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Bihar: 'वोट चोरी' मुद्दे का भविष्य तय करेगा बिहार चुनाव, एनडीए की जीत से मजबूत होगा SIR का पक्ष

Mon, 06 Oct 2025 08:46 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 06 Oct 2025 08:46 PM IST
सार

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तारीखों का सोमवार को एलान कर दिया गया। इन चुनावों में विपक्षी दल प्रचार के दौरान वोट चोरी के मुद्दे को जोर-शोर से उठा सकते हैं। कांग्रेस नेता की तैयारी से इस बात के संकेत मिलते हैं कि वे इसे बड़ा मुद्दा बनाकर अगले लोकसभा चुनावों में भी ले जाने की बात सोच रहे हैं।

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Bihar elections will decide future of the vote chori issue, NDA's victory will strengthen SIR's side.
तेजस्वी यादव और राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 'वोट चोरी' को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। वोटर अधिकार यात्रा निकालकर राहुल गांधी ने इसे मीडिया के साथ-साथ आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनाने में सफलता पाई थी। कांग्रेस नेता की तैयारी से इस बात के संकेत मिलते हैं कि वे इसे बड़ा मुद्दा बनाकर अगले लोकसभा चुनावों में भी ले जाने की बात सोच रहे हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस-राजद को बिहार विधानसभा चुनाव में सफलता मिल जाती है तो इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और वे पूरी मजबूती के साथ तथाकथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने का काम कर सकते हैं। वहीं, यदि नीतीश कुमार के गठबंधन को इस चुनाव में बड़ी जीत मिली तो भाजपा एक बार फिर राहुल गांधी पर अगंभीर राजनीति करने के आरोप लगाएगी। बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम से चुनावी हार-जीत से अधिक कुछ तय हो सकता है। 

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विपक्ष का वोट चोरी का आरोप पहले दिन से बहुत मजबूत नहीं माना जा रहा था। इसका सबसे बड़ा कारण यही था कि चुनाव आयोग भाजपा-कांग्रेस-राजद सहित सभी दलों के कार्यकर्ताओं के सहयोग से ही एसआईआर का कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा था। सभी दलों के कार्यकर्ताओं के इस प्रक्रिया में शामिल होने के कारण इसमें गड़बड़ी की आशंका बहुत कम थी। इसके बाद जब चुनाव आयोग ने कोई कमी बताने और मतदाता सूची में सुधार के लिए समय दिया तो लंबे समय तक कोई राजनीतिक दल सामने नहीं आया। इससे जनता में यही संदेश गया कि वोट चोरी के मुद्दे में बड़ा दम नहीं है। यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप मात्र है। 
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रही-सही आशंका आज चुनाव आयोग ने दूर कर दी। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बिहार में 7.43 करोड़ मतदाता इस चुनाव में वोट डालने के अधिकारी होंगे। यदि किसी भी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल होने से छूटा है तो वह नामांकन से दस दिन पहले तक इसके लिए आवेदन कर सकता है। यानी अभी भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को बंद नहीं किया है। कोई भी वैध मतदाता वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक कर अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। इस तरह आम आदमी की मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास किया गया है। 
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चुनाव आयोग ने एक ऐप के जरिए किसी भी मतदाता को अपना नाम मतदाता सूची में शामिल होने, कोई गड़बड़ी पाए जाने पर अपने बीएलए से बात करने के लिए समय लेने का सुरक्षित और बेहद आसान तरीका उपलब्ध करा दिया है। आज हर उपभोक्ता के हाथ में स्मार्ट फोन है। इससे किसी भी वैध मतदाता की आशंका को जड़ जमाने का अवसर नहीं मिलेगा और उसकी समस्या का तुरंत समाधान होगा। 

'कोई वैध मतदाता सूची से बाहर नहीं, इसलिए नहीं हुआ विरोध'
भाजपा नेता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि बिहार राजनीतिक रूप से बहुत परिपक्व राज्य है। यदि वहां बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटते तो हंगामा खड़ा हो जाता। लेकिन हर वैध मतदाता यह पा रहा है कि उसका नाम मतदाता सूची में अंकित है। ऐसे में वह विरोध कैसे करेगा। विप्लव के अनुसार, विपक्ष वोट चोरी के मुद्दे को जनता से केवल इसीलिए नहीं जोड़ पाया क्योंकि एक भी वैध मतदाता ऐसा नहीं मिल रहा है जिसका वोट मतदाता सूची में अंकित न हो। यही कारण है कि यह मुद्दा जनता के बीच जगह नहीं पा सका। 

सबसे बड़ी बात यह है कि शुरुआती दौर को छोड़ दें तो राहुल गांधी के सहयोगी तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं समझा। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद जब तेजस्वी यादव ने अपनी यात्रा निकाली तो इसमें वोच चोरी का मुद्दा पूरी तरह से गायब था। उन्होंने वोट चोरी की बजाय गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी पर नीतीश सरकार पर हमला बोला। यानी कहीं न कहीं तेजस्वी यादव यह महसूस कर रहे थे कि इस मुद्दे में जमीनी तौर पर कुछ भी नहीं है।


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बिहार चुनाव परिणाम होगा निर्णायक
बिहार चुनाव इस अर्थ में बड़े परिणाम देने वाला साबित हो सकता है। यदि महागठबंधन को इस चुनाव में जीत मिली तो इससे राहुल गांधी को नई संजीवनी मिल सकती है। पिछले चुनाव में जिस तरह 'संविधान बदल देने' के नैरेटिव ने मोदी को नुकसान और विपक्ष को लाभ पहुंचाया, उसी तरह यदि बिहार में कांग्रेस-राजद को जीत मिली तो वोट चोरी भाजपा के गले में खतरे की घंटी साबित हो सकता है। वहीं, यदि एनडीए को बिहार चुनाव में जीत मिली तो विपक्ष को मोदी को घेरने के लिए 2029 के लिए किसी नए मुद्दे की तलाश करनी पड़ेगी। 

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