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Lenskart Controversy: बिंदी-तिलक विवाद पर लेंसकार्ट के सीईओ ने मांगी माफी, कहा- वायरल दस्तावेज पुराना है
Thu, 16 Apr 2026 02:59 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 16 Apr 2026 02:59 PM IST
सार
लेंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल ने बिंदी-तिलक विवाद पर माफी मांगी है। उन्होंने साफ किया कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और कंपनी की वर्तमान नीति में धार्मिक प्रतीकों पर कोई रोक नहीं है। बंसल ने इस गलती की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि लेंसकार्ट सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान करती है।
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पीयूष बंसल
- फोटो : ANI
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विस्तार
लेंसकार्ट कंपनी के 'स्टाइल गाइड' को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़े विवाद के बाद अब कंपनी के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने अपनी सफाई पेश की है। पिछले कुछ दिनों से कंपनी की एक कथित पॉलिसी को लेकर काफी हंगामा हो रहा था। आरोप था कि कंपनी अपने कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोक रही है, जबकि हिजाब और पगड़ी की अनुमति दे रही है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस विवाद की शुरुआत फिल्म निर्माता अशोक पंडित के एक पोस्ट से हुई थी। उन्होंने लेंसकार्ट के 'स्टाइल गाइड' का एक पन्ना साझा किया था। इसमें लिखा था कि कर्मचारी धार्मिक टीका, बिंदी या सिंदूर नहीं लगा सकते। वहीं, हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी। अशोक पंडित ने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताते हुए लोगों से कंपनी के बायकॉट की अपील की थी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे 'कॉर्पोरेट जिहाद' तक करार दिया।
क्या बोले लेंसकार्ट के सीईओ?
अब इन आरोपों पर सफाई देते हुए पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' लिखा, वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है। यह कंपनी की वर्तमान एचआर पॉलिसी नहीं है। उन्होंने माना कि ट्रेनिंग के इस पुराने दस्तावेज में बिंदी और तिलक को लेकर गलत बातें लिखी थीं, जो कभी नहीं होनी चाहिए थीं। बंसल ने बताया कि कंपनी ने इस गलती को 17 फरवरी को ही सुधार लिया था, यानी विवाद शुरू होने से काफी पहले ही इसे हटा दिया गया था।
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ये भी पढ़ें: संसद में संविधान संशोधन पर चर्चा: विधेयकों के पक्ष में तर्क और विपक्ष की आपत्तियां, किसने क्या कहा? यहां जानिए
चूक की ली जिम्मेदारी
पीयूष बंसल ने इस चूक की पूरी जिम्मेदारी खुद ली है। उन्होंने कहा, संस्थापक और सीईओ होने के नाते इस तरह की गलती की जिम्मेदारी मेरी है। मैंने अपनी टीम को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी किसी भी सामग्री की बारीकी से जांच की जाए। उन्होंने साफ किया कि लेंसकार्ट किसी भी तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाता है। कर्मचारी गर्व के साथ बिंदी, तिलक या अपनी आस्था से जुड़ा कोई भी प्रतीक पहन सकते हैं। उन्होंने कहा, हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि यह चीज हमारे ट्रेनिंग कंटेंट में कैसे शामिल हो गई।
बंसल ने आगे कहा कि लेंसकार्ट भारत में भारतीयों के लिए बनी कंपनी है। हमारे हजारों कर्मचारी अपनी संस्कृति और आस्था को गर्व के साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने उन लोगों का भी शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया, क्योंकि इससे कंपनी को अपनी कमियां सुधारने में मदद मिली। कंपनी ने इस पूरी स्थिति से पैदा हुई विवाद पर माफी भी मांगी है।
अन्य वीडियो-
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस विवाद की शुरुआत फिल्म निर्माता अशोक पंडित के एक पोस्ट से हुई थी। उन्होंने लेंसकार्ट के 'स्टाइल गाइड' का एक पन्ना साझा किया था। इसमें लिखा था कि कर्मचारी धार्मिक टीका, बिंदी या सिंदूर नहीं लगा सकते। वहीं, हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी। अशोक पंडित ने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताते हुए लोगों से कंपनी के बायकॉट की अपील की थी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे 'कॉर्पोरेट जिहाद' तक करार दिया।
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क्या बोले लेंसकार्ट के सीईओ?
अब इन आरोपों पर सफाई देते हुए पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' लिखा, वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है। यह कंपनी की वर्तमान एचआर पॉलिसी नहीं है। उन्होंने माना कि ट्रेनिंग के इस पुराने दस्तावेज में बिंदी और तिलक को लेकर गलत बातें लिखी थीं, जो कभी नहीं होनी चाहिए थीं। बंसल ने बताया कि कंपनी ने इस गलती को 17 फरवरी को ही सुधार लिया था, यानी विवाद शुरू होने से काफी पहले ही इसे हटा दिया गया था।
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चूक की ली जिम्मेदारी
पीयूष बंसल ने इस चूक की पूरी जिम्मेदारी खुद ली है। उन्होंने कहा, संस्थापक और सीईओ होने के नाते इस तरह की गलती की जिम्मेदारी मेरी है। मैंने अपनी टीम को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी किसी भी सामग्री की बारीकी से जांच की जाए। उन्होंने साफ किया कि लेंसकार्ट किसी भी तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाता है। कर्मचारी गर्व के साथ बिंदी, तिलक या अपनी आस्था से जुड़ा कोई भी प्रतीक पहन सकते हैं। उन्होंने कहा, हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि यह चीज हमारे ट्रेनिंग कंटेंट में कैसे शामिल हो गई।
बंसल ने आगे कहा कि लेंसकार्ट भारत में भारतीयों के लिए बनी कंपनी है। हमारे हजारों कर्मचारी अपनी संस्कृति और आस्था को गर्व के साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने उन लोगों का भी शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया, क्योंकि इससे कंपनी को अपनी कमियां सुधारने में मदद मिली। कंपनी ने इस पूरी स्थिति से पैदा हुई विवाद पर माफी भी मांगी है।
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