सुप्रीम कोर्ट: फिरौती के लिए फोन कॉल के दावे की जांच कर रहा ओमान, सरकार अदालत में ऐसा किस मामले में बोली?
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच जंग के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव है। एक मालवाहक जहाज पर हमले के बाद से लापता भारत के मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष कुमार के परिवार को फिरौती के लिए मिले फोन कॉल की मस्कट के अधिकारी जांच कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जहाज से बरामद बुरी तरह जले हुए अवशेषों का डीएनए मिलान नहीं किया जा सका है। इससे आशीष कुमार के जीवित होने की संभावना है। पीठ कैप्टन आशीष कुमार की पत्नी अंशु कुमारी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में दावा किया गया है कि डीएनए रिपोर्ट अनिर्णायक रहने और फिरौती कॉल्स मिलने के कारण कैप्टन के जीवित होने की संभावना है। सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, परिवार को मार्च में 20 लाख रुपये की फिरौती के लिए फोन आए थे। इसके अलावा कैप्टन के फोन पर सक्रियता दिखने और उसकी प्रोफाइल पिक्चर बदलने की बात भी सामने आई है। भारतीय दूतावास ने इन सभी तथ्यों से मस्कट के संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया है और गहन जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सात फैमिली कोर्ट जजों की उस याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया, जिसमें उन्हें संविधान के अनुच्छेद-217 के तहत हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नति के लिए विचार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सोमवार को पीठ ने कहा कि बिना किसी तथ्य या कानूनी बदलाव के पुराने फैसलों पर दोबारा विचार कैसे किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून के जिम मालिक मोहम्मद दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कार्यवाही पर रोक लगा दी। दीपक ने बजरंग दल सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के बीच विवाद से जुड़े आरोपों वाली इस एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी जिसमें दीपक को घटना और मामले पर सोशल मीडिया पोस्ट करने से रोका गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अंतरिम राहत दी।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की तरफ से गठित न्यायिक बुनियादी ढांचा सलाहकार समिति ने देशभर की अदालतों के आधुनिकीकरण का रोडमैप तैयार कर अंतरिम रिपोर्ट सोमवार को उन्हें सौंप दी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति का गठन 12 मई को किया गया था। समिति में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस देबांगसु बसाक, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन थे। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के महानिदेशक सतींदर पाल सिंह और सुप्रीम कोर्ट के महासचिव भारत पाराशर भी समिति के सदस्य रहे। समिति ने अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करने और इसके लिए सरकार से पर्याप्त धन उपलब्ध कराने का खाका तैयार किया है। इसमें जजों, कर्मचारियों, वकीलों, पक्षकारों और आगंतुकों के लिए सुविधाएं, अदालतों का कंप्यूटरीकरण, नागरिक-केंद्रित सेवाएं और डिजिटल खाई पाटने के उपाय सुझाए गए हैं। आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स और बेहतर कार्य परिस्थितियों पर भी जोर दिया गया है।