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बालिका गृहों की काली सच्चाईः समाजसेवा की चादर के नीचे दरिंदगी और शोषण की कालिख

Mon, 06 Aug 2018 07:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 06 Aug 2018 07:14 PM IST
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Bihar to Uttar Pradesh and Jharkhand: No place is safe for Girls in India
शारीरिक उत्पीड़न

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से मासूम अनाथ बच्चियों के शोषण की ऐसी चीख उठी जिसने देश की संसद और राजनीति में भूचाल ला दिया है। मामला इस कदर संगीन हो चुका है कि इसकी जांच सीबीआई को करनी पड़ रही है। खुद बिहार के मुख्यमंत्री भी इस मामले पर अफसोस जता चुके हैं। लेकिन यह कोई इकलौता मामला नहीं है। मुजफ्फरपुर के इस कांड से पहले झारखंड से बच्चों को गोद देने में हुई धांधली सामने आई थी। बिहार के ही भागलपुर जिले से कमोबेश इसी तरह की शिकायत सामने आई। इसके बाद उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से भी घिनौनी हरकत की शिकायतें आना शुरू हुईं।

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इससे एक बार फिर यह पुख्ता होता दिख रहा है कि राजनीतिक रसूख का फायदा उठाते हुए कुछ सफेदपोश लोग अपनी घिनौनी हरकतों को अंजाम देते रहते हैं। उनका साथ सरकारी तंत्र में शामिल कुछ ऐसे हैवान देते हैं तो इंसान के रूप में राक्षस होते हैं। 
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यह भी पढ़ें: यूपी में मुजफ्फरपुर जैसा घिनौना कांड, नारी संरक्षण गृह में देह व्यापार का खुलासा
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मुजफ्फपुर के बालिका गृह में बच्चियों के साथ घटी दरिंदगी सफेद पोश समाज की बानगी भर है। अभी मुजफ्फरपुर के एक मामले की जांच पूरी भी नहीं हुई थी कि देशभर से बच्चियों, महिलाओं और नवजातों के साथ अत्याचार के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला उत्तरप्रदेश के देवरिया का है जहां के एक नारी संरक्षण गृह में अनाथ बच्चियों से देह व्यापार कराए जाने का पता चला है। बार-बार हो रहे अत्याचार से परेशान एक बच्ची संरक्षण गृह से भागी और उसने देर शाम नजदीक पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद यह खुलासा हुआ।

यह भी पढ़ें: मुजफ्फरपुर बालिका गृह केस: राज्यपाल के आदेश पर 6 जिलों के सहायक निदेशक अफसर निलंबित

बालिका के शिकायत के बाद  रात में पुलिस ने छापा मारा तो संरक्षण गृह से 18 लड़कियां गायब मिलीं। पुलिस ने संचालिका और उसके पति को तो तत्काल ही गिरफ्तार कर लिया वहीं मुजफ्फरपुर मामले से सबक लेते हुए  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आनन-फानन में जिले के डीएम सुजीत कुमार सहित दो अफसरों को निलंबित कर दिया है। लेकिन अधिकारियों के निलंबन मात्र से महिलाओं बच्चियों के साथ होने वाला अत्याचार थमने वाला नहीं है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो जब बच्चियां घरों में अपनों के साए में सुरक्षित नहीं हैं तो इन अनाथ बच्चियों की कौन सुध लेगा। 

Bihar to Uttar Pradesh and Jharkhand: No place is safe for Girls in India
ब्रजेश ठाकुर

तीन महीने लगे मामला सामने आने में

वहीं मुजफ्फपुर बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले में शनिवार शाम तक 21 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और दो के निलंबन के लिए सिफारिश की गई है। वहीं निलंबित होने वालों में बाल संरक्षण विभाग के 6 सहायक निदेशक और अन्य जूनियर अधिकारी शामिल हैं। इनमें बाल संरक्षण यूनिट के सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा भी हैं। देवेश कुमार शर्मा ने ही टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (टिस) के सोशल ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद के बाद 31 मई को एफआईआर दर्ज कराई थी। देवेश शर्मा के निलंबन आदेश में कहा गया है कि टिस की रिपोर्ट में बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार की बात आ चुकी थी फिर भी बालिका गृह के मालिक ब्रजेश ठाकुर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।



निजी संस्था ने किया मामले का खुलासा
 पहले झारखंड में नवजात को बेचे जाने का मामला सामने आया जहां नवजातों की देख-रेख करने वाली नन ही नवजातों को चंद पैसों के लिए अवैध रूप से बेचती आ रही थी। अभी तक इस पूरे मामले में चार बच्चों की शिनाख्त हो चुकी है जबकि 58 मामलों की अभी जांच जारी है। अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि बिहार की 40 बेटियों की चित्कार ने दिल दहला कर रख दिया है। जहां बालिका गृह में रह रही 40 में से 35 लड़कियां गर्भवती भी हैं।

यह भी पढ़ें:  मुजफ्फरपुर यौन शोषण कांड, दोषी पाए जाने पर मंत्री को देना होगा इस्तीफा, नीतीश ने दी चेतावनी

अभी इस मामले की जांच चल रही है कि एक और मामला मुजफ्परपुर से ही सामने आया जहां से 11 बच्चियां गायब पाई गईं। आनन फानन में राज्यपाल के आदेश पर भोजपुर, भागलपुर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, अररिया और मधुबनी में बाल कल्याण संरक्षण इकाई के सहायक निदेशकों को निलंबित किया गया। बच्चियों ने जो आपबीती सुनाई जिसे सुनने वालों की रूह कांप गई। बच्चियों के साथ लंबे समय से चल रही दरिंदगी का खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के द्वारा किए गए सोशल ऑडिट के बाद सामने आया और पता चला कि इस पूरे मामले की जड़ उस संरक्षण गृहों को चला रहे लोग ही शामिल हैं। और इसके किंगपिंग ब्रजेश ठाकुर के सिर पर राजनीतिक महकमों का हाथ है।  

