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Sugar prices drop by 30% following government crackdown; affordable sugar to be available to the public starti
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सरकार के सख्ती के बाद चीनी 30% सस्ती, इस दिन से मिलेगी लोगों को सस्ती चीनी!
सरकार की ओर से उठाए गए कड़े कदमों के बाद चीनी की थोक कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कुछ ही दिनों में एक्स-मिल चीनी के भाव में करीब 30 फीसदी तक की कमी आई है, लेकिन इसका फायदा अभी आम उपभोक्ताओं को तुरंत मिलता नजर नहीं आ रहा है। 31 अगस्त 2026 को एक्स-मिल चीनी की कीमत करीब 47 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि 18 अगस्त को यह अपने उच्चतम स्तर 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। यानी करीब दो सप्ताह के भीतर चीनी के थोक भाव में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार की ओर से बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों और चीनी की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिशों का असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है। हालांकि, थोक बाजार में कीमत घटने के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी अभी भी अपेक्षाकृत महंगी बिक रही है।
रविवार को देशभर के खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत करीब 64.23 रुपये प्रति किलो रही, जबकि थोक बाजार में औसत दर लगभग 59.72 रुपये प्रति किलो बताई गई। इस अंतर की मुख्य वजह बाजार में मौजूद पुराना स्टॉक माना जा रहा है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, जिन छोटे दुकानदारों और खुदरा कारोबारियों ने चीनी पहले अधिक कीमत पर खरीदी थी, वे अचानक कीमत कम होने के बाद अपने पुराने माल को घाटे में बेचने से बच रहे हैं। आम तौर पर एक छोटे खुदरा दुकानदार के पास 50-50 किलो की करीब 10 से 15 बोरियां चीनी स्टॉक में हो सकती हैं। ऐसे में जब तक महंगे दाम पर खरीदा गया पुराना स्टॉक खत्म नहीं होता, तब तक दुकानदार कम कीमत पर नई चीनी खरीदकर बेचने की स्थिति में पूरी तरह नहीं आ पाते। यही कारण है कि थोक बाजार में कीमतों में तेज गिरावट आने के बावजूद इसका असर किराना दुकानों और आम उपभोक्ताओं तक तुरंत नहीं पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाजार में कम कीमत वाला नया स्टॉक आने और पुराने स्टॉक के खत्म होने के बाद खुदरा कीमतों में भी गिरावट दिखाई दे सकती है। इसके लिए कम से कम करीब 10 दिन का समय लग सकता है। यदि थोक बाजार में कीमतें मौजूदा स्तर के आसपास बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में खुदरा चीनी के दाम भी नीचे आने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक कीमत स्थानीय मांग, आपूर्ति, परिवहन लागत और दुकानदारों के पुराने स्टॉक पर भी निर्भर करेगी। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए स्थिति यह है कि चीनी की कीमतों में राहत का संकेत थोक बाजार से मिल चुका है, लेकिन खुदरा बाजार तक इसका असर पहुंचने में कुछ समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले एक से दो सप्ताह चीनी की कीमतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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