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एशिया में पहली बार कोरोना मरीज का फेफड़ा बदला, जानें क्यों और कैसे हुआ संभव
Sat, 29 Aug 2020 04:06 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 29 Aug 2020 04:06 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Flickr
चेन्नई स्थित मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल एमजीएम हेल्थकेयर ने कोरोना वायरस पॉजिटिव रोगी में एशिया का पहला दोनों ओर के फेफड़ों का प्रत्यारोपण करने का दावा किया है। अस्पताल के सर्जनों ने कोरोना संक्रमित मरीज की द्विपक्षीय (डबल रंग) प्रत्यारोपण शल्यक्रिया पूरी की। यह फेफड़े दिल्ली से लाए गए थे।
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इन फेफड़ों का दाता एक 34 वर्षीय व्यक्ति था, जिसे दिमाग के अंदर रक्तस्त्राव से पीड़ित होने के बाद गुरुवार को अपोलो ग्लेनेगल्स ग्लोबल अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। इसके बाद उसके गुर्दे, दिल, फेफड़े, यकृत और त्वचा को शहर के अस्पतालों में विभिन्न प्राप्तकर्ताओं को दान करने के लिए भेज दिया गया। अंगदान करने वाले शख्स की उचित पहचान उजागर नहीं की गई है। साथ ही अंगदान से पहले उसकी पत्नी की सहमति भी ली गई।
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बहरहाल, एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के निदेशक डॉ. केआर बालकृष्णन ने दोनों ओर के फेफड़े के प्रत्यारोपण का नेतृत्व किया। डॉ. बालकृष्णन ने कहा कि यह सराहनीय था कि डॉक्टर इस प्रत्यारोपण के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर भी तैयार हुए और इसे पूरा किया।
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अस्पताल ने एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस संबंधी फाइब्रोसिस से 48 वर्षीय व्यक्ति के फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हुए थे। उनकी ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के चलते गाजियाबाद के एक अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रख दिया गया और बाद में एसीएमओ पर रखा गया। उन्हें 20 जुलाई को चेन्नई ले जाया गया। जहां उनके फेफड़ों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। इसी तरह उक्त शख्स का दिल भी एक मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया है।
बहरहाल, यह संयोग है कि 12 जनवरी 2014 को घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर एक हादसे में अपने दोनों हाथ खोने के बाद मोनिका मोरे नाम की महिला को भी असली अंगों की जोड़ी की तलाश थी। अब उक्त शख्स के दोनों हाथों को इस महिला के हाथों में प्रत्यारोपित करने के लिए भेजा गया है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि शल्यक्रिया सफल रहती है और महिला का शरीर उक्त पुरुष के हाथों को अपना लेता है तो यह किसी चमत्कार जैसी और देश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।