{"_id":"602ae282a7ba7d09ff12884d","slug":"central-government-aim-is-privatization-of-govt-companies-not-profit-reinvestment","type":"story","status":"publish","title_hn":"विनिवेश नहीं निजीकरण है केंद्र सरकार का लक्ष्य, ये है योजना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
विनिवेश नहीं निजीकरण है केंद्र सरकार का लक्ष्य, ये है योजना
Tue, 16 Feb 2021 02:55 AM IST
देव कश्यप
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 16 Feb 2021 02:55 AM IST
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : Twitter@bjp4india
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाजपेयी सरकार के सरकारी कंपनियों में विनिवेश की बजाय मौजूदा मोदी सरकार का लक्ष्य इनका निजीकरण है। सरकार की योजना रणनीतिक क्षेत्र से जुड़ी सरकारी कंपनियों की संख्या तीन साल में तीन सौ से घटाकर 23 करने की है। विनिवेश और निजीकरण के सहारे सरकार को इस वित्तीय वर्ष में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक रकम हासिल होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
सरकार ने इस मामले में एक दीर्घकालीन रणनीति तैयार की है। इसके तहत सरकारी क्षेत्र से जुड़ीं कंपनी, पीएसयू और अन्य संस्थानों को दो हिस्से में बांटा गया है। एक हिस्सा वह है जिसमें कंपनियों और पीएसयू का सरकार 51 फीसदी हिस्सा बेच चुकी है। सरकार की योजना अगले तीन सालों में इनका पूर्ण निजीकरण करने का है।
विज्ञापन
सरकार ने फिलहाल कुछ कंपनियों, पीएसयू और संस्थानों को रणनीतिक क्षेत्र में शामिल किया है। इनमें परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, ट्रांसपोर्ट, ऊर्जा, वित्तीय सेवा जैसे विभाग शामिल हैं। सरकार इस क्षेत्र को निजीकरण और विनिवेश से फिलहाल दूर रखेगी। इसके अलावा सरकारी क्षेत्र की 300 कंपनियां, पीएसयू और सरकारी उपक्रमों में से अधिकतम का पूर्ण निजीकरण या इनका ज्यादा से ज्यादा हिस्सा बेचने का है।
विज्ञापन
सरकार का काम कारोबार नहीं
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए विनिवेश और निजीकरण को तेज करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उस समय सरकार का सूत्र वाक्य ‘सरकार का काम कारोबार करना नहीं’ था। पहले कार्यकाल के अंतिम दो साल में सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ी। हालांकि इससे पहले और इसके बाद सरकार विनिवेश या निजीकरण के जरिये रकम हासिल करने के लक्ष्य से बेहद दूर रही।
तीन साल पहले की स्थिति चाहती है सरकार
अपने करीब सात साल के कार्यकाल में सरकार महज दो वित्तीय वर्ष में विनिवेश के जरिये रकम जुटाने का लक्ष्य हासिल कर पाई। सरकार साल 2017-18 में एक लाख करोड़ तो इसके एक साल बाद 80,000 करोड़ के लक्ष्य की तुलना में 85,000 करोड़ जुटाने में कामयाब रही थी। बीते वित्तीय वर्ष में सरकार का यह अभियान औंधे मुंह गिरा। कोरोना महामारी के कारण सरकार 2.1 लाख करोड़ के तय लक्ष्य की जगह महज 19,499 करोड़ ही जुटा पाई। अब सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 1.75 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा है। हालांकि सरकार की योजना दो लाख करोड़ से ज्यादा रकम जुटाने की है।
इसलिए दिया साफ संदेश
संसद के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री समेत कई मंत्रियों ने खुलकर विनिवेश और निजीकरण की वकालत की। खुद पीएम ने कहा कि निजी क्षेत्र को साथ लाए बिना अर्थव्यवस्था का कल्याण संभव नहीं है। इससे पहले किसी भी सरकार ने विनिवेश और निजीकरण की इतनी खुली वकालत नहीं की। दरअसल पूरी सरकार विनिवेश और निजीकरण के पक्ष में माहौल बना रही है क्योंकि बीते तीन दशकों में साल 2017-18 और 2018-19 के इतर कभी विनिवेश के माध्यम से धन जुटाने का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई।