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कभी सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था अजरबैजान, काली चाय का सेवन करते हैं यहां के लोग
Sun, 18 Oct 2020 11:22 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाकू (अजरबैजान)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाकू (अजरबैजान)
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 18 Oct 2020 11:22 AM IST
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नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र में अभी भी संघर्षविराम जारी है। दोनों देशों के बीच कई दशकों से सीमा किनारे पर एक हिस्से को लेकर विवाद चल रहा है। वहीं शनिवार को अजरबैजान ने आरोप लगाया कि आर्मेनिया ने उसके दूसरे सबसे बड़े शहर को बैलेस्टिक मिसाइल का निशाना बनाया है।
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हालांकि इन दोनों देशों के बीच कुछ समय पहले युद्धविराम पर सहमति बन गई थी लेकिन मौजूदा हालात इस बात की पुष्टि करते नहीं दिख रहे हैं। इस युद्ध से पहले इन दोनों देशों की अपनी अलग पहचान रही है, आइए जानते हैं कि अजरबैजान के लोग क्या पसंद करते हैं और वहां जीवन यापन कैसा है...
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कभी सोवियत संघ का हिस्सा था यह देश
अजरबैजान पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के चौराहे पर यूरेशिया के दक्षिण काकेशस क्षेत्र में स्थित एक देश है। यह पूर्व में कैस्पियन सागर, उत्तर में रूस, उत्तर पश्चिम में जॉर्जिया, पश्चिम में आर्मेनिया और दक्षिण में ईरान से घिरा है। बता दें कि अजरबैजान 1992-95 तक सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। यह देश इस्लाम धर्म को मानता है।
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यहां सबसे अहम कारोबार क्या है?
अजरबैजान पहला ऐसा मुस्लिम देश है, जिसमें थिएटर और ओपेरा हैं। यहां का महत्वपूर्ण व्यापार तेल है और यहां ज्यादा मात्रा में तेल की खोज ही होती है। यहां के लोग काली चाय का सबसे ज्यादा सेवन करते हैं। यहां एक ऐसा हेल्थ सेंटर हैं, जहां लोग कच्चे तेल के टब में स्नान ग्रहण करते हैं।
यहां कहा जाता है कि ऐसा करने से त्वचा संबंधी 70 बीमारियां ठीक हो सकती हैं। अजरबैजान की मुद्रा का नाम मनत है और यहां केवल सात फीसदी जमीन पर खेती की जा सकती है।