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Boycott Chinese Products: केजरीवाल की इस मांग का भाजपा भी नहीं कर पाएगी विरोध, लेकिन विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Mon, 19 Dec 2022 03:12 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 19 Dec 2022 03:12 PM IST
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सार
Boycott Chinese Products: आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें चाहकर भी भारत चीन का बहिष्कार करने की स्थिति में नहीं है। इसमें सौर ऊर्जा, बिजली उपकरण, मेडिकल उपकरण और विभिन्न वस्तुओं के निर्माण हेतु उपयोग में लाई जा रही मशीनें शामिल हैं
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Boycott Chinese Products: BJP will not able to oppose the demand of arvind Kejriwal
Boycott Chinese Products - फोटो : PTI (File)

विस्तार

राजनीति के चतुर खिलाड़ी बन चुके अरविंद केजरीवाल समय-समय पर ऐसी मांगें करते रहे हैं, जिसे पूरा कर पाना कई बार केंद्र सरकार के लिए भी संभव नहीं होता, लेकिन इन मांगों के चलते वे चर्चा के केंद्र में अवश्य आ जाते हैं। पिछले ही दिनों उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्र सरकार से भारतीय नोटों पर गणेश-लक्ष्मी की छवियां अंकित कराने की मांग की थी। उनका दावा था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था बेहतर करने में मदद मिलेगी। केजरीवाल की इस मांग को उनके हिंदू कार्ड के रूप में देखा गया था, हालांकि, केजरीवाल से एक अलग तरह की राजनीति की उम्मीद करने वाले लोगों ने उनके इस बयान की काफी आलोचना की थी।  अर्थव्यवस्था के जानकारों ने भी केजरीवाल के इस बयान को बेतुका बताया था।

संघ और उससे जुडे संगठन भी करते हैं विरोध

केजरीवाल ने एक बार फिर इसी तरह की गुगली फेंकी है, जिसका विरोध भाजपा या आरएसएस से जुड़े लोग नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा है कि एक तरफ चीन हमारे देश की सीमाओं का अतिक्रमण कर रहा है, लेकिन उस पर रोक लगाने की बजाय केंद्र सरकार उसे इनाम देने का काम कर रही है। भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये का सामान चीन से आयात करता है। इसमें खिलौने, बिजली के सामान के साथ-साथ चश्मे जैसे बेहद सामान्य सामान भी होते हैं, जिसे अपने देश में ही बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय उद्यमियों को पर्याप्त सुविधाएं दी जाएं, तो भारत न केवल इन सामानों के आयात से बचेगा, बल्कि वह चीन सहित विदेशों को इसका निर्यात भी करने लगेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि लोग चीनी उत्पादों को न खरीदें, दोगुनी कीमत होने पर भी लोग भारतीय उत्पाद ही खरीदें। इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। केजरीवाल की इस मांग का शायद ही कोई विरोध करे।

चूंकि, भाजपा और उसका मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) स्वयं इसी तरह की बात करते रहे हैं, स्वदेशी जागरण मंच विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के अभियान चलाता रहा है, वे केजरीवाल की इस मांग का विरोध भी नहीं कर पाएंगे। वे राजनीतिक तौर पर अरविंद केजरीवाल की इस मांग के समर्थन में चाहे सामने न आएं, लेकिन वे इसका विरोध भी नहीं कर पाएंगे। केजरीवाल की राष्ट्रीय महत्त्वाकांक्षाओं में उनके सामने आने वाला कोई दल भी इस मांग का विरोध नहीं कर पाएगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

