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MPs Salary: 2016 से पहले सांसद खुद तय करते थे कितना बढ़ाया जाए वेतन, PM की आपत्ति के बाद हुआ था कानूनी सुधार
Wed, 26 Mar 2025 06:42 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 26 Mar 2025 06:42 AM IST
सार
MPs Salary: 2018 के वित्त अधिनियम के तहत सांसदों का वेतन अब महंगाई दर से जुड़ा है और हर 5 साल में खुद ही समायोजित होता है। पहले सांसद खुद वेतन तय करते थे, लेकिन पीएम मोदी ने इसे निष्पक्ष बनाने के लिए कानून में संशोधन किया, जिससे हाल ही में वेतन 24% बढ़कर 1.24 लाख रुपये हुआ।
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संसद
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में सांसदों के वेतन वृद्धि की व्यवस्था को निष्पक्ष बनाने के लिए कानून में संशोधन किया था। इससे पहले सांसद खुद तय करते थे कि उनके वेतन में कितनी वृद्धि की जाए। पीएम मोदी ने इस पर सबसे पहले आपत्ति जताई थी और एक पूरा तंत्र विकसित किया जिसमें महंगाई दर के आधार पर वेतन में बढ़ोतरी की जाने लगी।
वित्त अधिनियम 2018 ने संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 में संशोधन किया, ताकि सांसदों के वेतन को मुद्रास्फीति से जोड़ा जा सके। विशेष रूप से आयकर अधिनियम 1961 के तहत प्रकाशित लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) का इस्तेमाल किया जा सके। इस संशोधन से पहले, वेतन संशोधन तदर्थ आधार पर किए जाते थे और हर बार संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होती थी। संशोधन का उद्देश्य प्रक्रिया को गैर-राजनीतिक बनाना और वेतन समायोजन के लिए एक व्यवस्थित तंत्र शुरू करना था।
ये भी पढ़ें : MPs Salary Hike: सांसदों के वेतन और भत्ते में 24 प्रतिशत की वृद्धि, पेंशन भी बढ़ी; केंद्र ने जारी की अधिसूचना
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ये किए बड़े सुधार
संशोधित तंत्र के तहत, सांसदों का वेतन अब लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर हर पांच साल में अपने आप समायोजित किया जाता है। 2018 में आधार वेतन 1 लाख रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था, जिसमें अतिरिक्त भत्ते शामिल थे, जिसमें 70,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और 2,000 रुपये का दैनिक भत्ता, साथ ही मुफ्त आवास, यात्रा और उपयोगिताओं जैसे अन्य लाभ शामिल थे। अब, लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के अनुसार, सांसदों को प्रति माह 1.24 लाख रुपये का वेतन मिलेगा। सात साल की अवधि में 24% की वृद्धि, जो लगभग 3.1% की औसत वार्षिक वृद्धि के बराबर है।
कर्नाटक, प. बंगाल समेत कई राज्यों में सीएम व विधायकों के वेतन में हुई मनमानी बढ़ोतरी
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वित्त अधिनियम 2018 ने संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 में संशोधन किया, ताकि सांसदों के वेतन को मुद्रास्फीति से जोड़ा जा सके। विशेष रूप से आयकर अधिनियम 1961 के तहत प्रकाशित लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) का इस्तेमाल किया जा सके। इस संशोधन से पहले, वेतन संशोधन तदर्थ आधार पर किए जाते थे और हर बार संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होती थी। संशोधन का उद्देश्य प्रक्रिया को गैर-राजनीतिक बनाना और वेतन समायोजन के लिए एक व्यवस्थित तंत्र शुरू करना था।
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ये किए बड़े सुधार
संशोधित तंत्र के तहत, सांसदों का वेतन अब लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर हर पांच साल में अपने आप समायोजित किया जाता है। 2018 में आधार वेतन 1 लाख रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था, जिसमें अतिरिक्त भत्ते शामिल थे, जिसमें 70,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और 2,000 रुपये का दैनिक भत्ता, साथ ही मुफ्त आवास, यात्रा और उपयोगिताओं जैसे अन्य लाभ शामिल थे। अब, लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के अनुसार, सांसदों को प्रति माह 1.24 लाख रुपये का वेतन मिलेगा। सात साल की अवधि में 24% की वृद्धि, जो लगभग 3.1% की औसत वार्षिक वृद्धि के बराबर है।
कर्नाटक, प. बंगाल समेत कई राज्यों में सीएम व विधायकों के वेतन में हुई मनमानी बढ़ोतरी
- सांसदों के वेतन वृद्धि तंत्र के विपरीत कर्नाटक, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य सरकारें अपने वेतन मनमाने ढंग से तय कर रहे हैं।
- हाल ही में पेश किए गए 2025 के बजट में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अपने वेतन में 100% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे सीएम, मंत्रियों और विधायकों का वेतन दोगुना हो गया है।
- ममता बनर्जी सरकार ने 2023 में, विधायकों के वेतन में 50% की वृद्धि की थी। उनका वेतन 80,000 से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपये कर दिया, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 36% की बढ़ोतरी दी, जिससे उनका वेतन 1.5 लाख रुपये हो गया।
- जून 2024 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सरकार ने मनमाने ढंग से मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 50% तक की वृद्धि कर दी। वहीं 2023 में, अरविंद केजरीवाल ने अपने लिए 136% की भारी वेतन वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे उनका वेतन प्रति माह 1.7 लाख रुपये हो गया, जबकि विधायकों को 66% की वृद्धि मिली, जिससे उनका वेतन 90,000 रुपये हो गया।
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