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कौन हैं आकाश आनंद: जिनसे मायावती ने उत्तराधिकार छीना फिर बसपा से निकाला, पिछली बार से कितना अलग है नया फैसला?

Mon, 03 Mar 2025 03:09 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 03 Mar 2025 03:09 PM IST
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सार
यह जानना अहम है कि आखिर आकाश आनंद कौन हैं? मायावती के साथ उनका राजनीतिक स्तर पर रिश्ता कैसा रहा है? पिछली बार जब बसपा सुप्रीमो ने उन्हें पद से हटाया था, तो इसकी क्या वजह रही थी? इसके अलावा इस बार आकाश आनंद को हटाए जाने के पीछे उनके ससुर से उनका जुड़ाव किस तरह मुश्किलों की वजह बना? आइये जानते हैं...
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BSP Supremo Mayawati removes Nephew Akash Anand from successor and National Coordinator again reason of Tussle
मायावती ने आकाश आनंद को बसपा में सभी पदों से हटाया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने रविवार को ही आकाश से एक बार फिर उत्तराधिकार छीनने का एलान भी कर दिया और सोमवार आते-आते बसपा से निष्कासित करने तक का एलान कर दिया।  इस बार उनका फैसला कितना सख्त है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साफ कर दिया कि उनके जीते-जी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में अब कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। अब आकाश को बसपा से निकाले जाने के बाद उनके सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


गौरतलब है कि इसी तरह पिछले साल भी मायावती ने आकाश को कुछ इसी तरह पदों से हटाने का फैसला किया था। हालांकि, तब उन्हें पार्टी में बनाए रखा गया था। लेकिन अब उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया गया है। इस फैसले के पीछे वजहें भी बदली हैं।


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर आकाश आनंद कौन हैं? मायावती के साथ उनका राजनीतिक स्तर पर रिश्ता कैसा रहा है? पिछली बार जब बसपा सुप्रीमो ने उन्हें पद से हटाया था, तो इसकी क्या वजह रही थी? इसके अलावा इस बार आकाश आनंद को हटाए जाने के पीछे उनके ससुर से उनका जुड़ाव किस तरह मुश्किलों की वजह बना? आइये जानते हैं...

पहले जानें- कौन हैं आकाश आनंद?
आकाश आनंद मायावती के छोट भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। गुरुग्राम से शुरुआती दौर की पढ़ाई के बाद आकाश ने लंदन से 2013 से 2016 के बीच एमबीए की शिक्षा ग्रहण की। वापस आने पर उन्होंने कुछ कंपनियां भी खोलीं। हालांकि, फिर उन्होंने राजनीति में आने का फैसला लिया। वर्ष 2017 में मायावती ने सहारनपुर में आयोजित एक रैली में पहली बार आकाश आनंद को मंच पर अपने साथ बैठाकर पार्टी काडर को संदेश दिया कि भविष्य में आकाश ही बसपा संगठन में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।

2019 में हुए लोकसभा चुनाव में आकाश को स्टार प्रचारक बनाया गया। साथ ही युवाओं को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी। इसके बाद मायावती ने आकाश को पार्टी का नेशनल कोआर्डिनेटर बनाकर सबको चौंका दिया था। आकाश की शादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रजा से मार्च 2023 में हुई।

आकाश आनंद को इसके ठीक बाद मायावती ने दिसंबर 2023 में अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। अपनी राजनीतिक विरासत सौंपते हुए मायावती ने एलान किया कि आकाश उन राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे, जहां दल ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। बसपा सुप्रीमो ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक का पद भी सौंप दिया, जिसका सीधा मतलब था कि आकाश बसपा में नंबर-2 पद पर थे। 

पार्टी को सोशल मीडिया पर चमकाया
आकाश आनंद ने पार्टी में मिली जिम्मेदारियों के बाद सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जरिया बनाकर लोगों के बीच पहुंच बनानी शुरू की। ट्विटर (अब एक्स), फेसबुक आदि माध्यमों के जरिए बसपा सोशल मीडिया पर बाकी दलों की तरह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगी। बसपा सुप्रीमो मायावती के एक्स हैंडल का सारा काम भी आकाश आनंद की निगरानी में होता रहा।

पांच महीने में ही क्यों पद से हटा दिए गए थे आकाश?
हालांकि, बहुजन समाज पार्टी की नई पीढ़ी के तौर पर पार्टी में अहम पदों पर काबिज किए गए आकाश की शुरुआत अच्छी नहीं रही। महज पांच महीने में ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनसे नेशनल कोऑर्डिटनेटर पद के साथ अपना उत्तराधिकारी होने की जिम्मेदारी भी छीन ली। उन्होंने अपने इस फैसले को कुर्बानी का रूप देकर यह संदेश भी दिया कि बसपा अपने मूवमेंट से किसी भी कीमत पर नहीं डिगेगी।

