Seat ka Samikaran: यहां 35 साल से सब पर भारी है दो परिवारों का 'बाहुबल', कभी कांग्रेस का गढ़ थी मोकामा सीट
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज मोकामा विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से राजद की नीलम देवी विधायक हैं।
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विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव चंद महीने दूर हैं। सियासी बिसात पर शह मात का खेल भी शुरू हो चुका है। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम मोकामा विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर लंबे समय से बाहुबली नेता अनंत सिंह का दबदबा रहा है। अनंत सिंह के सजा होने के बाद इस सीट से उनकी पत्नी विधायक हैं। 1990 से अब तक इस सीट से या तो बाहुबली अनंत सिंह और उनके परिवार के लोग जीते या फिर बाहुबली सूरजभान सिंह जीते।
पहले जानते हैं मोकामा सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक पटना जिला भी है। मोकामा विधानसभा सीट पटना जिले में आती है। मोकाा निर्वाचन क्षेत्र मुंगेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। मुंगेर लोकसभा में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, इसमें मुंगेर और जमालपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मुंगेर जिले का हिस्सा हैं। सूर्यगढ़ा और लखीसराय विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र लखीसराय जिले में हैं। मोकामा और बाढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पटना जिले का हिस्सा हैं। आज हम मोकामा सीट की बात करेंगे, इस सीट पर 1952 में सबसे पहले चुनाव हुए थे।
1952: नवल किशोर सिंह पहली बार जीते
1952 में इस सीट पर सबसे पहले चुनाव हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस के जगदीश नारायण सिन्हा को जीत मिली। कांग्रेस के जगदीश नारायण सिन्हा ने निर्दलीय उम्मीदवार चंद्रशेखर सिन्हा को 3,085 वोट से हरा दिया था।
1957 में एक बार फिर से कांग्रेस के जगदीश नारायण सिंह को जीत मिली थी। इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार जमुना नंदन प्रसाद को 417 वोट से हरा दिया था।
1962: निर्दलीय उम्मीदवार सरयू नंदन प्रसाद सिंह जीते
1962 में मोकामा विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली। निर्दलीय चुनाव लड़ रहे सरयू नंदन प्रसाद सिंह ने कांग्रेस के सिंहेश्वर प्रसाद सिंह को 999 वोट से हरा दिया था।
1967 में एक बार फिर से मोकामा सीट पर कांग्रेस को जीत नहीं मिल पाई थी। इस बार रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के बी. लाल ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के के. पी. सिंह को 1037 वोट से हरा दिया था।
1969: कांग्रेस को मिली जीत
1969 में कांग्रेस के कामेश्वर प्रसाद सिंह को मोकमा विधानसभा सीट पर जीत मिली थी। कांग्रेस उम्मीदवार ने निर्दलीय उम्मीदवार विष्णुधारी लाल को 5572 वोट से हरा दिया था।
1972 में एक बार फिर से कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस की कृष्णा शाही ने सोशलिस्ट पार्टी के विशु धारी लाल को 28,397 वोट से हरा दिया था।
1977 में जनता लहर के बाद भी मोकामा में कांग्रेस को जीत मिली। इस बार भी यहां से कांग्रेस के टिकट पर कृष्णा शाही ने ही जीत दर्ज की थी। उन्होंने जनता पार्टी के चंद्रशेखर प्रसाद को 1149 वोट से हरा दिया था।
1980: श्याम सुंदर सिंह को मिली जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस ने ही जीत मिली। कांग्रेस (आई) के श्याम सुंदर सिंह ने माकपा के शिव शंकर सिंह को 5290 वोट से हरा दिया था।
