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ब्रिक्स का नया मतलब क्या?: मोदी सरकार के चार शब्द कैसे तय करेंगे 2026 का एजेंडा, दुनिया के लिए क्या मायने?
Sat, 12 Sep 2026 08:26 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 12 Sep 2026 08:26 AM IST
सार
भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में 18वां शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। मोदी सरकार ने इस बार ब्रिक्स को चार बड़े शब्दों 'रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी' से जोड़कर एक नया फलसफा दिया है। क्या 11 देशों और विश्व की 40 फीसदी जीडीपी वाला यह मंच ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर वैश्विक व्यवस्था को बदल पाएगा? आइए, विस्तार से इसके मायने को समझने की कोशिश करते हैं...
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ब्रिक्स सम्मेलन 2026
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत ने साल 2026 में चौथी बार ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता संभालते हुए इस मंच को एक नई परिभाषा और नई दिशा दी है। नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी सरकार ने ब्रिक्स के मूल विचार को चार बेहद ताकतवर शब्दों से जोड़ा है। यह थीम है बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी'। इसमें 'आर' का अर्थ रेजिलिएंस यानी खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सप्लाई चेन की मजबूती से है। 'आई' का अर्थ इनोवेशन यानी एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्रांति है। 'सी' का अर्थ कोऑपरेशन यानी ग्लोबल साउथ के देशों का आपसी सहयोग है। 'एस' का अर्थ सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास से है। भारत का यह नया मंत्र मौजूदा वैश्विक संकटों के बीच पूरी दुनिया के विकास का एजेंडा तय करने जा रहा है।
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क्या चार शब्दों में भारत की पूरी रणनीति छिपी है?
भारत की रणनीति में लचीलापन सबसे पहली प्राथमिकता है। इसका मतलब है कि खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसी जरूरी व्यवस्थाएं किसी संकट के समय भी चलती रहें। दूसरी प्राथमिकता नवाचार है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप के जरिए नई समस्याओं के नए समाधान तलाशने पर जोर है। तीसरी प्राथमिकता सहयोग है। इसका मकसद वैश्विक दक्षिण के देशों को साथ लाना और उनके बीच अनुभव तथा संसाधनों को साझा करना है। चौथी प्राथमिकता टिकाऊ विकास है। इसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने, स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाने और ऐसा विकास करने पर जोर है, जो लंबे समय तक कायम रह सके।
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मोदी सरकार के चार शब्द कैसे तय करेंगे 2026 का एजेंडा?
- भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता ऐसे महत्वपूर्ण समय में सामने आई है जब पूरी दुनिया आर्थिक बिखराव, तकनीकी उथल-पुथल, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे नाजुक दौर में मोदी सरकार का यह चार सूत्रीय मंत्र दुनिया को स्पष्ट और व्यावहारिक समाधान देने का काम करता है। भारत का मुख्य ध्यान केवल बैठकों तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि मौजूदा उपलब्धियों को मजबूत करना और संस्थागत कार्यक्षमता को धरातल पर उतारना है।
- यह थीम विकास, निरंतरता और नए आविष्कारों को पूरे एजेंडे के केंद्र में रखती है। साथ ही यह ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की उम्मीदों और प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे आगे लाती है। भारत ब्रिक्स को केवल चर्चा का अखाड़ा नहीं, बल्कि एक रचनात्मक और ठोस समाधान देने वाले मंच के रूप में स्थापित कर रहा है।
क्या कई देशों का यह विशाल समूह दुनिया की अर्थव्यवस्था की नई धुरी है?
- आज का ब्रिक्स समूह पहले से कहीं अधिक विशाल और प्रभावशाली हो चुका है। वर्तमान में इसमें कुल 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये सभी देश मिलकर दुनिया की कुल आबादी का 49.5 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।
- इसके अलावा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत उत्पादन इन्हीं देशों में होता है और दुनिया के कुल व्यापार में इनकी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है। एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक फैले इस संगठन के पास असीम प्राकृतिक संसाधन, विशाल उपभोक्ता बाजार, उन्नत तकनीकी क्षमताएं और विकास के अनूठे अनुभव मौजूद हैं।
- इस पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी कल मुहर लगा दी। जी-7 देशों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा भी था कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन अकेले ब्रिक्स देशों ने किया है। इसके उलट तथाकथित जी-7 समूह का योगदान सिमटकर केवल 29 प्रतिशत रह गया है। पुतिन ने तंज कसते हुए कहा था कि वे समझ नहीं पाते कि उसे जी-7 या ग्रेट-7 क्यों कहा जाता है, जबकि हकीकत इसके उलट है।
- उन्होंने विश्व अर्थव्यवस्था के विकास का आंकड़ा समझाते हुए कहा कि समान अवधि में वैश्विक आर्थिक विकास की आधी से अधिक यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि ब्रिक्स देशों की वजह से हुई है, जबकि जी-7 समूह का योगदान इसमें केवल 18 प्रतिशत रहा है। पुतिन ने इस भारी अंतर की सीधी वजह बताते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी बसती है, जिससे उनके पास बेहद गतिशील, विशाल और जीवंत घरेलू बाजार मौजूद हैं।
क्या 350 से अधिक बैठकों ने सहयोग को दी नई रफ्तार?