संरक्षक ही बने हैं भक्षक 

बताया जा रहा है कि देवरिया के मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की सूची में 42 लडकियां दर्ज हैं। लेकिन छापे में मौके पर केवल 24 मिलीं। बाकी 18 कहां हैं उनका पता किया जा रहा है। नारी संरक्षण गृह के बारे में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। अनियमितताओं के कारण इसकी मान्यता जून-2017 में समाप्त कर दी गई थी। सीबीआई ने भी संरक्षण गृह को अनियमितताओं में चिह्नित कर रखा है। लेकिन संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे लगातार चला रही है। 

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अनाथ बच्चियों और महिलाओं के लिए बनाए गए गृहों में होने वाले अत्याचार की न तो यह कोई पहली घटना है और न आखिरी ऐसे कई मामलों के खुलासे पहले भी होते रहे हैं लेकिन जिस तरह से पुलिस  और प्रशासन के नाक के नीचे  बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटना सामने आ रही हैं वह विश्वास की दीवार को दरका रही हैं। मामला तब और चौंकाता है जब जानकारी मिले कि  महिलाओं बच्चियों को संरक्षण देने वाले ही उनकी इज्जत तार-तार करने में जुटे हैं। चाहें वह मुजफ्फरपुर बालिका गृह चलाने वाला ब्रजेश ठाकुर हो या फिर देवरिया की संरक्षण गृह की आड़ में महिलाओं को देह व्यापार में ढकेलने वाली उसकी मालकिन। या फिर बात करें नवजातों के संरक्षण के लिए बनाए गए अनाथालयों की नन।

Bihar to Uttar Pradesh and Jharkhand: No place is safe for Girls in India
प्रतीकात्मक तस्वीर

मिशनरीज ऑफ चैरिटी में 280 नवजात शिशुओं के रेकॉर्ड गायब

झारखंड के रांची से नवजातों को बेचे जाने का मामला सामने आया था।  मिशनरीज ऑफ चैरिटी संस्था के विभिन्न होम्स से 280 नवजात शिशुओं के रेकॉर्ड गायब हैं। जांच के दौरान संस्था अपने कई होम्स से 280 महिलाओं द्वारा जन्म दिए गए नवजात शिशुओं के रेकॉर्ड मुहैया कराने में विफल रही है। संस्था की दो ननों और एक महिला कर्मचारी पर नवजात को बेचने का आरोप लगा था जिसकी जांच अभी भी चल रही है।  मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' के कई होम्स में वर्ष 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराया गया था, लेकिन यहां से केवल 170 नवजात शिशुओं का रेकॉर्ड मिला और बाकी 280 शिशुओं के बारे में कोई सूचना नहीं मिली।

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क्या कहता है नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 35 शहरों के तुलनात्मक आंकड़ों में राजधानी दिल्ली सभी अपराधों के तुलनात्मक आंकडों में पहले नंबर पर रही है जबकि महिलाओं के खिलाफ सभी तरह के अपराधों में त्रिपुरा पहले नंबर पर है। बच्चों पर अत्याचार के मामले में भी मध्यप्रदेश ने सबको पीछे छोड़ दिया जबकि उसके बाद दूसरे व तीसरे नंबर पर दिल्ली और महाराष्ट्र रहे। बलात्कार और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं में मध्यप्रदेश ने पूरे देश को पीछे छोड़ दिया। महिला उत्पीड़न व दुष्कर्म के मामले में मध्यप्रदेश  पिछले तीन सालों से नंबर एक ही है।  बच्चों पर अत्याचार के मामलों में भी मप्र  2016- 2017 में अव्वल रहा। दर्ज अपराधों की दर में इस साल भी राज्य का स्थान चौथा बना। वहीं राजस्थान और हरियाणा के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। ये वो राज्य हैं जहां भ्रूण हत्या के मामले सबसे अधिक हैं और आज भी प्रति 1000 पुरुषों में 900 महिलाएं ही हैं। 

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अब तक क्या क्या हुआ
मुजफ्फरपुर का मामला हो या फिर झारखंड का, मामले की जांच जारी है। आनन-फानन में कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है लेकिन बच्चियों, नवजातों और महिलाओं की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने हैं इसपर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बिहार वाले मामले पर विपक्षी पार्टियां जहां दिल्ली के जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन कर चुकी हैं वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता प्रदर्शन कर चुके हैं। लालू के लाल तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मामले के खुलासे के  तीन महीने बाद शर्मसार हुए नीतीश कुमार ने वादा किया है कि समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा अगर मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह यौन शोषण कांड में संलिप्त पाई गईं या उनके खिलाफ कुछ भी पाया गया तो उनसे इस्तीफा देने को कहा जा सकता है।

न्यायालय ने दो हफ्तों में मांगी जांच रिपोर्ट
पटना उच्च न्यायालय ने बिहार के मुजफ्फरपुर के एक बालिका गृह में लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले की जांच कर रही सीबीआई को नोटिस जारी कर जांच का ब्यौरा देने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद ने सीबीआई को ब्यौरे देने का निर्देश दिया और मामले में अगली सुनवाई दो हफ्तों के बाद तय कर दी।

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