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PNB Scam Case: नीरव के पीएनबी धोखाधड़ी मामले में नया मोड़, विशेष CBI अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को सौंपा केस
Thu, 11 Jun 2026 11:03 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:03 PM IST
सार
सीबीआई की विशेष अदालत ने नीरव मोदी से जुड़े धोखाधड़ी मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट को भेज दिया है। सीबीआई ने कहा था कि पीएनबी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हो पाए। पढ़िए रिपोर्ट-
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नीरव मोदी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने गुरुवार को फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े एक कथित धोखाधड़ी के मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट को सौंप दिया। सीबीआई के कहा था कि पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हो सके।
यह मामला नीरव मोदी, उनसे जुड़ी कंपनियों के निदेशकों और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी की ओर से दर्ज किया गया था। यह शिकायत बैंक की मुंबई क्षेत्रीय शाखा ने दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, शिकायत के अनुसार, नीरव मोदी की कंपनियों को जो कर्ज दिया गया था, उसका गलत इस्तेमाल किया गया और इसी कारण बैंक को 321.88 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और धोखाधड़ी हुई।
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बैंक की आंतरिक जांच में पाया गया कि नीरव मोदी से जुड़ी साझेदार कंपनियों जैसे सोलर एक्सपोर्ट्स, स्टेलर डायमंड्स और डायमंड आर यूएस तथा उनकी कंपनियों फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के बीच आपस में लेन-देन किए गए थे।
शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, सीबीआई ने गुरुवार को अदालत को बताया कि विस्तृत जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत न तो पीएनबी अधिकारियों और न ही निजी व्यक्तियों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री मिली है।
सीबीआई की ओर से पेश लोक अभियोजक विक्रम सिंह ने कहा कि आरोप पत्र केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ दाखिल किया जाएगा, इसलिए यह मामला विशेष सीबीआई अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजा जाना चाहिए। विशेष न्यायाधीश जेपी दारेकर ने जांच एजेंसी की यह याचिका स्वीकार कर ली।
ये भी पढ़ें: Indian Navy: कोच्चि की ओर आ रहे टैंकर से नौसेना ने निकाला मिसाइल वारहेड, टला बड़ा खतरा
फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके चाचा मेहुल चोकसी को कई हजार करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी माना जाता है, जिसकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय दोनों कर रहे हैं।
आरोप है कि उन्होंने मुंबई स्थित पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा के अधिकारियों को रिश्वत देकर लेटर ऑफ अंडरटेकिंग और विदेशी शाख पत्रों के माध्यम से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि का गबन किया। मेहुल चोकसी के खिलाफ बेल्जियम की अदालत में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है, जबकि नीरव मोदी लंदन की जेल में बंद है।
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यह मामला नीरव मोदी, उनसे जुड़ी कंपनियों के निदेशकों और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी की ओर से दर्ज किया गया था। यह शिकायत बैंक की मुंबई क्षेत्रीय शाखा ने दर्ज कराई थी।
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शिकायत के अनुसार, शिकायत के अनुसार, नीरव मोदी की कंपनियों को जो कर्ज दिया गया था, उसका गलत इस्तेमाल किया गया और इसी कारण बैंक को 321.88 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और धोखाधड़ी हुई।
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बैंक की आंतरिक जांच में पाया गया कि नीरव मोदी से जुड़ी साझेदार कंपनियों जैसे सोलर एक्सपोर्ट्स, स्टेलर डायमंड्स और डायमंड आर यूएस तथा उनकी कंपनियों फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के बीच आपस में लेन-देन किए गए थे।
शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, सीबीआई ने गुरुवार को अदालत को बताया कि विस्तृत जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत न तो पीएनबी अधिकारियों और न ही निजी व्यक्तियों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री मिली है।
सीबीआई की ओर से पेश लोक अभियोजक विक्रम सिंह ने कहा कि आरोप पत्र केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ दाखिल किया जाएगा, इसलिए यह मामला विशेष सीबीआई अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजा जाना चाहिए। विशेष न्यायाधीश जेपी दारेकर ने जांच एजेंसी की यह याचिका स्वीकार कर ली।
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फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके चाचा मेहुल चोकसी को कई हजार करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी माना जाता है, जिसकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय दोनों कर रहे हैं।
आरोप है कि उन्होंने मुंबई स्थित पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा के अधिकारियों को रिश्वत देकर लेटर ऑफ अंडरटेकिंग और विदेशी शाख पत्रों के माध्यम से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि का गबन किया। मेहुल चोकसी के खिलाफ बेल्जियम की अदालत में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है, जबकि नीरव मोदी लंदन की जेल में बंद है।