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आईसीएमआर: अब लक्षण देखकर नहीं संक्रमण के आधार पर होगा रोगी का इलाज, 233 कीटाणुओं की सूची तैयार, क्या है योजना?
सार
आईसीएमआर ने चार संक्रमण के लिए तैयार की 233 तरह के कीटाणुओं की सूची।
अब लक्षण देखकर नहीं संक्रमण के आधार पर होगा रोगी का इलाज।
बुखार के साथ बेहोशी या दौरा पड़ने पर मामला गंभीर माना जाएगा।
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आईसीएमआर ने 233 तरह के बैक्टीरिया की सूची बनाई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स-एआई
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विस्तार
अब बुखार, खांसी, दस्त या सांस लेने की तकलीफ में सिर्फ लक्षण देखकर दवा देने का तरीका बदल सकता है। डॉक्टर पहले यह पता लगाने पर जोर देंगे कि बीमारी के पीछे कौन सा वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी है। इसके बाद इलाज उसी संक्रमण को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे मरीज बेवजह की दवाओं, एंटीबायोटिक के सेवन से बच जाएंगे। इसका सबसे ज्यादा बुरा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने संक्रमण की जांच के लिए एक नई प्राथमिकता सूची तैयार की है। इसमें बताया गया है कि मरीज के लक्षण देखकर किस संक्रमण की जांच पहले करनी चाहिए। आईसीएमआर ने ये सूची देशभर के नामचीन डॉक्टर्स, लैब एक्सपर्ट्स और महामारी विशेषज्ञों के साथ 44 बैठकों में चर्चा और भारत तथा समान परिस्थितियों वाले देशों में हुए शोध की समीक्षा के बाद तैयार की है।
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बुखार में पहले मलेरिया-डेंगू, खांसी में फ्लू-कोरोना, दस्त में ई-कोलाई-हैजा की तलाश
आईसीएमआर की सूची का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अचानक बिना स्पष्ट कारण आने वाला बुखार है। इसमें 38 डिग्री से ज्यादा तापमान और 14 दिन या उससे कम समय का बुखार शामिल है। ऐसे मरीज में प्राथमिकता 1ए में मलेरिया के परजीवी, डेंगू वायरस, टाइफाइड और पैराटाइफाइड के बैक्टीरिया, स्क्रब टाइफस, फ्लू वायरस, लेप्टोस्पाइरा, चिकनगुनिया, ब्रुसेला और चांदीपुरा वायरस रखे गए हैं।
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कैसे तय करेंगे प्राथमिकता?
बुखार के साथ शरीर पर दाने निकलें तो जांच की दिशा बदल जाएगी। इसमें खसरा, रूबेला, स्क्रब टाइफस और दूसरे रिकेट्सियल संक्रमण, डेंगू, चिकनपॉक्स से जुड़ा वायरस, हर्पीज, हाथ-पैर-मुंह की बीमारी वाला एंटरोवायरस और जीका जैसे संक्रमणों को प्राथमिकता दी गई है।
किन संक्रमणों को पहले देखा जाएगा?
अगर बुखार के साथ गर्दन या दूसरी जगह गांठें यानी लसीका ग्रंथियां बढ़ी हुई हों, तो एपस्टीन-बार वायरस, साइटोमेगालोवायरस, स्क्रब टाइफस, ब्रुसेला, मेलियोइडोसिस से जुड़ा बैक्टीरिया, रिकेट्सियल संक्रमण और टीबी जैसे कारणों को देखा जाएगा। अगर बुखार के साथ खांसी और सांस की तकलीफ भी है और लक्षण 10 दिन के भीतर शुरू हुए हैं, तो फ्लू, कोरोना, आरएसवी, रेस्पिरेटरी वायरस, मेटान्यूमोवायरस और एडेनोवायरस जैसे संक्रमणों को पहले देखा जाएगा।
बुखार के साथ बेहोशी या दौरा पड़े तो मामला गंभीर
आईसीएमआर ने अचानक दिमागी संक्रमण जैसे लक्षणों के लिए भी अलग प्राथमिकता तय की है। इसमें सात दिन या उससे कम समय से बुखार के साथ भ्रम, पहचानने-समझने में परेशानी, बेहोशी या बोलने में असमर्थता और नया दौरा पड़ना शामिल है। ऐसे मामलों में जापानी इंसेफेलाइटिस, मलेरिया, स्क्रब टाइफस और रिकेट्सियल संक्रमण को प्राथमिकता दी गई है।
वायरस का संदेह होने पर हर्पीज, डेंगू, चिकनगुनिया, एंटरोवायरस, वेस्ट नाइल, निपाह और दूसरे वायरस भी जांच में लिए जा सकते हैं। आईसीएमआर ने इन रोगजनकों को 1ए, 1बी, 2 और 3 जैसी प्राथमिकताओं में रखा है। 1ए में वे संक्रमण हैं जिनकी पहचान इलाज शुरू करने से पहले महत्वपूर्ण मानी गई है। आगे की श्रेणियों में कम आम, दुर्लभ या विशेष निगरानी में मिलने वाले रोगजनक आते हैं।