भारत ने औपचारिक रूप से 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की कमान संभाली थी। अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने देश के 25 अलग-अलग शहरों में 350 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें और कार्यशालाएं आयोजित कीं। इन सभी बैठकों को तीन मुख्य स्तंभों के तहत आगे बढ़ाया गया, जिनमें राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक और जन-जन के बीच संपर्क शामिल रहे। इन आयोजनों ने सभी सदस्य देशों के बीच नीतिगत तालमेल को अभूतपूर्व गति दी है और जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करने का ठोस रास्ता तैयार किया है।क्या कृषि और आधुनिक तकनीक में सहयोग से बदलेगी किसानों की जिंदगी?
- खाद्य सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ब्रिक्स कृषि उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त अनुसंधान और क्षमता विकास पर ऐतिहासिक सहमति बनी है। इसके शुरुआती तालमेल की जिम्मेदारी आईसीएआर-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम को सौंपी गई है।
- इसके अलावा डिजिटल कृषि के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डेटा विश्लेषण को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी दिल्ली को नोडल जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बीजों, जर्मप्लाज्म और कृषि इनपुट के क्षेत्र में 'ब्रिक्स एग्रिन' नाम से एक किसान-केंद्रित और स्वैच्छिक ढांचा स्थापित किया जा रहा है।
क्या पारंपरिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवनशैली से रुकेगी बीमारियों की रोकथाम?
स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'ब्रिक्स रोडमैप 2026-2029' शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी सहयोग और जागरूकता के जरिए मोटापे और गैर-संचारी रोगों से बचाव करना है। इसके साथ ही पारंपरिक, सहायक और एकीकृत चिकित्सा पर एक विशेषज्ञ कार्य समूह गठित करने का फैसला हुआ है। यह समूह नीतिगत संवाद, शोध, शैक्षणिक आदान-प्रदान और डिजिटल ज्ञान मंच तैयार करने के साथ दवाओं की गुणवत्ता और नियामक मानकों पर एकरूपता लाने के लिए मिलकर काम करेगा।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भारत कैसे करेगा नेतृत्व?
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति वैश्विक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ब्रिक्स प्रशिक्षण हब नेटवर्क और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान यानी 'निमहांस' को इस पूरी पहल के मुख्य समन्वय केंद्र के रूप में नामित किया गया है। इसका मकसद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का कौशल उन्नयन करना, मानकीकृत प्रशिक्षण देना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल को अनिवार्य रूप से जोड़ना है।जलवायु संकट जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए क्या योजना?
- ब्रिक्स सिद्धांतों के तहत पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवन की मुख्यधारा में शामिल करने पर विशेष बल दिया गया है। जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए समुदाय आधारित स्थानीय समाधानों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- ब्रिक्स संस्थानों के नेटवर्क के जरिए पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ जीवनशैली को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि सदस्य देशों के बीच अनुसंधान, नवाचार और बेहतरीन तौर-तरीकों का निरंतर आदान-प्रदान हो सके।
कौशल विकास और रोजगार से महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ेगी?
कार्यबल को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए 'ब्रिक्स कनेक्ट' पहल शुरू की गई है। इसके तहत क्षमता निर्माण, महिलाओं की कार्यबल में हिस्सेदारी बढ़ाने, युवाओं के कौशल विकास और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को शामिल किया गया है। यह पूरा सहयोग सदस्य देशों के बीच स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी आधार पर संचालित होगा, जिससे हर देश अपनी स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार नीतियां लागू कर सके।
क्या स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण से बिजली की किल्लत दूर होगी?
- ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड से जुड़े मार्गदर्शक सिद्धांतों को अपनाया गया है। इसके तहत 'ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र' की शुरुआत की गई है।
- यह आधुनिक मंच सदस्य देशों के बीच ग्रिड तकनीक साझा करने, नीतिगत नियमों के आदान-प्रदान और स्वच्छ ऊर्जा के प्रायोगिक प्रोजेक्ट्स को तेजी से धरातल पर उतारने में मदद करेगा।
क्या आपदा-रोधी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से सुरक्षित होंगे भविष्य के शहर?
