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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Assembly elections: After the rallies, BJP and congress started door to door campaign

विधानसभा चुनाव: रैलियों के बाद अब माहौल बनाने के लिए चलेगा ये मिशन, दो राज्यों में अगले 36 घंटे हैं बेहद अहम

Wed, 15 Nov 2023 06:35 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 15 Nov 2023 06:35 PM IST
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सार
भाजपा ने अपने पन्ना प्रमुखों से मतदान तक प्रत्येक व्यक्ति से बुधवार शाम से लेकर शुक्रवार सुबह तक कम से कम दो बार मिलने और उनके घर पर पहुंचने के लिए कहा है। पन्ना प्रमुख कमेटियों से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारी का कहना है कि वह पहले से ही लगातार इस अभियान में जुटे हैं...
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Assembly elections: After the rallies, BJP and congress started door to door campaign
विधानसभा चुनाव - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की रैलियां के बाद बुधवार शाम को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रचार थम गया। उसके बाद दोनों पार्टियां चुनाव में माहौल बनाने के लिए रैलियों की भीड़ से निकले संदेश को घर-घर पहुंचाने की तैयारी में लग गई हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस अपनी रणनीतियों को बूथ अध्यक्ष से लेकर भारतीय जनता पार्टी के पन्ना प्रमुख और कांग्रेस के ब्लॉक, बूथ और नगर की कार्यकारिणी को पहुंचाने में जुटेंगी। इसके लिए बाकायदा सभी प्रमुख पार्टियों ने जिला अध्यक्षों के माध्यम से बुधवार को पार्टी की आगे की रणनीतियों को बढ़ाने के लिए निर्देश दिए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के इंदौर में हुए बड़े रोड शो के बाद बुधवार को प्रियंका गांधी ने मध्यप्रदेश में अपनी जनसभाएं कीं। दोनों नेताओं की जनसभाओं में पहुंची भीड़ से उत्साहित पार्टियों के नेताओं ने अब चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद की रणनीति को आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक भाजपा ने अपने पन्ना प्रमुखों को निर्देश दिया है कि मतदान तक प्रत्येक व्यक्ति से बुधवार शाम से लेकर शुक्रवार सुबह तक कम से कम दो बार मिलें और उनके घरों तक पहुंचें। पन्ना प्रमुख कमेटियों से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारी का कहना है कि वह पहले से ही लगातार इस अभियान में जुटे हैं। लेकिन चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद उनको दिए गए टास्क को हर हाल में पूरा करना है। भाजपा नेताओं के मुताबिक यह प्रक्रिया बुधवार शाम पांच बजे के बाद से डोर-टू-डोर प्रचार से अलग की जानी है। इसकी रिपोर्ट गुरुवार की सुबह मंडल अध्यक्षों के माध्यम से जिला अध्यक्षों को भेजी जानी है।

कांग्रेस के भी बड़े नेताओं की रैलियां का शोर आज शाम को थम गया। बुधवार शाम पांच बजे के बाद कांग्रेस आला कमान की ओर से मिले निर्देशों के मुताबिक ब्लॉक अध्यक्ष और नगर अध्यक्षों समेत बूथ लेवल की कमेटी के माध्यम से कांग्रेस की ओर से जारी किए गए सभी 'वचनों' को घर-घर पहुंचने की योजना बनाई है। कांग्रेस पार्टी के नेता मुकेश लोहानी बताते हैं कि पार्टी ने जिस तरीके से कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू कर नौकरीपेशा लोगों में एक भरोसा बनाया है, उसी संदेश को बुधवार की शाम पांच बजे के बाद से घर-घर तक पहुंचाने के लिए उनके कार्यकर्ता जाने वाले हैं। इसके अलावा पार्टी की ओर से तैयार किए गए वचनों को भी घर-घर पहुंचाने की पूरी तैयारी की गई है। जबकि छत्तीसगढ़ में सरकार की ओर से किए जाने वाले कामों को सभी वोटरों तक पहुंचाया जाएगा।

मध्यप्रदेश में भाजपा नेता राकेश सिंह बताते हैं कि उनकी पार्टी की योजनाएं, जो जनता के लिए मध्यप्रदेश में उतारी गई हैं उन्हें जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता बुधवार शाम से जुट जाएगा। राकेश सिंह कहते हैं कि डोर-टू-डोर किए जाने वाले प्रचार के अलावा अगले 36 घंटे प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। पार्टी इन्हीं 36 घंटे के भीतर अपने पूरे चुनाव अभियान के प्रत्येक बिंदु और योजनाओं को हर घर तक पहुंचाएगी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जहां अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में घर-घर तक पहुंचाने की तैयारी में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बनने के बाद किए जाने वाले वादों को  घर-घर पहुंचाने जा रही है।

सियासी जानकारों का भी कहना है जिस तरीके से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं ने लगातार रैलियां की हैं, उसका निचोड़ अब घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध धवन का कहना है कि चुनाव प्रचार थमने के बाद जिस तरीके की योजनाएं होती हैं, उनमें डोर-टू-डोर प्रचार का सबसे बड़ा तरीका अपनाया जाता है। उनका कहना है कि अभी तक देखा गया है कि बीते चुनावों में कांग्रेस और भाजपा ने इन 36 घंटों को बहुत मजबूती के साथ अलग-अलग राज्यों में प्रचार अभियान को धार देने के लिए इस्तेमाल किया है। खासतौर से भाजपा ने पन्ना प्रमुखों की जिम्मेदारियों के लिहाज से अपनी पार्टी की योजनाओं और सरकार की उपलब्धियों को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने की बड़ी रणनीति भी अपनाई है। वह कहते हैं कि जो फ्लोटिंग वोटर होते हैं, उनमें अंतिम समय में इस तरीके की रणनीति से कुछ बदलाव की उम्मीद की जाती है।

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