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Karnataka: 'सॉफ्टवेयर इंजीनियर से साइबर जालसाजों ने ठगे 11.8 करोड़ रुपये', बंगलूरू पुलिस ने जारी की चेतावनी

Tue, 24 Dec 2024 05:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 24 Dec 2024 05:46 PM IST
सार

Karnataka: बंगलूरू पुलिस आयुक्त बी.दयानंद ने साइबर जालसाजों द्वारा बंगलूरू में एक 39 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर से हाल ही में करोड़ों रुपये की ठगी का हवाला देते हुए लोगों से कहा कि वे डिजिटल गिरफ्तारी को लेकर सतर्क रहें और साइबर जालसाजों का शिकार न बनें। 

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Bengaluru police appeals to public to stay alert against 'digital arrest' scam
साइबर अपराध (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बंगलूरू पुलिस आयुक्त बी. दयानंद ने मंगलवार को लोगों से अपील कि वह साइबर जालसाजों का शिकार न बनें और इसको लेकर सतर्क रहें। उन्होंने बताया कि बहुत सी शिकायतें मिली हैं, जिनमें साइबर जालसाज खुद को सरकारी अफसर बता रहे हैं और 'डिजिटल गिरफ्तारी' का दावा करके लोगों से पैसे ठग रहे हैं।   

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सॉफ्टवेयर इंजीनियर से करोड़ों की ठगी
दयानंद ने बताया कि पुलिस को ऐसे कई मामलों की शिकायतें मिली हैं, जिसमें लोगों को डिजिटल गिरफ्तारी के डर से पैसों का काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने एक हालिया मामले का भी हवाला दिया, जिसमें एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर (39 वर्षीय) ने जालसाजी के चलते 11.8 करोड़ रुपये गंवा दिए।
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'डिजिटल गिरफ्तारी पर कानूनी प्रावधान नहीं'
पुलिस आयुक्त ने कहा, हम बार-बार अपने सोशल मीडिया खातों के जरिए यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारे कानून या संविधान में डिजिटल गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस की कार्रवाई केवल कानूनी प्रावधानों के तहत होती है और डिजिटल गिरफ्तारी का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। 
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'गिरफ्तारी के लिए नोटिस जारी करती है पुलिस'
आयुक्त ने कहा कि पुलिस कानूनी प्रक्रियाओं के तहत नोटिस जारी करती है या जरूरत पड़ने पर किसी को गिरफ्तार करती है। उन्होंने कहा, अगर हम किसी को गिरफ्तार करते हैं, तो उसे चौबीस घंटे के अंदर अदालत में सामने पेश करते हैं। फिर जेल या हिरासत ली जाती है। लेकिन साइबर जालसाज डिजिटल गिरफ्तारी का झूठा दावा करके पीड़ितों को कई दिनों या हफ्तों तक बंधक बनाकर उनसे पैसे निकालते हैं। 

'अनजान फोन कॉल या वीडियो कॉल का जवाब न दें'
उन्होंने लोगों को सुझाव दिया कि वह अज्ञात फोन कॉल या संदिग्ध वीडियो कॉल का जवाब न दें और संदिग्ध कॉल या वीडियो कॉल आने पर सतर्क रहें। अज्ञात फोन करने वाले से बात न करें और अपनी जानकारी को किसी के साथ साझा न करें। अपने नजदीकी थाने से किसी भी दावे की पुष्टि करें। 


'1930 पर कॉल करें साइबर धोखाधड़ी के पीड़ित'
पुलिस आयुक्त ने यह भी कहा कि वैध एजेंसियां कभी भी व्टाट्सएप या फोन कॉल के जरिए निजी जानकारी नहीं मांगेंगी। उन्होंने साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वालों से अपील की कि वे 1930 पर कॉल करके खाते को ट्रेस और ब्लॉक करवा सकते हैं, ताकि खोई हुई राशि को वापस हासिल किया जा सके।  

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