फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BJP has not done anything at Ram temple, why are support vishwa Hindu Parishad?

राम मंदिर पर भाजपा ने ‘कुछ’ नहीं किया, फिर भी विश्व हिंदू परिषद समर्थन को मजबूर क्यों?

Tue, 05 Feb 2019 09:27 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Digital Updated Tue, 05 Feb 2019 09:27 PM IST
विज्ञापन
BJP has not done anything at Ram temple, why are support vishwa Hindu Parishad?
बीजेपी

बाबा रामदेव की तरह विहिप और आरएसएस में भी अनेक ऐसे लोग हैं जो यह मानते हैं कि अगर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कार्य नहीं हुआ तो सम्भवतः यह कभी नहीं होगा (क्योंकि चुनाव का परिणाम अनिश्चित है)। इसलिए समय-समय पर मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार पर हर तरह से दबाव डाला गया। दिल्ली में हाल ही में दो बार धर्म संसद का आयोजन हुआ।

विज्ञापन


संतों ने सरकार को राममंदिर पर कानून बनाने या अध्यादेश लाने का स्पष्ट आदेश दिया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार सीधे मंदिर निर्माण किये जाने की वकालत की। सुरेश भैया जी जोशी ने विहिप की रामलीला मैदान में आयोजित रैली से ही मंदिर निर्माण की आवाज उठाई। लेकिन आज जब कि भाजपा ने मंदिर निर्माण पर कोई ठोस कदम उठाने से साफ़ इनकार कर दिया है, विहिप एक बार फिर सरकार के पीछे खड़ी है। सवाल यह है कि केंद्र के इनकार के बाद भी विहिप उसके समर्थन को मजबूर क्यों है?   
विज्ञापन

 
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के एक शीर्ष अधिकारी ने सरकार के इस रुख से गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि सरकार जेडीयू और लोकजन शक्ति पार्टी जैसे सहयोगी दलों के संभावित विरोध को देखते हुए राममंदिर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाने से बच रही है। लेकिन उसके इस कदम से विहिप की समाज में विश्वसनीयता पर आघात हुआ है। उन्होंने कहा कि आज तक वे जिस समाज से यह कहकर भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए कहते आ रहे थे कि बीजेपी के सत्ता में आने पर मंदिर निर्माण अवश्य होगा, आज उसका सामना करने का नैतिक साहस उनमें नहीं है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


राममंदिर पर कोई ठोस कदम न उठाने के बाद भी आरएसएस/विहिप सरकार का समर्थन क्यों कर रहे हैं, इस सवाल पर विहिप के एक अन्य शीर्ष अधिकारी ने कहा कि इस स्थिति में हमारे सामने दो विकल्प बचते थे- एक तो यह कि या तो हम बीजेपी और मोदी का समर्थन बंद कर दें और केंद्र में गैर भाजपा की सरकार आने दें जो प्रत्यक्ष तौर पर मंदिर निर्माण में रोड़े अटका रहे हैं। दूसरा ये कि हम भाजपा का समर्थन करें और उनसे भविष्य में इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम बढ़ाने की उम्मीद करें। हमने दूसरा विकल्प चुना।

इसके पीछे स्पष्ट वजह यह है कि इसी सरकार ने विहिप के गोरक्षा मुद्दे पर एक आयोग गठित करने और गोवंश की रक्षा के लिए 750 करोड़ रूपये बजट आवंटित करने का काम किया है। इसी सरकार ने राम पथ गमन और अयोध्या को एक न्य स्वरूप देने का काम किया है। इसी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गैर विवादित भूमि राममंदिर न्यास को देने के लिए याचिका दाखिल की है। ऐसे में भाजपा से उम्मीद रखने के आलावा आरएसएस-विहिप के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। नेता ने यह भी बताया कि प्रयागराज की धर्म संसद में भी भाजपा ने अपनी क़ानूनी और राजनीतिक मजबूरी स्पष्ट की थी।


विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने पूर्व में इसे संघ परिवार का दोहरा चरित्र बताया था। उनका कहना था कि बीजेपी के पालमपुर अधिवेशन में ही यह बात स्पष्ट कर दी गई थी कि राममंदिर का निर्माण संसद में कानून के जरिये ही किया जा सकता है। इसके लिए सत्ता चाहिए और सत्ता के लिए आन्दोलन किया गया, लेकिन आज जब भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में है, वह अगले चुनाव के डर से कानून बनाने से बच रही है। तोगड़िया का आरोप था कि भाजपा ने राममंदिर मुद्दे को सत्ता पाने का एक साधन मात्र बना दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed