फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   bjp win up civic polls but its way not easy for victory in upcoming elections

यूपी निकाय चुनाव में 'प्रचंड जीत' के बावजूद BJP की राह आसान नहीं, जानें क्यों?

Sat, 02 Dec 2017 01:07 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Sat, 02 Dec 2017 01:07 PM IST
विज्ञापन
 bjp win up civic polls but its way not easy for victory in upcoming elections
बीजेपी - फोटो : FILE PHOTO

उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव को आठ महीने पहले मुख्यमंत्री बने आदित्यनाथ योगी की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। परिणाम आने के बाद योगी इस परीक्षा में पास ही नहीं हुए, बल्कि ये कहा जाए कि उन्होंने ये परीक्षा 'विशेष योग्यता' के साथ पास की, तो गलत नहीं होगा।

विज्ञापन


पार्टी ने 16 में से 14 नगर निगमों में जीत हासिल की। साथ ही नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी अपना परचम लहराया। लेकिन परिणामों का विश्लेषण करने और जीत-हार के अंतर को देखने के बाद पर्यवेक्षकों का कहना है कि बीजेपी को जीत भले ही मिली हो, लेकिन इसे न तो विपक्ष की बड़ी हार के रूप में देखना चाहिए और न ही बीजेपी की 'बड़ी जीत' के रूप में।
विज्ञापन


ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि नगर निकाय चुनाव में उसकी स्थिति तब भी काफी मजबूत देखी गई थी जब वो न तो केंद्र की सत्ता में थी और न ही राज्य की।

क्या वाकई बड़ी है जीत?
साल 2012 में निकाय चुनाव से ठीक पहले हुए राज्य विधान सभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। लेकिन निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नगर निगम की 12 में से दस सीटें जीत ली थीं और वॉर्डों में भी उसकी दमदार मौजूदगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरे, विपक्ष के एकजुट होकर न लड़ने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी वैसा क्लीन स्वीप नहीं कर पाई है, जैसा उसने 2014 के लोकसभा और इसी साल हुए विधान सभा चुनाव में किया था।

नगर निगम में भी पार्टी तीन-चार जगहों पर मामूली अंतर से ही जीती है जबकि नगर पंचायत और नगर पालिका में समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने उसे काफी अच्छी टक्कर दी है। कांग्रेस पार्टी से भी बीजेपी को कई जगह कड़ी चुनौती मिली है।

विपक्ष का प्रदर्शन खतरे की घंटी

 bjp win up civic polls but its way not easy for victory in upcoming elections
अखिलेश यादव
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं कि सच तो ये है कि विपक्ष इस चुनाव के दौरान जनता के भीतर चल रहे द्वंद्व को समझने में नाकाम रहा जिसका वो फायदा ले सकता था। योगेश मिश्र कहते हैं, "अखिलेश यादव और मायावती प्रचार के लिए बाहर ही नहीं निकले जबकि आदित्यनाथ योगी का पूरा मंत्रिमंडल और पार्टी का पूरा संगठन रात-दिन एक किए हुए था।"

"वास्तव में विपक्षी दल ये नहीं समझ पाए कि भारतीय जनता पार्टी की लहर वैसी नहीं है जैसी कि वो मानकर चल रहे हैं, जबकि जनता इस इंतजार में थी।" योगेश मिश्र कहते हैं कि नगर निगम में समाजवादी पार्टी को भले ही सफलता न मिली हो लेकिन नगर पालिका और नगर पंचायतों में उसने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसके अलावा, उनके मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की 'दमदार वापसी' भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है।

वो कहते हैं, "इससे साफ है कि दलित मतदाता मायावती के पास वापस आ गया है। यदि ऐसा रहा तो निश्चित तौर पर मुस्लिम मतदाता बीएसपी की ओर जाएगा और जाहिर तौर पर ध्रुवीकरण का लाभ बीजेपी उस तरह से नहीं उठा सकेगी जैसा कि उसने लोकसभा या विधान सभा चुनाव के दौरान उठाया था।"

यही नहीं, निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भले ही अपार सफलता मिली हो लेकिन कुछ परिणाम बेहद चौंकाने वाले और पार्टी नेताओं की फजीहत कराने वाले भी रहे। मुख्यमंत्री योगी के गृह नगर गोरखपुर में पार्टी मेयर का चुनाव भले ही जीत गई हो लेकिन जिस वॉर्ड में योगी खुद मतदाता हैं वहां पार्टी की करारी हार हुई है।

मोदी का आक्रामक प्रचार और वोटकटवा चालें

 bjp win up civic polls but its way not easy for victory in upcoming elections
नरेंद्र मोदी

वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गृह जनपद कौशांबी में नगर पंचायत चेयरमैन की छह सीटों में से एक पर भी पार्टी नहीं जीत पाई। वैसे तो राहुल गांधी के गढ़ अमेठी में कांग्रेस की भी करारी हार हुई है। गढ़ के रूप में मशहूर कई सीटों पर सपा और बीएसपी को भी शिकस्त मिली है, लेकिन जानकारों के मुताबिक सबसे ज्यादा सोचने वाली बात बीजेपी के लिए ही है।

लोकसभा और विधान सभा चुनाव में करीब 43 फीसद मतदाताओं का जो समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौंप कर गए थे, उसे बनाए रखने में वो कामयाब क्यों नहीं हुई?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed