जियो का फ्री प्लान दे गया सरकार को बड़ा घाटा, लगी 685 करोड़ की चपत
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टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के फ्री वॉइस कॉल और डेटा सर्विस की वजह से सरकार को 685 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है। इस मामले को लेकर टेलिकॉम कमीशन, ट्राई की खिंचाई कर सकता है।
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक नियम कहता है कि कोई भी टेलिकॉम कंपनी 90 दिनों से ज्यादा वक्त तक प्रमोशनल ऑफर ग्राहकों को मुहैया नहीं करा सकती। बुधवार को टेलिकॉम कमीशन ने जिओ के प्रमोशनल ऑफर्स का संज्ञान लिया है। जिओ ने 90 दिनों से ज्यादा तक अपना प्रमोशनल ऑफर जारी रखा।
सरकार मोबाइल ऑफरेटरों से स्पैक्ट्रम यूसेज चार्ज और लाइसेंस फी वसूलती है। ये चार्ज कंपनी के रिवेन्यू के आधार पर लिया जाता है। जिओ के ऑफर की वजह से टेलिकॉम इंडस्ट्री के रिवेन्यू में गिरावट देखने को मिल रही है। इस वजह से सरकार को 685 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
14 पैसे से कम में कॉल ऑफर नहीं कर सकतीं कंपनियां
कमीशन इस संबंध में ट्राई को एक दस्तावेज भेजने वाली है जिसमें कहा गया है कि रेवेन्यू में 8-10 प्रतिशत की गिरावट के आसार दिखाई दे रहे हैं। कमीशन ने कुछ वक्त पहले टेलिकॉम कंपनियों पर 3,050 करोड़ रुपये के फाइन को लेकर ट्राई को फटकार लगाई थी।
कमीशन की जानकारी रखने वाले अधिकारी के मुताबिक संस्था ने टेलिकॉम इंडस्ट्री की खराब हालत को लेकर चिंता जाहिर की है। कमीशन ने ट्राई को प्रमोशनल टैरिफ के मामले में जून 2002 और सितंबर 2008 के फैसलों को लागू करने की बात की है।
जून 2002 के फैसले के तहत कोई भी टेलिकॉम कंपनी किसी भी प्रमोशनल ऑफर को 90 दिनों से ज्यादा लागू नहीं कर सकती। वहीं दूसरी ओर इस फैसले में कॉल के बेस प्राइस 14 पैसे तय किया गया था। फैसले के मुताबिक कंपनियां 14 पैसे से कम में कॉल ऑफर नहीं कर सकतीं। इसी वजह से आधार पर जियो को एयरटेल ने चुनौती दी थी।