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Ayush Talks: इन घरेलू तरीकों को अपनाकर कई बीमारियों को दूर कर सकते हैं, जानिए विशेषज्ञों की राय?

Sun, 23 Oct 2022 07:28 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sun, 23 Oct 2022 07:28 PM IST
सार

केंद्रीय आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन हुआ। 'हर दिन हर घर आयुर्वेद' विषय पर आयोजित इस वेबिनार में बतौर वक्ता सीसीआरएएस के महानिदेशक वैद्य प्रो. रबिनारायण आचार्य, बीएचयू वाराणसी के प्रसूति तंत्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. दीपा मिश्रा और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के शालाक्य विभाग की प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. मंजूशा राजगोपाल शामिल हुए। 

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By adopting these home remedies, you can overcome many diseases, know the opinion of experts
Ayush Talks - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आयुर्वेद ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। खासतौर पर भारत में इसको लेकर लोगों में विश्वास बढ़ा है। अब हर घर में इसकी औषधियों पर लोग भरोसा जताते हैं। घर में किसी को कोई भी तकलीफ होती है, सबसे पहले पारंपरिक उपाय अपनाते हैं। कोरोनाकाल के बाद दुनिया के अन्य देशों ने भी आयुर्वेद का लोहा माना। 
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ये बातें रविवार को केंद्रीय आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार से निकलकर सामने आईं। 'हर दिन हर घर आयुर्वेद' विषय पर आयोजित वेबिनार में बतौर वक्ता सीसीआरएएस के महानिदेशक वैद्य प्रो. रबिनारायण आचार्य, बीएचयू वाराणसी के प्रसूति तंत्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. दीपा मिश्रा और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के शालाक्य विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. मंजूशा राजगोपाल शामिल हुए। सभी ने आयुर्वेद से जुड़ी कई जरूरी बातों को शेयर किया। आइए जानते हैं किसने क्या कहा? 
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By adopting these home remedies, you can overcome many diseases, know the opinion of experts
प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य - फोटो : अमर उजाला
औषधीय गुण वाले कौन से पौधे हैं? किससे क्या फायदा मिल सकता है? 
इस सवाल का जवाब सीसीआरएएस के महानिदेशक वैद्य प्रो. रबिनारायण आचार्य ने दिया। उन्होंने कहा, 'सबसे ज्यादा औषधीय गुणों वाले पौधों में त्रिफला आता है। इसका आयुर्वेद में सबसे ज्यादा उपयोग होता है। इसके अलावा त्रिकुटी भी काफी उपयोगी है। ये हर घर में रहना चाहिए। त्रिफला और त्रिकुटी को प्राइमरी हेल्थ कॉन्सेप्ट से घर में रखना चाहिए। ये दोनों चीजें कई बीमारियों में काफी उपयोगी साबित होती हैं। इसके अलावा हर घर में एक किचन गार्डेन बनाना चाहिए। इसमें एलोवेरा, लौंग, गिलोय, धनिया, हल्दी, तुलसी, पुदीना, मेथी, सौंफ, अदरक को हमेशा घर में रखना चाहिए।' इसके अलावा जिनके पास ज्यादा जमीन है, वो लोग और कई औषधीय गुणों वाले पौधे लगा सकते हैं। 

औषधीय गुणों वाले पौधों का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? 
हर द्रव्य की एक मात्रा होती है। इसके अलावा उसके समय और कितनी बार लेना है इसका भी ख्याल रखना है। ये चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए। घरेलू औषधीय गुणों वाले पौधों का प्रयोग भी हिसाब से ही करना चाहिए।  उदाहरण के लिए हींग का प्रयोग इमरजेंसी में भी होता है और रोजाना यूज में भी होता है। इसी तरह लौंग का प्रयोग होता है। अगर किसी को कीड़ा काट लेता है तो वह लौंग का सेवन करे तो दर्द में कमी आएगी। इसे घिसकर लगाने से भी तुरंत दर्द में कमी आती है। लहसुन, हल्दी, अदरक का औषधीय गुण भी होता है। 

 

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डॉ. दीपा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को क्या करना चाहिए? 
इस सवाल का जवाब बीएचयू के प्रसूति तंत्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. दीपा मिश्रा ने दिया। उन्होंने कहा, 'पीरियड्स नेचुरल प्रक्रिया है। इसे सामान्य तौर पर ही लेना चाहिए। आजकल हल्का सा दर्द होने पर लड़कियां दवा लेने लगती हैं। ज्यादा क्रैंप होने पर दर्द निवारक दवा ले सकते हैं, लेकिन थोड़े बहुत क्रैंप्स हैं तो, उसे नॉर्मल ही लेना चाहिए। तब लोअर एब्डोमेन पर फर्मेंटेशन देकर हल्का सा तेल लगाना चाहिए। इसमें नारायण महानारायण तेल आता है। उसे लगाकर आप गर्म सेंकाई कर सकते हैं। इसके अलावा आयुर्वेद के घरेलू उपाय भी अपना सकते हैं।

