'एक्सिस बैंक में भी हुआ था धर्मांतरण': TCS विवाद के बीच अमृता फडणवीस का दावा; इन कंपनियों पर लग चुके हैं आरोप
Corporate Controversy: क्या देश की बड़ी कंपनियों में वाकई सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल है या फिर परतें खुलने पर कुछ और ही सच सामने आ रहा है? जिससे कॉरपोरेट कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। टीसीएस से पहले भी कई कंपनियों में ऐसे विवाद सामने आ चुके है, पढ़ें रिपोर्ट...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आईटी सेक्टर में हालिया विवादों के बीच कॉरपोरेट वर्क कल्चर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। अमृता फडणवीस ने टीसीएस से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान एक्सिस बैंक में भी धर्मांतरण से जुड़े मामले सामने आए थे।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और कॉरपोरेट जगत में इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक, उस समय वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्रवाई की थी और इसी तरह की सख्ती आज भी जरूरी है। अमृता फडणवीस ने यह भी कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में पहले भी कार्रवाई हुई है, लेकिन अब समाज में कुछ घटनाएं अधिक गंभीर रूप लेती नजर आ रही हैं। उन्होंने युवाओं को जागरूक रहने और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने की जरूरत पर जोर दिया।
आइए जानते है क्या देश के बड़े कॉरपोरेट संस्थानों में वर्क कल्चर सच में उतना सुरक्षित और निष्पक्ष है, जितना दावा किया जाता है? हाल के विवादों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का मामला भले ही अभी चर्चा में आया हो लेकिन, इससे पहले इंफोसिस और टेक महिंद्रा में भी ऐसे मामले सामने या चुके हैं। हालांकि इन कंपनियों ने उस वक्त आरोपों का खंडन किया है...
TCS विवाद से बढ़ी बहस
यह पूरा विवाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नासिक मामले से शुरू हुआ, जहां कुछ कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, धमकी और जबरन धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस मामले में कई एफआईआर दर्ज हुईं और जांच एजेंसियों को भी शामिल किया गया। पुलिस अब तक सात पुरुषों और एक महिला ऑपरेशन्स मैनेजर समेत कुल आठ लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। मुंब्रा में जिस महिला की तलाश की जा रही है, वह इस मामले की नौवीं कड़ी है। एसआईटी फिलहाल छेड़छाड़, जबरन धर्मांतरण के प्रयास और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे कुल नौ मामलों की जांच कर रही है। इन आरोपों ने कंपनी के आंतरिक माहौल और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, टीसीएस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यहां पढ़ें खबर...टेक महिंद्रा में इफ्तार पार्टी पर भी उठे सवाल टेक महिंद्रा को लेकर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि मुंबई के गोरेगांव स्थित कंपनी के ऑफिस की कैंटीन को रमजान के दौरान नमाज और इफ्तार के लिए फुटवियर फ्री जोन घोषित किया गया था। हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि जांच में ये दावे निराधार पाए गए हैं और कंपनी सभी कर्मचारियों के लिए समान वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, वह धर्म या समुदाय के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करती और कर्मचारियों को सम्मानजनक वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इन्फोसिस में भी महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप
वहीं एक मामला इन्फोसिस के पुणे स्थित कंपनी की BPM यूनिट से जुड़ी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आया, जिनमें महिला कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, कुछ देर बाद ये पोस्ट डिलीट कर दी गईं, लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था। कंपनी ने इन दावों पर स्पष्ट किया कि वह भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है। कंपनी के अनुसार, हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और उसकी निष्पक्ष जांच की जाती है।लेंसकार्ट में भी बिंदी-तिलक पर विवाद
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। जिसमें उन्होंने लेंसकार्ट के 'स्टाइल गाइड' का एक पन्ना साझा किया था। इसमें लिखा था कि कर्मचारी धार्मिक टीका, बिंदी या सिंदूर नहीं लगा सकते। वहीं, हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी। अशोक पंडित ने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताते हुए लोगों से कंपनी के बायकॉट की अपील की थी। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इसे 'कॉर्पोरेट जिहाद' तक करार दिया।
आरोपों पर सफाई देते हुए लेंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है। यह कंपनी की वर्तमान एचआर पॉलिसी नहीं है। उन्होंने माना कि ट्रेनिंग के इस पुराने दस्तावेज में बिंदी और तिलक को लेकर गलत बातें लिखी थीं, जो कभी नहीं होनी चाहिए थीं। बंसल ने बताया कि कंपनी ने इस गलती को 17 फरवरी को ही सुधार लिया था, यानी विवाद शुरू होने से काफी पहले ही इसे हटा दिया गया था। यहां पढ़ें खबर...
कॉरपोरेट के वर्क कल्चर पर सवाल
इन घटनाओं ने आईटी सेक्टर के वर्क कल्चर को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। एक ओर कंपनियां समानता और सुरक्षित कार्यस्थल की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर सामने आ रहे आरोप इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर कई बार अधूरी या भ्रामक जानकारी भी तेजी से फैलती है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.