Bihar: बिहार भाजपा अध्यक्ष बोले- सपने में पीएम पद की शपथ ले रहे नीतीश, तेजस्वी को गारंटर बनाकर लिए साथ
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विस्तार
प्रश्न- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी दल के नेताओं से मुलाकात कर 2024 के लिए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। उनकी यह रणनीति कितनी सफल होगी?
उत्तर- नीतीश कुमार की बिहार में ही विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है। आज वे अपने दम पर चुनाव में उतर जाएं, तो दस सीटों पर भी जीत नहीं हासिल कर सकेंगे। वह अपने साथ तेजस्वी यादव को लेकर घूम रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि आज की तारीख में उनकी कोई गारंटी नहीं है। वे तेजस्वी यादव को अपना गारंटर बनाकर अपने साथ लेकर घूम रहे हैं। आरजेडी और नीतीश कुमार बिहार में 33 साल शासन कर चुके हैं। लेकिन इसका परिणाम यह हुआ है कि इस समय बिहार देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल है। उनके पास विकास का क्या पैमाना है, जो वे जनता के सामने पेश करेंगे? जो काम वे बिहार के लिए नहीं कर सके, वह देश के लिए क्या कर सकेंगे? ऐसे में जनता उनका विश्वास क्यों करेगी? मुझे नहीं लगता है कि उनकी यह कोशिश कामयाब होगी। सच्चाई तो यह है की जनता के टैक्स के पैसे से वे घूम-घूमकर पिकनिक मना रहे हैं। इसका इससे ज्यादा कोई अर्थ नहीं है।
प्रश्न- नीतीश कुमार ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की है। केंद्र द्वारा दिल्ली पर लाए गए अध्यादेश के विरुद्ध विपक्षी एकता स्थापित करने की कोशिश हो रही है। क्या आपको लगता है कि विपक्ष के दल मिलकर केंद्र सरकार का यह अध्यादेश संसद से पास होने से रोक सकेंगे?
उत्तर- दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है। केंद्र शासित का अर्थ केंद्र के द्वारा शासित क्षेत्र होता है। अरविंद केजरीवाल को अपनी सीमा समझनी चाहिए और केंद्र से मिलजुल कर दिल्ली के विकास के लिए काम करना चाहिए। आज नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल दोनों ही उस कांग्रेस के साथ खड़े होकर केंद्र के अध्यादेश का विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने सबसे ज्यादा राज्य सरकारों को बर्खास्त किया और देश में आपातकाल लागू किया। लोकतंत्र की हत्या करने वालों के साथ खड़े होकर लोकतंत्र की रक्षा करने की बात हास्यास्पद लगती है। मुझे नहीं लगता है कि जनता उनकी ऐसी किसी बात का भरोसा करेगी।
प्रश्न- बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण भारी रहता है। पहली नजर में यह समीकरण आरजेडी-जेडीयू महागठबंधन के पक्ष में दिखाई पड़ता है। भाजपा इनका कैसे सामना करेगी?
उत्तर- यदि आप यह कहें कि लालू यादव के पास जातिगत वोट बैंक है, तो मैं इस बात को स्वीकार करता हूं, लेकिन नीतीश कुमार के पास कोई भी वोट बैंक नहीं बचा हुआ है। पिछले चुनाव में उन्हें 40 से कुछ ज्यादा सीटें मिल गई थीं। वह भी केवल इसलिए क्योंकि वह हमारे साथ खड़े थे। आज उन्हीं की जाति का वोटर उनके साथ नहीं खड़ा है। ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि उनका जातिगत समीकरण केंद्र सरकार के विकासवादी एजेंडे को रोक पाएगा।
प्रश्न- जेडीयू नेता नीतीश कुमार को पीएम मटेरियल बता रहे हैं। आपने भी 15 साल उनके साथ सत्ता में समय बिताया है। क्या कहेंगे?
उत्तर- दरअसल, नीतीश कुमार जी की उम्र बहुत ज्यादा हो गई है। अब उनकी याददाश्त भी उनका साथ नहीं दे रही है। लोग उन्हें 'मेमोरी लॉस सीएम' कहने लगे हैं। मैंने तो सुना है कि आजकल वे सपने में प्रधानमंत्री पद की शपथ भी ग्रहण करने लगे हैं। सपने देखने पर कोई रोक नहीं है, न कोई टैक्स लगता है, इसलिए वे जो चाहे सपने देख सकते हैं। लेकिन आंख खोल कर देखेंगे तो पाएंगे कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है।
जहां तक नीतीश कुमार को समर्थन देने वाली बात है, भाजपा ने जब नीतीश कुमार को समर्थन दिया था उस समय हमें बिहार को जंगलराज से बचाना था। यह मजबूरी में लिया गया निर्णय था। लेकिन अब बिहार को अंधेरे में नहीं छोड़ा जा सकता। जब देश आगे बढ़ रहा है तब बिहार को केवल जातिगत समीकरणों की राजनीति का शिकार नहीं होने दिया जा सकता। हम जनता के साथ खड़े होंगे, जीतेंगे और बिहार का नक्शा बदल देंगे।
प्रश्न- एक ही दिन पहले ही बिहार प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई है। क्या बिहार की जनता आपको अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है?
उत्तर- भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया है। मेरी यह जिम्मेदारी है कि प्रदेश के एक-एक बूथ पर पार्टी को जीत दिलाने योग्य स्थिति में लाऊं, कार्यकर्ताओं को मजबूत करूं और जनता को अपने साथ जोडूं। मैं यही काम कर रहा हूं। जहां तक मुख्यमंत्री पद के चेहरे की बात है, भाजपा के 1100 मंडल हैं और हमारे मंडल स्तर का एक सामान्य कार्यकर्ता भी नीतीश कुमार से 100 गुना ज्यादा बेहतर मुख्यमंत्री साबित होगा। इंतजार कीजिये। आपको आपके सवाल का जवाब मिल जायेगा।