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AAP ने की राफेल विमान सौदे की जांच की मांग, CVC से कहा- रिलायंस डिफेंस को कोई अनुभव नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 07 Mar 2018 02:01 AM IST
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राफेल जहाज
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आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय सतर्कता आयोग में शिकायत कर राफेल सौदे की जांच की मांग की है। पार्टी के सांसद संजय सिंह और एनडी गुप्ता ने मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि एनडीए सरकार ने यूपीए सरकार के पूर्ववर्ती 126 जहाजों का सौदा खत्म कर महज 36 जहाज खरीदने का फैसला किया है, वह भी ऊंचे दामों पर। इस पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए।
यूपीए सरकार ने 126 में से सिर्फ 18 जहाज उड़ने की स्थिति में यानी फ्लाई अवे कंडीशन में खरीदने का फैसला किया था। बाकी जहाजों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को करना था।
जिसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डस्सो भारत को तकनीकी हस्तांतरित करती। इसकी कुल कीमत 54 हजार करोड़ थी, यानी प्रति जहाज 503 करोड़ रुपये।
लेकिन एनडीए सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली डील को रद्द कर फ्रांस के साथ दोबारा समझौता किया जिसमें 126 की जगह सिर्फ 36 जहाज फ्लाई अवे कंडीशन में खरीदने थे। वह भी 58000 करोड़ रुपये में।
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यानी प्रति जहाज कीमत हो गई 1600 करोड़ रुपये और भारत को तकनीक भी नहीं मिली।
आम आदमी पार्टी के सांसदों का आरोप है कि इसके एक सप्ताह बाद ही फ्रांसीसी कंपनी ने भारत की एक निजी कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के साथ जहाजों के मेंटेनेंस और निर्माण के बारे में समझौता कर लिया।
यानी जो काम एचएएल करने वाली थी वह काम अब अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस लिमिटेड करेगी जबकि इस कंपनी का रक्षा सामग्री निर्माण का कोई अनुभव नहीं है।
आप सांसदों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग के अध्यक्ष से इस पूरे मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है।
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यूपीए सरकार ने 126 में से सिर्फ 18 जहाज उड़ने की स्थिति में यानी फ्लाई अवे कंडीशन में खरीदने का फैसला किया था। बाकी जहाजों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को करना था।
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जिसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डस्सो भारत को तकनीकी हस्तांतरित करती। इसकी कुल कीमत 54 हजार करोड़ थी, यानी प्रति जहाज 503 करोड़ रुपये।
लेकिन एनडीए सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली डील को रद्द कर फ्रांस के साथ दोबारा समझौता किया जिसमें 126 की जगह सिर्फ 36 जहाज फ्लाई अवे कंडीशन में खरीदने थे। वह भी 58000 करोड़ रुपये में।
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यानी प्रति जहाज कीमत हो गई 1600 करोड़ रुपये और भारत को तकनीक भी नहीं मिली।
आम आदमी पार्टी के सांसदों का आरोप है कि इसके एक सप्ताह बाद ही फ्रांसीसी कंपनी ने भारत की एक निजी कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के साथ जहाजों के मेंटेनेंस और निर्माण के बारे में समझौता कर लिया।
यानी जो काम एचएएल करने वाली थी वह काम अब अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस लिमिटेड करेगी जबकि इस कंपनी का रक्षा सामग्री निर्माण का कोई अनुभव नहीं है।
आप सांसदों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग के अध्यक्ष से इस पूरे मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है।