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Indian Army: लेफ्टिनेंट जनरल एमके कटियार बोले- जंग का मैदान चाहे जो भी हो, जमीन पर ही होगा जीत-हार का फैसला
Sat, 11 Jan 2025 11:21 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 11 Jan 2025 11:21 PM IST
सार
Indian Army: लेफ्टिनेंट जनरल एमके कटियार ने कहा कि हमें अपनी उत्तरी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर पूरी तरह चौकस रहना होगा। साथ ही, यह भी जरूरी है कि किसी भी युद्ध के लिए हमारी तैयारियों में कोई कमी न रह जाए। अच्छी ट्रेनिंग, अच्छे हथियार और तकनीक का इस्तेमाल बहुत जरूरी है।
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लेफ्टिनेंट जनरल एमके कटियार
- फोटो : ट्विटर/पश्चिम कमान, भारतीय वायुसेना
विस्तार
पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एम. के. कटियार ने कहा कि युद्ध चाहे किसी भी मैदान या क्षेत्र में हो, जीत-हार का फैसला जमीन पर ही होगा और रूस-यूक्रेन युद्ध ने इसे फिर साबित किया है। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर हमारे विवाद जमीन से संबंधित हैं। इसलिए हमारे लिए जमीन पर जीत हासिल करना और भी अधिक जरूरी हो जाता है।
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लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने कहा कि यह हमारी सेना के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय है। दुनिया में इस समय दो बड़े युद्ध चल रहे हैं और ये युद्ध लंबे समय से चल रहे हैं। इन युद्धों से कई देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थाओं के प्रयासों के बावजूद ये युद्ध न तो खत्म हो रहे हैं और न ही सीमित हो रहे हैं। मौजूदा स्थिति उन देशों को प्रोत्साहित कर सकती है जो बल प्रयोग या जंग के जरिये विवादों को सुलझाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी उत्तरी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर पूरी तरह चौकस रहना होगा। साथ ही, यह भी जरूरी है कि किसी भी युद्ध के लिए हमारी तैयारियों में कोई कमी न रह जाए। अच्छी ट्रेनिंग, अच्छे हथियार और तकनीक का इस्तेमाल बहुत जरूरी है।
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दिल्ली छावनी स्थित करिअप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित पश्चिमी कमान के अलंकरण समारोह के दौरान मार्चिंग टुकड़ियों और शस्त्र प्लेटफार्मों की एक प्रभावशाली परेड भी हुई। लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने कहा कि परेड से साफ पता चलता है कि हमारी सेना पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार है। जब आप 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर मार्च करेंगे तो हमारे देशवासियों का हमारी सेना और देश की रक्षा करने की सशस्त्र सेनाओं की क्षमता पर विश्वास और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी युद्ध की प्रकृति को बदल रही है और आज यह परिवर्तन बहुत तेज गति से हो रहा है तथा यह जरूरी है कि हम अपनी मानसिकता भी बदलें। हमें पिछले युद्धों से सीख लेकर भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहना चाहिए। युद्ध की प्रकृति में आए बदलाव ने युद्ध के दायरे को भी बदल दिया है। जंग का क्षेत्र बढ़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका प्रभाव युद्ध के मैदान से परे भी होगा। युद्ध के क्षेत्र भी बढ़ गए हैं और जल, भूमि, वायु तथा अंतरिक्ष के अलावा साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और नेटवर्क क्षेत्रों में भी युद्ध होंगे लेकिन, युद्ध चाहे हवा में हो या समुद्र में, जीत या हार का फैसला जमीन पर ही होगा। यह बात रूस-यूक्रेन युद्ध ने फिर साबित कर दी है। जमीन पर अर्जित विजय के जरिये हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर हमारे विवाद भूमि से संबंधित हैं, इसलिए हमारे लिए भूमि पर जीत हासिल करना और भी अधिक आवश्यक हो जाता है।