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10 मिनट डिलीवरी पर सेवाओं पर प्रतिबंध की मांग: AAP सांसद राघव चड्ढा बोले- यह गिग वर्करों पर ज़ुल्म है

Fri, 05 Dec 2025 03:33 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 05 Dec 2025 03:33 PM IST
सार

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान आप सांसद राघव चड्ढा 10 मिनट डिलीवरी पर सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस दौरान गिग वर्करों के दर्द को साझा करते उन्होंने कहा, 'ये लोग दर्द, डर और असुरक्षा छुपाकर भी आपके दरवाजे पर मुस्कुराकर कहते हैं- 'सर, धन्यवाद, पांच-स्टार रेटिंग दे देना।'

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AAP's Raghav Chadha demands ban on 10-minute delivery services, protection for gig workers
राघव चड्ढा, सांसद, आम आदमी पार्टी - फोटो : twitter @raghav_chadha

विस्तार

आम आदमी पार्टी (आप) सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में 'शून्यकाल' के दौरान तेजी से बढ़ रही 10 मिनट डिलीवरी सेवाओं पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि इस प्रथा को तुरंत बंद किया जाना चाहिए क्योंकि इससे गिग वर्करों की जान पर बन आती है। उन्होंने कहा कि ये डिलीवरी बॉय कोई मशीन नहीं, बल्कि किसी के पिता, पति, भाई या बेटे हैं। राघव चड्ढा ने कहा- 'हम 10 मिनट में खाना आने की उम्मीद तो रखते हैं, लेकिन क्या हम उन लोगों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं जो यह डिलीवरी करते हैं?'
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गिग वर्कर- अर्थव्यवस्था का अदृश्य पहिया
राघव चड्ढा ने कहा कि जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जेप्टो, ओला-उबर जैसी कंपनियों में काम करने वाले डिलीवरी और सवारी सेवा कर्मी देश की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले अदृश्य पहिए हैं। वे रोज मोबाइल एप के लिए बटन दबाते ही 'ऑर्डर आ गया है', 'सवारी आ गई है' जैसे नोटिफिकेशन देकर लोगों की सुविधा सुनिश्चित करते हैं। लेकिन लोग इन सेवाओं के पीछे काम करने वाले व्यक्ति की हालत और संघर्ष को नहीं देखते।
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गिग वर्करों के सामने 3 बड़े संकट
  • डिलीवरी स्पीड और टाइम प्रेशर- उन्होंने कहा कि 10-मिनट डिलीवरी का दबाव इतना ज्यादा है कि डिलीवरी कर्मियों को ओवरस्पीड, लाल सिग्नल पार, और ट्रैफिक नियम तोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है। राघव चड्ढा के अनुसार यदि वे कुछ मिनट लेट हो जाएं तो रेटिंग गिर जाती है, इंसेंटिव कट जाता है, एप लॉग आउट कर दिया जाता है। आईडी ब्लॉक होने का डर रहता है
  • कस्टमर का दबाव और टॉर्चर- राघव चड्ढा ने आगे कहा- सिर्फ पांच से सात मिनट की देरी पर गाली-गलौज, धमकी, एक-स्टार रेटिंग जैसी स्थितियां बन जाती हैं, जिससे पूरे महीने की कमाई प्रभावित होती है।
  • खतरनाक और कठिन कामकाजी हालात- आप सांसद ने कहा कि गिग वर्कर 12-14 घंटे की ड्यूटी करते हैं, बारिश, सर्दी, गर्मी, हर मौसम में काम करते हैं। इस दौरान उनके पास सुरक्षात्मक कपड़े नहीं होते हैं। उनके लिए कोई बोनस या जोखिम भत्ता नहीं भी नहीं होता है। राघव चड्ढा ने कहा कि फैक्ट्री कर्मियों की तुलना में, गिग वर्करों के पास, स्थायी नौकरी, सुरक्षित कार्य वातावरण, स्वास्थ्य या दुर्घटना बीमा, किसी भी तरह की सुरक्षा मौजूद नहीं है।

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सरकार और संसद से अपील
राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार और सदन से मांग की कि- 10 मिनट डिलीवरी सेवा को बंद किया जाए, गिग वर्करों के अधिकार सुरक्षित किए जाएं। उनके लिए स्वास्थ्य लाभ, बीमा, सुरक्षित कामकाजी माहौल और सम्मानजनक वेतन की व्यवस्था की जाए।

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