बताया जाता है कि पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव से पहले जब आकाश आनंद ने बसपा के लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत की तो पार्टी को उनसे काफी उम्मीदें थीं। हालांकि, पश्चिमी यूपी के नगीना में हुई अपनी पहली ही जनसभा में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से प्रत्याशी चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण पर सीधा हमला बोला, जो कि बसपा नेतृत्व को रास नहीं आया। आकाश आनंद के इस रुख का सियासी फायदा चंद्रशेखर को मिलने की संभावना जताई जाने लगी। इसके बाद उन्होंने सीतापुर में दिए अपने भड़काऊ भाषण से पार्टी नेतृत्व को नाराज करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। 

उनके भाषण की वजह से बसपा के जिलाध्यक्ष विकास राजवंशी, लखीमपुर के प्रत्याशी अंशय कालरा, धौरहरा के प्रत्याशी श्याम किशोर अवस्थी, सीतापुर के प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव पर भी मुकदमा हो गया। यह आकाश आनंद पर भारी पड़ गया और माायवती ने बिना कोई मुरव्वत किए उन्हें सारी जिम्मेदारियों से हटा दिया।

मनाही के बाद भी करते रहे प्रचार
बसपा सुप्रीमो ने सीतापुर के प्रकरण के बाद आकाश आनंद के प्रचार पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद वह लगातार दिल्ली में रहकर प्रचार-प्रसार कर रहे थे। आकाश अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों, दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विदेश में बसे बहुजन समाज के लोगों के साथ संपर्क करते हुए बसपा का प्रचार करते रहे। उन्होंने ऐसे मुद्दों को भी हवा दी, जिससे बसपा नेतृत्व किनारा करता रहा है। 

इस बार क्यों पार्टी से निकाले गए आकाश आनंद?
बताया जाता है कि इस बार मायावती की आकाश आनंद पर की गई कार्रवाई राजनीतिक कूटनीति, आंतरिक कलह सुलझाने और बसपा में दो-फाड़ होने की आशंका को रोकने के लिए की गई। खुद बसपा सुप्रीमो ने अपने फैसले के पीछे आकाश आनंद के ससुर का नाम लिया है। अटकलें हैं कि मायावती को यह अंदाजा हो गया था कि आकाश पर उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ का काफी प्रभाव था। गौरतलब है कि अशोक को पिछले हफ्ते ही बसपा से पार्टी-विरोधी गतिविधियों के लिए निष्काषित कर दिया था। अब आकाश को भी पार्टी से निकालकर उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर साफ संदेश देने की कोशिश की है। 

अपने फैसले के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि बसपा की ऑल-इंडिया की बैठक में कल आकाश आनंद को पार्टी हित से अधिक पार्टी से निष्कासित अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार बने रहने के कारण नेशनल कोआर्डिनेटर सहित सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। इसका उसे पश्चताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी लेकिन इसके विपरीत आकाश ने जो अपनी लंबी-चौड़ी प्रतिक्रिया दी है, वह उसके पछतावे व राजनीतिक मैच्युरिटी का नहीं, बल्कि उसके ससुर के ही प्रभाव वाला ज्यादातर स्वार्थी, अहंकारी व गैर-मिशनरी है, जिससे बचने की सलाह मैं पार्टी के ऐसे सभी लोगों को देने के साथ दंडित भी करती रही हूं।

अतः डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट के हित में तथा कांशीराम की अनुशासन की परम्परा को निभाते हुए आकाश आनन्द को, उनके ससुर की तरह, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में पार्टी से निष्कासित किया जाता है।

इससे पहले रविवार को मायावती ने आकाश को पद से हटाने के साथ उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी खूब खरी-खरी सुनाई। उन्होंने राजनीति से दूर आकाश की पत्नी को भी नहीं बख्शा। मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को, जो आकाश आनंद के ससुर भी है, उसे अब पार्टी व मूवमेंट के हित में पार्टी से निकाल कर बाहर किया है, जिसने उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में पार्टी को दो गुटों में बांटकर इसे कमजोर करने का घिनौना कार्य किया है, जो कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं है। 

उन्होंने कहा, "जहां तक इस मामले में आकाश आनंद का सवाल है तो आपको यह मालूम है कि अशोक सिद्धार्थ की लड़की के साथ इनकी शादी हुई है। अब लड़की पर अपने पिता का कितना प्रभाव पड़ता है और आकाश पर भी उसकी लड़की का कितना प्रभाव पड़ता है, यह हमें गंभीरता से देखना होगा। इसलिए पार्टी और मूवमेंट के हित में आकाश को सभी जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया है। इसके लिए पार्टी नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आकाश आनंद के राजनीतिक करियर को भी खराब कर दिया है।"

पार्टी का मतदाता आधार बढ़ाने में भी सफल नहीं हुए आकाश
गौरतलब है कि मायावती ने आकाश को बसपा के गिरते वोटर बेस को बढ़ाने का जिम्मा दिया था। हालांकि, 2023 के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान में पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट आई। बसपा ने यहां न सिर्फ सीटों में कमी दर्ज की, बल्कि उसके वोट प्रतिशत में भी भारी गिरावट देखी गई। मायावती की आकाश आनंद को एक के बाद एक राज्यों में बसपा का ग्राफ बढ़ाने की जिम्मेदारी देना भी काम नहीं आया। 
 

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