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राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ना राजनीतिक दलों की मजबूरी: कांग्रेस 

Mon, 08 Oct 2018 12:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर Updated Mon, 08 Oct 2018 12:51 AM IST
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Assembly elections are different compulsions of parties: Congress

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ गठबंधन नहीं बन पाने पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि हमने पूरी कोशिश की थी कि संवैधानिक लोकतंत्र में यकीन रखने वाली ताकतें मिलकर चुनाव लड़ें, लेकिन हमारे लाख चाहने के बाद भी गठबंधन नहीं बन पाया। रावत ने कहा कि राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ना राजनीतिक दलों की मजबूरी भी होती है, क्योंकि राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए एक निश्चित संख्या में वोट हासिल होना चाहिए। दिल्ली से बरेली जाते वक्त रविवार को हरीश रावत कुछ देर के लिए रामपुर में रुके थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि गठबंधन का मतलब अपनी ताकत बढ़ना नहीं, बल्कि सरकार बनाना होता है। 

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मध्य प्रदेश में हम जितनी सीट मायावती को दे रहे थे,उससे वह संतुष्ट नहीं थीं। मायावती और सीटें मांग रही थीं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में बसपा को 50 से अधिक सीट देने से चुनावी समीकरण गड़बड़ा सकता था। रावत ने कहा कि हम ऐसा समझते हैं कि पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में गठबंधन नहीं बन आने का असर लोकसभा के चुनाव पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकसभा में भाजपा के खिलाफ विपक्ष का महागठबंधन जरूर बनेगा। हरीश रावत ने कहा कि महागठबंधन की मोटी-मोटी बातें तय हो चुकी हैं। कांग्रेस ने लीडरशिप का मुद्दा नहीं उठाया है। हमने साफ कर दिया है कि पहले साथ मिलकर चुनाव लड़ लें, नेतृत्व के मुद्दे पर बाद में फैसला कर लेंगे।  
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इंडस्ट्रियल पैकेज ही 2030 तक बढ़ा दें मोदी: रावत  

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देहरादून में आयोजित इंवेस्टर्स समिट को सियासी जुमला करार दिया है। उन्होंने कहा कि इंवेस्टर्स समिट आयोजित करने से क्या होगा। यूपी में भी इस तरह से समिट आयोजित किए गए। फायदा क्या हुआ। समिट के नाम पर जितने एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं अगर उस पर अमल हो जाए तो यूपी में एक इंच जमीन नहीं बचेगी। उत्तराखंड में जमीन ही कहां बची है। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के इतने ही हितैषी हैं तो वह इंडस्ट्रियल पैकेज की अवधि को 2030 तक बढ़ा दें। 
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इंडस्ट्रियल पैकेज की अवधि 2020 में समाप्त हो रही है। इसके तहत उत्तराखंड के उद्योगों को एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में छूट मिलती है। उन्होंने कहा कि यूपी की योगी और उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मोदी जी तर्ज पर सिर्फ जुमलेबाजी कर रहे हैं। दोनों ही राज्यों के किसान परेशान हैं। मंडियों में धान की खरीद नहीं हो रही है। गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है।

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