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Ground Report@Nalgonda: अपना किला वापस पाने की जद्दोजहद में कांग्रेस, बीआरएस को काम पर भरोसा
Mon, 27 Nov 2023 06:23 AM IST
जलज मिश्रा
नितिन यादव, हैदराबाद
नितिन यादव, हैदराबाद
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 27 Nov 2023 06:23 AM IST
सार
वारंगल से खम्मम के रास्ते में वाग्देवी नाम का एक बड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज है। कॉलेज की छुट्टी के दौरान काफी संख्या में छात्र गेट पर खड़े हैं। बीटेक के छात्र तरुण, राजेश और विवेक पहली बार वोट डालेंगे। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हुई है।
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Telangana Election 2023
- फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
अन्य बड़े जिलों की तरह ही नलगोंडा की 12 सीटों को भी नए जिलों नलगोंडा, सूर्यापेट और यदाद्रि भुवनगीर में बांट दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम्युनिस्टों का प्रभाव रहा है। इस बार कांग्रेस-सीपीआई का गठजोड़ भी है। वहीं, बीआरएस के कार्यकर्ता जगह-जगह बने चुनावी कैंपों में अपनी योजनाओं को गिना रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि हर वर्ग, खासतौर पर गांवों में इसी के नाम पर वोट बरसेंगे। नितिन यादव की रिपोर्ट-
नलगोंडा शहर में वैसी चमक नहीं दिखाई दी जैसी कि तेलंगाना के अन्य शहरों में दिखी। सड़कें भी उतनी बेहतर नहीं हैं और बाजार भी सामान्य शहरों की तरह ही है। यह क्षेत्र नागार्जुन सागर बांध के लिए प्रसिद्ध है, यह बात और है कि ग्रामीण इलाकों में सूखे जैसी स्थिति भी रहती है। पिछले चुनाव में यहां की 12 सीटों में से कांग्रेस तीन ही सीटों पर जीत पाई थी। उसमें से भी दो विधायक बीआरएस में चले गए थे और एक के भाजपा में जाने के कारण उपचुनाव हुआ था। संयुक्त आंध्रप्रदेश में यह क्षेत्र कांग्रेस का ही गढ़ हुआ करता था। इस बार भी कांग्रेस को मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है।
नलगोंडा विधानसभा क्षेत्र में बीआरएस विधायक भूपाल रेड्डी के सामने कांग्रेस ने चार बार के विधायक वेंकट रेड्डी को मैदान में उतारा है। भाजपा से कई शिक्षण संस्थान चलाने वाले श्री निवास गौड़ मैदान में हैं। यहां पर पिछड़ी जातियों की संख्या अच्छी खासी है। इसी कारण फारवर्ड ब्लॉक से पी राजू यादव मैदान में हैं। यहां 30 प्रतिशत तक मुस्लिम हैं। जानकारों का कहना है कि वेंकट रेड्डी की पकड़ यहां काफी मजबूत है। वरिष्ठ पत्रकार फहीम अहमद का कहना है कि जिस तरह से कर्नाटक में रेड्डी बंधुओं की ताकत रहती थी, वैसी ही इस क्षेत्र में कांग्रेस के इन कोमठ रेड्डी बंधुओं की है। कहा जाता है कि वह खुद तो लड़ते ही हैं, अधिकांश टिकट भी उनकी ही पसंद के दिलाए जाते हैं।
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मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीआरएस के बीच ही