पीरियड्स के दौरान महिलाएं और लड़कियां थोड़ी से हींग डालकर अजवायन का काढ़ा बनाकर पी सकती हैं। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा। जिन्हें पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द होता है, वो काला तिल और गुड़ के लड्डू बनाकर खा सकते हैं। ज्यादा फ्लोटिंग, फ्री मेंस्ट्रल सिंड्रोम जैसे लक्षण होने पर भी आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग कर सकते हैं। इससे काफी आराम मिलेगा और एलोपैथिक दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से भी बचा जा सकता है।  



अगर किसी में खून की कमी हो तो पीरियड्स में क्या करना चाहिए? 
कई बार सही आहार की कमी के चलते लड़कियों में खून की कमी हो जाती है। हरी सब्जियां खानी चाहिए। आंवला, अनार, सेब, केला, चुकंदर खाना चाहिए। ये हमेशा हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। लेकिन ये हमेशा रखना होगा। डेली रूटीन में रखना होगा। इससे स्वास्थ्य बेहतर होगा। 

महिलाएं यूटीआई की समस्या को कैसे दूर करें? 
इसके लिए सबसे जरूरी है साफ-सफाई। ऐसी जगहों पर मल-मूत्र त्यागने से बचें जहां गंदगी होती है। खासतौर पर पब्लिक टॉयलेट में भी गंदगी होती है। लड़कियों को मेंट्रूअल हाइजीन का भी ध्यान रखें। लड़कियों में ये समस्या होना आम बात है। ऐसी परिस्थिति में खूब पानी पीना चाहिए। अगर उन्हें बर्निंग सेंसेशन हो रहा है तो सौंफ को भिगोकर उसका पानी सुबह पीना चाहिए। इससे बर्निंग में काफी आराम मिलता है।  

 
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डॉ. मंजूशा राजगोपाल - फोटो : अमर उजाला
एलर्जी से बचने के लिए क्या करना चाहिए? 
इस सवाल का जवाब डॉ मंजूशा राजगोपाल ने दिया। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के शालाक्य विभाग की प्रमुख डॉ. मंजूशा ने कहा कि इसे आयुर्वेद में प्रतिशाय के नाम से जाना जाता है। ये ज्यादातर तब होता है, जब एक मौसम से दूसरा मौसम चेंज होता है। मसलन जैसे ठंड का मौसम आता है। तब इस तरह के मरीज ज्यादा आते हैं। ऐसे बदलते मौसम में हमें अपने आहार को भी चेंज करना चाहिए। इस समय च्वयप्राश लेना चाहिए। गुड़ वाली चाय पिया करें। ये सर्दियों का आहार है। अगर हम ऐसा आहार लेना शुरू कर देंगे तो हमें इस तरह की एलर्जी नहीं होगी।

इसके अलावा हमें घर से बाहर निकलने के पहले या बाहर से आने के बाद अपने नाक में अणु तेल की दो-दो बूंद डालनी चाहिए। अणु के अलावा सरसों का तेल या देसी घी भी डाल सकते हैं। इससे सर्दियों से बच सकते हैं। ठंडा पानी, आइसक्रीम का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ऐसे भोजन भी नहीं करने चाहिए जिससे पेट में ज्यादा गैस बनता है। जंक फूड, हाई कैलोरी फूड नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा एसिडिटी और गैस के साथ ज्यादातर कॉस्टिपेशन की समस्या होती है। ऐसे में हर रोज त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा तीखा, तला हुआ और खट्टा आहार नहीं खाना चाहिए।

दांत को लेकर काफी समस्याएं होती हैं, इसे कैसे मजबूत रखें?
इन्हें मजबूत रखने के लिए सफाई बहुत जरूरी है। सुबह और शाम दो बार इसकी अच्छे से सफाई होनी चाहिए। आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर भी इसे मजबूत रख सकते हैं। ऐसे में टूथपेस्ट से सफाई करने के बाद त्रिफला के पानी से कुल्ला करें तो ये सही रहता है। जब भी कुछ खाते हैं तो पानी से कुल्ला जरूर करें। ऐसा करने से खाने के कण दांतों में नहीं फंसे रहेंगे। मसूड़ों की मालिश भी करनी चाहिए। इसमें त्रिकटू का प्रयोग करना चाहिए। ये माउथ फ्रेशनर का काम करते हैं। इसके अलावा दांतों में पीलापन होने पर कोयले के राख का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा दर्शन संस्कार चूर्ण है, जिसका काफी फायदा हो सकता है। ये दूसरी दातों की समस्याओं को भी ठीक करता है।
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