कोई उन्हें गीत सम्राट कहता है तो कोई गीतों का राजकुमार। कोई उन्हें श्रृंगार का स्वामी तो कोई आध्यात्मिक दर्शन का विद्वान मानता है। वे अस्सी साल तक भारत में कवि सम्मेलनों के सरताज रहे जिनकी मांग और चमक कभी मद्धम नहीं पड़ी। पांच पीढ़ियों को दीवाना बनाने वाले सदी के सपूत नीरज की याद में तीस जुलाई की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के ऑडिटोरियम एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। खचाखच भरे हॉल में नीरज के एक-एक दीवाने ने उनको नम आंखों और दिल की गहराइयों से याद किया।
सदाबहार नीरज की याद में एक शाम
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इस कार्यक्रम में पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, अभिनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा, डॉक्टर वेद प्रताप वैदिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला, जाने-माने कवि और नीरज के साथ दशकों तक मंच साझा कर चुके अशोक चक्रधर, गोविंद व्यास, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, कला जगत की पहचान शोवना नारायण, गजल गायन की सितारा राधिका चोपड़ा, मीडिया शिक्षा पुरोधा संदीप मारवाह, शिक्षाविद एल एस बहल, रचनाकार ममता किरण, दिल्ली को एक नई सांस्कृतिक पहचान दिलाने वाले डॉक्टर हरीश भल्ला, कभी अलविदा न कहना जैसे अनेक लोकप्रिय गीतों के रचयिता अमित खन्ना और नीरज के अभिन्न मित्र, कवि दिनेश रघुवंशी, एफएम गोल्ड की लोकप्रिय राजश्री त्रिवेदी समेत देश के चुनिंदा बुद्धिजीवी, काव्यप्रेमी और नीरज के प्रशंसक शामिल हुए।
राधिका चोपड़ा ने पूरे कार्यक्रम के दरम्यान नीरज की रचनाओं की सांगीतिक प्रस्तुति से बांध लिया। कारवां गुजर गया से लेकर नीरज के गीत, गजल, दोहे आदि राधिका ने पेश किए। श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने नीरज की एक रचना प्रस्तुत की, जिस पर सुश्री शोवना नारायण ने नाट्यपूर्ण प्रस्तुति दी। वाजपेयी जी ने नीरज के अंदाज में उनकी कुछ बेहद लोकप्रिय रचनाएं पेश कीं।
जिन महानुभावों के नाम आ चुके हैं, उनमें से अधिकांश ने नीरज जी के साथ संस्मरण सुनाए तो पल्लव अपने दादाजी को याद करके भावुक हो गए। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने नीरज के एतिहासिक और कालजयी मृत्युगीत की कहानी और उसके कुछ अंश पेश किए। अंत में नीरज की अपनी आवाज में - 'हम तो मस्त फकीर' सुनाया गया तो हॉल में मौजूद लोग भावविह्वल हो गए।
नीरज के पौत्र पल्लव नीरज और जानी मानी अभिनेत्री, कवियत्री और रंगमंच की पहचान लवलीन थडानी ने कार्यक्रम का आयोजन किया था। राजेश बादल और सुश्री थडानी पर आयोजन के संचालन की जिम्मेदारी थी।