नागार्जुन सागर बांध सीट पर बीआरएस और कांग्रेस के बीच कई सालों से प्रतिद्वंद्विता है। यहां कांग्रेस के जयवीर रेड्डी और बीआरएस विधायक एन भगत आमने-सामने हैं। नकरेकल में भी कांग्रेस से जीतकर बीआरएस में जाने वाले सी लिंगैया के सामने कांग्रेस से वीवी रेशम हैं। हुजूरनगर में कांग्रेस एमपी कैप्टन उत्तम रेड्डी के सामने एमएलए बी सईदी रेड्डी हैं। कोदार, आलेर, देवारकोंडा, तुगातुर्की में भी कांग्रेस और बीआरएस के बीच ही मुख्य मुकाबला दिखाई देता है।
सूर्यापेट सीट पर रोचक लड़ाई
अहम सीट सूर्यापेट से बीआरएस के दिग्गज नेता और मंत्री जगदीश रेड्डी के सामने कांग्रेस ने चार बार के विधायक दामोदर रेड्डी को मैदान में उतारा है। जगदीश रेड्डी के खास रहे बी जनैया यादव ने अब बसपा से ताल ठोक दी है। भाजपा ने टीडीपी से विधायक रहे सी वेंकटेश्वर राव को मैदान में उतारा है।
तिरुपति बालाजी की तर्ज पर यादागिरी गुट्टा का विकास
यदाद्रि भुवनगीर में एक पहाड़ी पर यादागिरी गुट्टा यानी भगवान श्री लक्ष्मीनारायण सिम्हा स्वामी मंदिर के विकास पर सरकार ने काफी जोर दिया है। हैदराबाद से महज 60 किमी दूर यह मंदिर अब तेलंगाना का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया है। केसीआर की सरकार में इसे विकसित करने के लिए काफी काम किए गए हैं। इसका प्रचार भी खूब किया गया है। प्रदेश सरकार इसे आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर विकसित करना चाहती है।
वारंगल : 12 सीटें, बीआरएस-कांग्रेस में कड़ी टक्कर, भाजपा को भी उम्मीदें
हैदराबाद के बाद आर्थिक तौर पर सबसे खुशहाल वारंगल जिले की भी बाकी तेलंगाना की तरह दो कहानियां हैं। एक ऐसा शहर जिसमें तमाम सुविधाएं हैं और शहरी चकाचौंध के बीच दिखती तरक्की। वहीं दूसरी ओर गांवों और खासतौर पर जनजातीय गांवों की ओर जाते हुए आपको इसका दूसरा पहलू दिखाई पड़ता है। ऐसे ही लंबाड़ा जनजाति के एक गांव पानिस्ताड़ा में सरपंच बदरू का एक छोटा सा घर है। सरपंच बताते हैं कि हमारे पूर्वज राजस्थान से यहां आए। यहां तारम्मा नाम की महिला पारंपरिक घाघरे के साथ गले में चांदी की हंसली और पैरों में भी चांदी का मोटा सा आभूषण पहने हुए हैं। सरपंच कहते हैं कि उनके गांव में भी बिजली और सड़क पहुंची हुई है। वह सरकार से खुश हैं।
वारंगल में लगभग 12 सौ साल पहले काकरितया साम्राज्य रहा है। एक हजार पिलर का उसी दौर का मंदिर भी है। यह जिला काफी बड़ा है और नए जिले के बनने के दौरान वारंगल जिले में से वारंगल ईस्ट और वेस्ट सहित छह जिले बनाए गए। पिछली बार यहां की अधिकांश सीटों पर बीआरएस ने बाजी मारी थी। वारंगल ईस्ट की सीट पर सबसे ज्यादा घमासान है। यहां पर बीआरएस के विधायक नरेंद्र के सामने कांग्रेस के पूर्व मंत्री के सुरेगा हैं तो भाजपा के पी राव भी मजबूती से चुनावी मैदान में हैं। लगभग ढाई लाख वोटरों में 45 हजार मुसलमानों के साथ 20 से 25 हजार क्रिश्चियन वोटरों की भी अहम भूमिका रहेगी। नरसमपेट, मुलुग, पालाकुर्ती, महबूबाबाद, डेरनाकल, जनगांव, गणपुर और भूपालपल्ली में भी बीआरएस और कांग्रेस के बीच की प्रमुख लड़ाई दिखाई दे रही है। भाजपा को वेस्ट के साथ प्रकल से भी काफी उम्मीदें हैं। दक्षिण के अभिनेता पवन कल्याण की पार्टी से गठबंधन का भी भाजपा को यहां लाभ मिल रहा है।
