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29 दिनों की जंग, पांच हजार लोगों की मौत, आखिरकार समाप्त हुआ आर्मेनिया-अजरबैजान के बीच युद्ध
Mon, 26 Oct 2020 10:41 AM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 26 Oct 2020 10:41 AM IST
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आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच लड़ाई
- फोटो : PTI
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच 29 दिनों से चल रही जंग आखिरकार समाप्त हो गई है। दोनों देश मानवीय संघर्षविराम के लिए तैयार हो गए हैं। जंग के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सीजफायर के पालन पर मुहर लगाई है। आधी रात से दोनों देशों के बीच संघर्षविराम प्रभाव में आ गया है।
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दोनों देशों के बीच शांति की बहाली अमेरिका की पहल पर हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इसका एलान किया है। ट्रंप ने दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों को संघर्षविराम के लिए बधाई दी है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव को बधाई। दोनों देश सीजफायर के पालन के लिए सहमत हो गए हैं, जो आधी रात से प्रभाव में आ गया है। कई जीवन बच जाएंगे। मुझे मेरी टीम माइक पोम्पियो, स्टीव बेगन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद पर इस डील के लिए गर्व है।
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Congratulations to Armenian Prime Minister Nikol Pashinyan and Azerbaijani President Ilham Aliyev, who just agreed to adhere to a cease fire effective at midnight. Many lives will be saved. Proud of my team @SecPompeo & Steve Biegun & @WHNSC for getting the deal done!
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) October 25, 2020
गौरतलब है कि आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख को लेकर करीब एक महीने से जंग चल रही है। बताया गया है कि इस जंग में अब तक दोनों देशों के पांच हजार लोग मारे जा चुके हैं। दुनियाभर की नजर इस युद्ध पर थी, हालांकि अब युद्धविराम के बाद शांति स्थापित होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
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नागोर्नो-काराबाख की सेना ने अजरबैजान की सेना पर उसके इलाके में नागरिकों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में अरजबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आर्मेनियाई सेना ने अजरबैजान के टेरटर, अगदम और अघजाबेदी इलाकों में गोलीबारी की। इसके बाद 27 सितंबर को जंग शुरू हुई थी।
इस जंग को रोकने के लिए दो बार रूस की तरफ से मध्यस्थता की कोशिश की जा चुकी है। दोनों बार संघर्षविराम टिक नहीं पाया और युद्ध फिर से शुरू हो गया। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि अमेरिका की ओर से किया गया संघर्षविराम कब तक टिकता है।