शहरों में बढ़ती आबादी और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 'ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब' की स्थापना की गई है। जलवायु और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को ध्यान में रखते हुए शहरी नियोजन, डिजाइनिंग, निर्माण और रखरखाव के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांत अपनाए गए हैं। इसके साथ ही 'ब्रिक्स अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क' के जरिए सदस्य देशों के विशेषज्ञ शहरों को रहने लायक बनाने के व्यावहारिक मॉडल साझा करेंगे।स्टार्टअप फंड और एमएसएमई पोर्टल से छोटे कारोबारी कैसे भरेंगे उड़ान?
- लघु और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने के लिए 'ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल' विकसित किया जा रहा है। यह पोर्टल वित्तीय संस्थानों, व्यापार संघों और नीति-निर्माताओं को एक ही डिजिटल मंच पर लाएगा।
- इसके साथ ही 'ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड' बनाया गया है जो नए उद्यमियों को शुरुआती वित्तीय मदद देगा। वहीं 'ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क' के जरिए राष्ट्रीय एजेंसियों और स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच दी जा रही है।
विज्ञान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में क्या नई दिशा दी गई है?
वैज्ञानिक ज्ञान को संरक्षित करने और साझा करने के लिए 'ब्रिक्स साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी' का गठन किया गया है। इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने के लिए 'ब्रिक्स जीवीसी एक्शन प्लान 2026-2030' को मंजूरी दी गई है। इसके तहत नए बाजार खोलने, आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देने और एक संयुक्त तकनीकी परिषद के जरिए व्यापारिक अड़चनों को दूर करने की रणनीति बनाई गई है।
व्यापार और सीमा शुल्क में क्या बदलाव लाने की कोशिश है?
व्यापार को सुगम बनाने के लिए सीमा शुल्क मामलों में प्रशासनिक सहयोग और सहायता से जुड़े ब्रिक्स समझौते को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि सीमा पार व्यापार की लागत घटेगी, कागजी औपचारिकताएं कम होंगी और अवैध व्यापार पर नकेल कसी जा सकेगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानक निकायों के प्रमुखों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि तकनीकी मानकों और उत्पाद प्रमाणन में एकरूपता लाई जा सके।युवाओं और खेल तकनीक को लेकर क्या नई पहल हुई है?
युवा शक्ति को जोड़ने के लिए 'ब्रिक्स यूथ कोऑपरेशन फ्रेमवर्क 2026' को मुख्य दस्तावेज के रूप में अपनाया गया है। इसके माध्यम से युवाओं के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक संवाद बढ़ेगा। साथ ही खेल के मैदान में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को संस्थागत रूप देने के लिए एक विशेष कार्य समूह बनाया गया है, जो खेल अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को साझा करेगा।
क्या ब्रिक्स की ऐतिहासिक यात्रा ने बहुपक्षीय व्यवस्था को नई ताकत दी?
- ब्रिक्स की नींव साल 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में पड़ी थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका को जोड़ने पर सहमति बनी और 2011 में सान्या सम्मेलन में वह पहली बार शामिल हुआ। जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई पूर्ण सदस्य बने, जबकि जनवरी 2025 में इंडोनेशिया को पूर्ण सदस्यता मिली।
- साल 2025 में बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को पार्टनर देशों के रूप में शामिल किया गया। यह यात्रा दर्शाती है कि यह समूह दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक ध्रुव के रूप में विकसित हो चुका है।
विस्तार से आगे ठोस परिणामों पर क्यों है भारत का सबसे ज्यादा जोर?
भारत के लिए ब्रिक्स का मतलब केवल नए देशों को जोड़कर संख्या बढ़ाना नहीं है। भारत का स्पष्ट लक्ष्य बढ़ती सदस्यता को सार्थक सहयोग और ठोस परिणामों में बदलना है। भारत की अध्यक्षता ने यह साबित कर दिया है कि अलग-अलग राष्ट्रीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं वाले देशों के बीच सहमति कैसे बनाई जा सकती है। भारत मौजूदा व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितैषी बनाने में जुटा है ताकि विकासशील देशों की आवाज बहुपक्षीय वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों में पूरी ताकत से गूंज सके।
शहरों और बुनियादी ढांचे को लेकर क्या पहल हुई है?
- सतत शहरी आवागमन के क्षेत्र में ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब स्थापित किया गया है। इसके साथ जलवायु और आपदा के जोखिम को शहरी योजना, डिजाइन, निवेश, निर्माण और रखरखाव में शामिल करने के लिए जलवायु लचीले शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े स्वैच्छिक सिद्धांत अपनाए गए हैं।
- ब्रिक्स अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क की स्थापना से व्यावहारिक शहरी शोध, देशों के बीच ज्ञान साझा करने और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। तेजी से बढ़ते शहरों के दौर में यह पहल शहरी विकास को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।