युवा बोले-रोजगार चाहिए
वारंगल से खम्मम के रास्ते में वाग्देवी नाम का एक बड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज है। कॉलेज की छुट्टी के दौरान काफी संख्या में छात्र गेट पर खड़े हैं। बीटेक के छात्र तरुण, राजेश और विवेक पहली बार वोट डालेंगे। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हुई है। प्राइवेट में नौकरी के अवसर बढ़ने के सवाल पर वह कहते हैं कि गांवों में अभी भी सरकारी नौकरी का ही क्रेज है। ग्रामीण दिलीप कुमार का कहना है कि बदलाव भी होना चाहिए।
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नलगोंडा शहर में वैसी चमक नहीं दिखाई दी जैसी कि तेलंगाना के अन्य शहरों में दिखी। सड़कें भी उतनी बेहतर नहीं हैं और बाजार भी सामान्य शहरों की तरह ही है। यह क्षेत्र नागार्जुन सागर बांध के लिए प्रसिद्ध है, यह बात और है कि ग्रामीण इलाकों में सूखे जैसी स्थिति भी रहती है। पिछले चुनाव में यहां की 12 सीटों में से कांग्रेस तीन ही सीटों पर जीत पाई थी। उसमें से भी दो विधायक बीआरएस में चले गए थे और एक के भाजपा में जाने के कारण उपचुनाव हुआ था। संयुक्त आंध्रप्रदेश में यह क्षेत्र कांग्रेस का ही गढ़ हुआ करता था। इस बार भी कांग्रेस को मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है।
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नलगोंडा विधानसभा क्षेत्र में बीआरएस विधायक भूपाल रेड्डी के सामने कांग्रेस ने चार बार के विधायक वेंकट रेड्डी को मैदान में उतारा है। भाजपा से कई शिक्षण संस्थान चलाने वाले श्री निवास गौड़ मैदान में हैं। यहां पर पिछड़ी जातियों की संख्या अच्छी खासी है। इसी कारण फारवर्ड ब्लॉक से पी राजू यादव मैदान में हैं। यहां 30 प्रतिशत तक मुस्लिम हैं। जानकारों का कहना है कि वेंकट रेड्डी की पकड़ यहां काफी मजबूत है। वरिष्ठ पत्रकार फहीम अहमद का कहना है कि जिस तरह से कर्नाटक में रेड्डी बंधुओं की ताकत रहती थी, वैसी ही इस क्षेत्र में कांग्रेस के इन कोमठ रेड्डी बंधुओं की है। कहा जाता है कि वह खुद तो लड़ते ही हैं, अधिकांश टिकट भी उनकी ही पसंद के दिलाए जाते हैं।
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मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीआरएस के बीच ही
नागार्जुन सागर बांध सीट पर बीआरएस और कांग्रेस के बीच कई सालों से प्रतिद्वंद्विता है। यहां कांग्रेस के जयवीर रेड्डी और बीआरएस विधायक एन भगत आमने-सामने हैं। नकरेकल में भी कांग्रेस से जीतकर बीआरएस में जाने वाले सी लिंगैया के सामने कांग्रेस से वीवी रेशम हैं। हुजूरनगर में कांग्रेस एमपी कैप्टन उत्तम रेड्डी के सामने एमएलए बी सईदी रेड्डी हैं। कोदार, आलेर, देवारकोंडा, तुगातुर्की में भी कांग्रेस और बीआरएस के बीच ही मुख्य मुकाबला दिखाई देता है।
सूर्यापेट सीट पर रोचक लड़ाई
अहम सीट सूर्यापेट से बीआरएस के दिग्गज नेता और मंत्री जगदीश रेड्डी के सामने कांग्रेस ने चार बार के विधायक दामोदर रेड्डी को मैदान में उतारा है। जगदीश रेड्डी के खास रहे बी जनैया यादव ने अब बसपा से ताल ठोक दी है। भाजपा ने टीडीपी से विधायक रहे सी वेंकटेश्वर राव को मैदान में उतारा है।
