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Una News: वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए दायर महिला की याचिका स्वीकार
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अदालत से
2016 में हुई थी हरोली की युवती की नवांशहर में शादी, तलाक का मामला पंजाब के कोर्ट में लंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए दायर महिला की याचिका को अपर प्रधान न्यायाधीश द्वितीय व पारिवारिक न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। हरोली के गांव बाथरी निवासी महिला जसविंदर कौर ने याचिका में कहा था कि उसकी शादी 2016 में निर्मल सिंह पुत्र स्व. महिंदर सिंह निवासी श्री गुरु तेग बहादुर बंगा रोड नवांशहर पंजाब में हुई थी। शादी के दौरान परिवार ने पति और उसके रिश्तेदारों को ढेर सारे उपहार दिए थे। कुछ दिनों बाद ससुराल वालों ने दहेज को लेकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कई बार पिटाई की। बाद में तलाक की धमकी दी। जुलाई 2017 में वह गर्भवती हो गई। उस दौरान चिकित्सा सहायता और भरण-पोषण प्रदान नहीं किया। इससे स्वास्थ्य बिगड़ता गया। बाद में व्यथा दादा को बताई। दादा ससुराल आए और ससुराल वालों को उचित इलाज प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया लेकिन गर्भावस्था का फायदा उठाते हुए फिर मारपीट की और गर्भपात गिराने की कोशिश की। बाद में वह मायके लौट आई। प्रसव का पूरा खर्च माता-पिता ने उठाया। ससुराल वालों को पता चला कि नवजात बोलने में असमर्थ है, तो उन्होंने स्वीकार करने से मना कर दिया। 2018 को महिला ने महिला पुलिस स्टेशन ऊना में शिकायत दर्ज कराई लेकिन उसी दिन पंचायत में समझौता हो गया। पति ने 2000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण देने का वादा किया।
बाद में वह बेटी के साथ ससुराल लौट आई। इस दौरान पति ने फिर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और मासिक गुजारा भत्ता बंद कर दिया। घर छोड़कर तलाक देने को कहा। 2020 में पति ने मां व बच्ची दोनों को पीटा। महिला कई कई दिन अस्पताल में भर्ती रही। छुट्टी मिलने पर वह मायके लौट आई। बाद में ससुराल वालों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वह स्वीकार नहीं करेंगे और तलाक चाहते हैं। इसके बाद से विवाहिता अपने पैतृक घर में रह रही है। बाद में महिला ने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिस पर फैसला ऊना के सीजेएम की अदालत में लंबित है। उसने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत एक याचिका भी दायर की, जिस पर अदालत में फैसला लगा हुआ है। पति ने भी तलाक की याचिका नवांशहर के पारिवारिक न्यायालय में लगाई है। महिला हमेशा पति के साथ रहना चाहती थी और अब भी चाहती है, हालांकि उसने बिना किसी कारण के उसे रखने से इंकार कर दिया। इसलिए उसने याचिका दायर की थी। शुक्रवार को अदालत ने महिला की याचिका स्वीकार कर ली। -संवाद
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2016 में हुई थी हरोली की युवती की नवांशहर में शादी, तलाक का मामला पंजाब के कोर्ट में लंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए दायर महिला की याचिका को अपर प्रधान न्यायाधीश द्वितीय व पारिवारिक न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। हरोली के गांव बाथरी निवासी महिला जसविंदर कौर ने याचिका में कहा था कि उसकी शादी 2016 में निर्मल सिंह पुत्र स्व. महिंदर सिंह निवासी श्री गुरु तेग बहादुर बंगा रोड नवांशहर पंजाब में हुई थी। शादी के दौरान परिवार ने पति और उसके रिश्तेदारों को ढेर सारे उपहार दिए थे। कुछ दिनों बाद ससुराल वालों ने दहेज को लेकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कई बार पिटाई की। बाद में तलाक की धमकी दी। जुलाई 2017 में वह गर्भवती हो गई। उस दौरान चिकित्सा सहायता और भरण-पोषण प्रदान नहीं किया। इससे स्वास्थ्य बिगड़ता गया। बाद में व्यथा दादा को बताई। दादा ससुराल आए और ससुराल वालों को उचित इलाज प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया लेकिन गर्भावस्था का फायदा उठाते हुए फिर मारपीट की और गर्भपात गिराने की कोशिश की। बाद में वह मायके लौट आई। प्रसव का पूरा खर्च माता-पिता ने उठाया। ससुराल वालों को पता चला कि नवजात बोलने में असमर्थ है, तो उन्होंने स्वीकार करने से मना कर दिया। 2018 को महिला ने महिला पुलिस स्टेशन ऊना में शिकायत दर्ज कराई लेकिन उसी दिन पंचायत में समझौता हो गया। पति ने 2000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण देने का वादा किया।
बाद में वह बेटी के साथ ससुराल लौट आई। इस दौरान पति ने फिर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और मासिक गुजारा भत्ता बंद कर दिया। घर छोड़कर तलाक देने को कहा। 2020 में पति ने मां व बच्ची दोनों को पीटा। महिला कई कई दिन अस्पताल में भर्ती रही। छुट्टी मिलने पर वह मायके लौट आई। बाद में ससुराल वालों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वह स्वीकार नहीं करेंगे और तलाक चाहते हैं। इसके बाद से विवाहिता अपने पैतृक घर में रह रही है। बाद में महिला ने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिस पर फैसला ऊना के सीजेएम की अदालत में लंबित है। उसने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत एक याचिका भी दायर की, जिस पर अदालत में फैसला लगा हुआ है। पति ने भी तलाक की याचिका नवांशहर के पारिवारिक न्यायालय में लगाई है। महिला हमेशा पति के साथ रहना चाहती थी और अब भी चाहती है, हालांकि उसने बिना किसी कारण के उसे रखने से इंकार कर दिया। इसलिए उसने याचिका दायर की थी। शुक्रवार को अदालत ने महिला की याचिका स्वीकार कर ली। -संवाद
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