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7th Indian Ocean Conference: पर्थ से क्या लेकर लौटेंगे विदेश मंत्री एस जयशंकर? बढ़ रही हैं कई जटिल चुनौतियां

Fri, 09 Feb 2024 01:05 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 09 Feb 2024 01:05 PM IST
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सार
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल कहते हैं कि वहां सैनिकों के बदले में तकीनीकी कार्यबल को भेजा जाएगा। यह असैन्य तकीनीकी कार्यबल वहां तैनात डोर्नियर विमान और दो हेलीकाप्टरों की देखभाल करेंगे। सूचना है कि 10 मार्च से भारतीय सैनिकों की वापसी शुरू हो जाएगी और 10 मई तक सभी सैनिक भारत आ जाएंगे...
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7th Indian Ocean Conference: What will Foreign Minister S Jaishankar return with from Perth?
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

आस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में हिंद महासागरीय देशों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हो रहा है। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बड़ा सवाल है कि पर्थ से विदेश मंत्री एस जयशंकर क्या लेकर लौटेंगे? विदेश मंत्री ऐसे समय में पर्थ में होंगे, जब हिंद महासागरीय क्षेत्र में चीन की धमक लगातार बढ़ रही है। मालदीव ने भारत से अपने करीब 88 सैनिकों को बुलाने के लिए कह दिया है और वहां चीन की पकड़ मजबूत होने के आसार हैं। हूती विद्रोहियों समेत अन्य समुद्री आतंकियों का खतरा बढ़ रहा है। नौसेना मुख्यालय के सूत्र भी मानते हैं कि समुद्री क्षेत्र में चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर विदेश मामलों में काफी रमे हैं। उन्हें विदेश मामलों में भारत के संकट मोचक के तौर पर देखा जाता है। हाल में मालदीव के साथ भी भारतीय विदेश मंत्रालय ने बड़ी सावधानी से मामले को निपटाया है। मालदीव की सैनिकों को वापस बुलाने की बात को भारत ने मान लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल कहते हैं कि वहां सैनिकों के बदले में तकीनीकी कार्यबल को भेजा जाएगा। यह असैन्य तकीनीकी कार्यबल वहां तैनात डोर्नियर विमान और दो हेलीकाप्टरों की देखभाल करेंगे। सूचना है कि 10 मार्च से भारतीय सैनिकों की वापसी शुरू हो जाएगी और 10 मई तक सभी सैनिक भारत आ जाएंगे। उनके स्थान पर असैन्य तकनीकी बल वहां तैनात होगा। यह रास्ता अफ्रीकी देश युगांडा की राजधानी कंपाला में विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके समकक्ष मूसा जमीर के बीच में बनी सहमति के बाद निकल सका था। इससे पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और अधिकारी सहमति बनाने के लिए लगातार होमवर्क कर रहे थे।  

हिंद महागरीय क्षेत्र के परामर्श देने वाले मंच से है बड़ी उम्मीद

भारत का हमेशा मानना है कि पड़ोस के देश में शांति और स्थायित्व हमेशा सुखद परिणाम देती है। विदेश मंत्री समय पर्थ में श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रम सिंघे, आस्ट्रेलिया के समकक्ष पेनी वोंग, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन समेत अन्य से भेंट और चर्चा कर सकते हैं। कूटनीति के जानकार कहते हैं कि पड़ोसी और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रमुखता देकर हिंद महासागरीय क्षेत्र के देशों में भारत लगातार सहयोग के जरिए सुरक्षा के वातावरण को मजबूत करने का पक्षधर रहा है। माना जा रहा है कि जयशंकर पर्थ में इसी कूटनीति को आगे बढ़ाएंगे। दरसल, हिंद महासागरीय क्षेत्र के देशों का यह सम्मेलन, सुरक्षा, समुद्री खतरों तथा अंतरराष्ट्रीय नियम-कानून की अनुपालना में स्वतंत्र और भयरहित नौवहन को बनाए रखने का (परामर्श देने वाला) मंच है। इसमें ब्लू वाटर इकॉनमी के साथ-साथ क्षेत्र में संभावित खतरे, सहयोग आदि पर चर्चा की जाती है। माना जा रहा है कि विदेश मंत्री जयशंकर इस बार इसके बाबत बड़ा कूटनीतिक संदेश दे सकते हैं।

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