तिरुपति बालाजी की तर्ज पर यादागिरी गुट्टा का विकास
यदाद्रि भुवनगीर में एक पहाड़ी पर यादागिरी गुट्टा यानी भगवान श्री लक्ष्मीनारायण सिम्हा स्वामी मंदिर के विकास पर सरकार ने काफी जोर दिया है। हैदराबाद से महज 60 किमी दूर यह मंदिर अब तेलंगाना का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया है। केसीआर की सरकार में इसे विकसित करने के लिए काफी काम किए गए हैं। इसका प्रचार भी खूब किया गया है। प्रदेश सरकार इसे आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर विकसित करना चाहती है।
वारंगल : 12 सीटें, बीआरएस-कांग्रेस में कड़ी टक्कर, भाजपा को भी उम्मीदें
हैदराबाद के बाद आर्थिक तौर पर सबसे खुशहाल वारंगल जिले की भी बाकी तेलंगाना की तरह दो कहानियां हैं। एक ऐसा शहर जिसमें तमाम सुविधाएं हैं और शहरी चकाचौंध के बीच दिखती तरक्की। वहीं दूसरी ओर गांवों और खासतौर पर जनजातीय गांवों की ओर जाते हुए आपको इसका दूसरा पहलू दिखाई पड़ता है। ऐसे ही लंबाड़ा जनजाति के एक गांव पानिस्ताड़ा में सरपंच बदरू का एक छोटा सा घर है। सरपंच बताते हैं कि हमारे पूर्वज राजस्थान से यहां आए। यहां तारम्मा नाम की महिला पारंपरिक घाघरे के साथ गले में चांदी की हंसली और पैरों में भी चांदी का मोटा सा आभूषण पहने हुए हैं। सरपंच कहते हैं कि उनके गांव में भी बिजली और सड़क पहुंची हुई है। वह सरकार से खुश हैं।
वारंगल में लगभग 12 सौ साल पहले काकरितया साम्राज्य रहा है। एक हजार पिलर का उसी दौर का मंदिर भी है। यह जिला काफी बड़ा है और नए जिले के बनने के दौरान वारंगल जिले में से वारंगल ईस्ट और वेस्ट सहित छह जिले बनाए गए। पिछली बार यहां की अधिकांश सीटों पर बीआरएस ने बाजी मारी थी। वारंगल ईस्ट की सीट पर सबसे ज्यादा घमासान है। यहां पर बीआरएस के विधायक नरेंद्र के सामने कांग्रेस के पूर्व मंत्री के सुरेगा हैं तो भाजपा के पी राव भी मजबूती से चुनावी मैदान में हैं। लगभग ढाई लाख वोटरों में 45 हजार मुसलमानों के साथ 20 से 25 हजार क्रिश्चियन वोटरों की भी अहम भूमिका रहेगी। नरसमपेट, मुलुग, पालाकुर्ती, महबूबाबाद, डेरनाकल, जनगांव, गणपुर और भूपालपल्ली में भी बीआरएस और कांग्रेस के बीच की प्रमुख लड़ाई दिखाई दे रही है। भाजपा को वेस्ट के साथ प्रकल से भी काफी उम्मीदें हैं। दक्षिण के अभिनेता पवन कल्याण की पार्टी से गठबंधन का भी भाजपा को यहां लाभ मिल रहा है।
युवा बोले-रोजगार चाहिए
वारंगल से खम्मम के रास्ते में वाग्देवी नाम का एक बड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज है। कॉलेज की छुट्टी के दौरान काफी संख्या में छात्र गेट पर खड़े हैं। बीटेक के छात्र तरुण, राजेश और विवेक पहली बार वोट डालेंगे। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हुई है। प्राइवेट में नौकरी के अवसर बढ़ने के सवाल पर वह कहते हैं कि गांवों में अभी भी सरकारी नौकरी का ही क्रेज है। ग्रामीण दिलीप कुमार का कहना है कि बदलाव भी होना चाहिए।