1985 में एक बार फिर कांग्रेस के तत्कालीन विधायक श्याम सुंदर सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप कुमार सिंह को 2678 वोट से हरा दिया था। मोकामा विधानसभा सीट पर यह कांग्रेस की आखिरी जीत थी। इसके बाद से अब तक मोकामा में कांग्रेस को अपनी जीत का इंतजार है।
1990: जनता दल को मिली जीत
1990 के विधानसभा चुनाव में मोकामा विधानसभा सीट पर जनता दल को पहली बार जीत मिली। उसके बाद मोकामा में कभी कांग्रेस वापसी नहीं कर पाई। इस चुनाव में जनता दल के दिलीप कुमार सिंह ने कांग्रेस के श्याम सुंदर सिंह धीरज को 22106 वोट से हरा दिया था।
1995 में एक बार फिर से जनता दल के दिलीप कुमार सिंह ने जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने एक बार फिर से कांग्रेस के श्यामसुंदर सिंह को हराया। इस चुनाव में उनकी जीत का अंतर 6947 वोट का रहा।
2000: निर्दलीय उम्मीदवार को मिली जीत
2000 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार को मोकामा विधानसभा सीट पर जीत मिली। निर्दलीय चुनाव लड़ रहे बाहुबली सूरज सिंह ने राजद के दिलीप कुमार सिंह को 59,471 वोट से हरा दिया था। 2004 के लोकसभा चुनाव में सूरजभान सिंह लोजपा के टिकट पर बिहार की बलिया लोकसभा सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2008 में हत्या के एक मामले में सूरजभान सिंह दोषी ठहराए गए।
2005: अनंत सिंह का उदय
2005 के विधानसभा में अनंत सिंह को पहली बार जीत मिली थी। अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप कुमार सिंह इससे पहले 1990 और 1995 में मोकामा सीट से विधायक रह चुके थे।2005 में अनंत सिंह यहां से जीते और उसके बाद वो लगातार इस सीट पर जीतते रहे। 2022 में सजा होने के कारण उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी ने इस सीट से जीत दर्ज की।
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। इन दोनों चुनावों में अनंत सिंह ने ही जीत दर्ज की थी। 2005 के पहले चुनाव में जदयू से चुनाव लड़ रहे अनंत कुमार सिंह ने लोजपा के नलिनी रंजन शर्मा को 1869 वोट से हरा दिया था।
2005 में बिहार में दूसरी बार चुनाव अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव में फिर से अनंत और नलिनी के बीच मुकाबला था। जदयू के अनंत कुमार सिंह ने लोजपा के नलिनी रंजन शर्मा को 2835 वोट से हरा दिया था।
2010: अनंत सिंह ने लगाई जीत की हैट्रिक
2010 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर जदयू और लोजपा के बीच मुकाबला हुआ। इस बार जदयू के अनंत कुमार सिंह ने लोजपा की सोनम देवी को 8954 वोट से हरा दिया था।
2015 में अनंत सिंह को जदयू से टिकट नहीं मिला। उन पर हत्या करने, हत्या की कोशिश जैसे कई गंभीर केस दर्ज थे। इसके कारण वह जेल में बंद थे। लेकिन 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव अनंत सिंह ने जेल से ही निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा। अनंत कुमार सिंह ने जदयू के नीरज कुमार को 18348 वोट से हरा दिया। इस तरह से सीट पर जदयू का किला ढह गया हालांकि, अनंत की पकड़ बरकरार रही।
2020 के विधानसभा चुनाव में मोकामा विधानसभा सीट से अनंत सिंह ने एक बार फिर से चुनाव जीता। इस बार उन्हें राजद से टिकट दिया। राजद के टिकट पर अनंत सिंह ने जदयू के राजीव लोचन नारायण सिंह को 35,757 वोट से हरा दिया था।
2022 के उपचुनाव में अनंत की पत्नी जीतीं
आर्म्स एक्ट के एक मामले में दस साल की सजा मिलने के बाद अनंत सिंह की बिहार विधानसभा की सदस्यता चली गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी मोकामा से चुनाव लड़ीं। इस उपचुनाव में मोकामा विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर मैदान में उतरीं अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने भाजपा की सोनम देवी को 16,741 वोट से हरा दिया।
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