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महाराष्ट्र: 'जांच सिर्फ इसलिए ट्रांसफर नहीं कर सकते, क्योंकि यह संबंधित पक्ष को नहीं भा रही', कोर्ट की टिप्पणी

Thu, 16 Nov 2023 04:51 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 16 Nov 2023 04:51 PM IST
सार

मुकदमे को दूसरी अदालत में भेजने की अपील खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। अदालच ने कहा, जांच सिर्फ इसलिए स्थानांतरित नहीं की जा सकती, क्योंकि संबंधित पक्ष को जांच एजेंसी 'आकर्षक' नहीं लगती या उसे पुलिस की जांच पसंद नहीं है।

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Bombay High Court probe Transfer investigation not appealing party concerned
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी मामले की जांच केवल इसलिए पुलिस से किसी विशेष एजेंसी को हस्तांतरित नहीं की जा सकती क्योंकि जांच संबंधित पक्ष के लिए "आकर्षक नहीं" है या उसे जांच पसंद नहीं आ रही। न्यायमूर्ति एन डब्ल्यू साम्ब्रे और न्यायमूर्ति एन आर बोरकर की खंडपीठ ने 6 नवंबर को यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि एक जांच एजेंसी पर बोझ नहीं डाला जा सकता। निष्पक्ष और त्वरित जांच का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी कोणों से अभियोजन पक्ष के मामले की जांच जरूरी है। अदालत ने इस अहम टिप्पणी के साथ भाग्यश्री मोटे की याचिका खारिज कर दी। 
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याचिकाकर्ता ने अपनी 32 वर्षीय बहन की मौत मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस से लेकर महाराष्ट्र आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने की मांग की थी। दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने कहा, सिर्फ इसलिए कि महाराष्ट्र पुलिस की जांच याचिकाकर्ता को पसंद नहीं आ रही, या जांच अधिकारी की जांच में गलती की आशंका है या जांच अपील करने वाले की दलीलों के विपरीत है, इस आधार पर जांच ट्रांसफर नहीं की जा सकती।
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हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की बहन की मौत की जांच स्थानांतरित करने से इनकार करते हुए कहा कि मामलों को स्थानांतरित करने की शक्ति का प्रयोग विश्वसनीयता प्रदान करने और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाली जांच या घटनाओं में विश्वास पैदा करने के लिए किया जाता है।
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अदालत ने कहा, केवल घटिया, पक्षपातपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण जांच के कारण न्याय न मिलने की आशंका के मामले में अदालतों को असाधारण शक्तियों का प्रयोग करने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने कहा, अदालत को इस सिद्धांत के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है कि स्थानांतरण का आदेश सिर्फ इसलिए नहीं दिया जाता है क्योंकि एक पक्ष जांचकर्ता को किसी निष्कर्ष पर ले जाना चाहता है।"

याचिकाकर्ता मोटे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसकी बहन की उसके ससुराल वालों ने हत्या कर दी, जबकि पुलिस ने मौत में किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया। उन्होंने कहा, पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण दिल की बीमारी बताया। रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता की बहन - मधु - की इस साल मार्च में मृत्यु हो गई। मौत लीवर सिरोसिस से पीड़ित पति के निधन के एक महीने बाद हुई।

मोटे ने आरोप लगाया कि उसकी बहन की हत्या कर दी गई क्योंकि उसके ससुराल वाले उसे अपनी संपत्ति का हिस्सा नहीं देना चाहते थे। हालांकि, मृतक के ससुराल वालों ने दावा किया कि उन्होंने अपने बेटे और बहू को बहुत पहले ही त्याग दिया था क्योंकि वह शराबी था।


उच्च न्यायालय ने जांच दस्तावेजों पर गौर करने के बाद कहा कि पुलिस ने विस्तृत जांच की है और हर संभावना पर गौर किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच और चिकित्सीय साक्ष्य इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचते हैं कि महिला की मौत को लेकर कोई साजिश (homicidal death) रची गई।
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