर्न’ की आदी है, जबकि कांग्रेस का रुख सभी मुद्दों को लेकर सतत रहा है। पायलट ने दावा किया कि भाजपा जीएसटी, मनरेगा, एफडीआई और कई अन्य मुद्दों पर पलटी मार चुकी है। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने कहा था कि हम कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश चाहते हैं, अधिक मंडियां चाहते हैं और व्यवस्था का उदारीकरण चाहते हैं। लेकिन हमने यह भी नहीं कहा कि हम किसानों के हितों के विपरीत कानून लाएंगे।
अहंकार व जिद छोड़े केंद्र
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि केंद सरकार को अपना ‘अहंकार’ और ‘जिद’ छोड़कर तीनों कानूनों को निरस्त करना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि इन कानूनों को लेकर कोई बीच की सहमति बन सकती है, तो उन्होंने कहा कि किसानों ने बार-बार कहा है कि वे तीनों कानूनों की वापसी चाहते हैं और कांग्रेस उनकी इस मांग के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने तीनों कानूनों की अलोचना करते हुए कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसान संगठनों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श किए बिना ये कानून लाए गए।