{"_id":"66352c1419389184180265cc","slug":"wheat-sheaves-kept-in-the-fields-caught-fire-una-news-c-93-1-una1002-123314-2024-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: खेतों में रखी गेहूं की पराली को लगी आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: खेतों में रखी गेहूं की पराली को लगी आग
Fri, 03 May 2024 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 03 May 2024 11:55 PM IST
विज्ञापन
टाहलीवाल (ऊना)। टाहलीवाल संतोषगढ़ मार्ग पर स्वां नदी के किनारे बने बांध पर आग लगने से आसपास के वन क्षेत्र और पास के खेतों में गेहूं की पराली में भी आग लग गई। इस घटना की सूचना लगभग ढाई बजे अग्निशमन विभाग टाहलीवाल चौकी के प्रभारी सुनील दत्त को मिली।
सूचना मिलते ही प्रभारी सुनील दत्त अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन आग बड़े पैमाने पर फैल चुकी थी, जिससे उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आग लगने का कारण अभी तक नहीं पता चल सका है और शाम 6:30 बजे तक आग पर काबू पाने में विभाग को सफलता नहीं मिली थी। इस घटना से स्थानीय लोगों में चिंता और भय का माहौल है। आग के कारण पर्यावरण और स्थानीय किसानों को भी नुकसान पहुंचा है।
दूसरे मामले में नंगल खुर्द में भी गेहूं काटने के बाद बची पराली में भी आग लगने की घटना सामने आई है। दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया। देखा गया है कि कई किसान अपने खेतों में पड़ी पराली को नष्ट करने के लिए खुद आग लगा देते हैं, जिसका खामियाजा अन्य खेत मालिकों को भुगतना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूचना मिलते ही प्रभारी सुनील दत्त अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन आग बड़े पैमाने पर फैल चुकी थी, जिससे उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आग लगने का कारण अभी तक नहीं पता चल सका है और शाम 6:30 बजे तक आग पर काबू पाने में विभाग को सफलता नहीं मिली थी। इस घटना से स्थानीय लोगों में चिंता और भय का माहौल है। आग के कारण पर्यावरण और स्थानीय किसानों को भी नुकसान पहुंचा है।
विज्ञापन
दूसरे मामले में नंगल खुर्द में भी गेहूं काटने के बाद बची पराली में भी आग लगने की घटना सामने आई है। दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया। देखा गया है कि कई किसान अपने खेतों में पड़ी पराली को नष्ट करने के लिए खुद आग लगा देते हैं, जिसका खामियाजा अन्य खेत मालिकों को भुगतना पड़ता है।
विज्ञापन