हालांकि, अर्थव्यवस्था के जानकारों का मामला है कि भारत इस तरह की स्थिति में नहीं है कि वह चीन के सामान का पूर्ण बहिष्कार करने का जोखिम उठा सके। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि इस बात में कोई शक नहीं है कि हर साल हजारों करोड़ रुपये का गैर जरूरी सामान चीन से आयात किया जाता है। गैर-जरूरी इस संदर्भ में कि इनका निर्माण भारत में ही स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के द्वारा किया जा सकता है। जैसे मूर्तियां, सजावटी पेपर, मोमबत्ती, खिलौने, बिजली की लाइटें-झालर, रंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल-लैपटॉप-टीवी के पुर्जे, गाड़ियों-मशीनों के पुर्जे, प्लास्टिक के बने घरेलू सामान इत्यादि।

इन सामानों का हमारे उत्पादक ज्यादा बेहतर ढंग से उत्पादन कर रहे हैं और वे गुणवत्ता की दृष्टि से भी कहीं ज्यादा बेहतर हैं। लेकिन इनकी कीमतें चीनी उत्पादों की तुलना में ज्यादा हैं। चीनी उत्पादक इन्हीं सामान को बेहतर तकनीकी से ज्यादा सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। बेहतर तकनीकी और मूल्य में सस्ता होने के कारण हमारे विक्रेता चीनी उत्पादों को प्राथमिकता देते है। यही कारण है कि टिकाऊ होने के बाद भी भारतीय उत्पाद चीनी उत्पादों के सामने टिक नहीं पाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादकों को बेहतर तकनीकी उपलब्ध कराकर इस समस्या से निपटा जा सकता है। खेल, सौर ऊर्जा उपकरण और मोबाइल फोन निर्माण में भारत इसी नीति पर आगे बढ़ रहा है।

लेकिन इनका बहिष्कार संभव नहीं

डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें चाहकर भी भारत चीन का बहिष्कार करने की स्थिति में नहीं है। इसमें सौर ऊर्जा, बिजली उपकरण, मेडिकल उपकरण और विभिन्न वस्तुओं के निर्माण हेतु उपयोग में लाई जा रही मशीनें शामिल हैं। भारत अब G-20 की मेजबानी कर रहा है और उसके सामने COP-26 के हरित ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने की बड़ी जिम्मेदारी है। भारत सौर ऊर्जा उपकरणों के मामले में लगभग सौ फीसदी चीन पर निर्भर करता है। विशेषकर सोलर पैनल और बैटरी के मामले में वह बुरी तरह चीन पर निर्भर है। यदि हम चीन के उत्पादों का बहिष्कार करते हैं, तो हम स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को समय पर हासिल नहीं कर पाएंगे।

भारत स्वास्थ्य उपकरणों के मामले में भी लगभग पूरी तरह चीन पर निर्भर है। सर्जरी करने के उपकरण, बेड बनाने के सामान और सफाई उपकरणों के लिए भी भारत चीन पर निर्भर है। इन पर प्रतिबंध लगाने की बात भारत सोच भी नहीं सकता क्योंकि स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा होने के कारण इसकी कीमत लोगों की जान से चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत को दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी। जिस तरह केंद्र सरकार ने बैटरी, सोलर पैनल और खिलौने के निर्माण में कंपनियों को अवसर देना शुरू किया है, उसी प्रकार सभी क्षेत्रों में काम करना पड़ेगा। इसके बाद ही भारत चीन से मुकाबला करने में सक्षम हो पाएगा। हालांकि, इसके लिए तीन से चार दशक तक का समय लग सकता है। तकनीकी बाधाओं के कारण इस क्षेत्र में तुरंत परिणाम मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

केजरीवाल के बयान के मायने

बड़ा प्रश्न है कि आईआईटी पासआउट अरविंद केजरीवाल इन बातों को समझते हुए भी इस तरह की बात क्यों करते हैं? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह वे स्वयं को ज्यादा बड़े राष्ट्रवादी के तौर पर पेश करना चाहते हैं। चूंकि अरविंद केजरीवाल स्वयं को राष्ट्रीय राजनीति में प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश करने की रणनीति पर चल रहे हैं, वे चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील कर अपना कद बढ़ाना चाहते हैं। इसका उद्देश्य अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा के मुकाबले के लिए जोश से भरना है।

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