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Una News: अंबोटा पंचायत के विभाजन पर प्रशासन के द्वार पहुंचे ग्रामीण
Sat, 28 Mar 2026 06:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 28 Mar 2026 06:56 AM IST
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ऊना। गगरेट उपमंडल की अंबोटा ग्राम पंचायत के प्रस्तावित विभाजन को लेकर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। लंबे समय से एकजुट सामाजिक संरचना के लिए जानी जाने वाली इस पंचायत को दो हिस्सों में बांटने के प्रशासनिक फैसले ने ग्रामीणों में असंतोष पैदा कर दिया है।
लोगों का आरोप है कि पंचायत का विभाजन संतुलित और न्यायसंगत तरीके से नहीं किया गया बल्कि इसमें जातीय आधार पर बंटवारे की झलक दिखाई देती है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय पहुंचा और एसडीएम के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करवाई।
प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे सतीश कुमार गोगी ने बताया कि पहले पंचायत को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव था जिसका विरोध होने के बाद अब इसे दो भागों में विभाजित किया जा रहा है।
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नया फार्मूला भी लोगों को स्वीकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विभाजन जातीय आधार पर किया गया है जिसमें सवर्ण वर्ग और दलित वर्ग को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का विभाजन सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नए परिसीमन में एक पंचायत में लगभग 5000 मतदाता रह जाएंगे जबकि दूसरी पंचायत में मात्र 1000 मतदाता होंगे जो पूरी तरह असंतुलित है। ग्रामीण होशियार सिंह का कहना है कि कई युवा विदेशों में कार्यरत हैं और उनके दस्तावेजों में स्थायी पता अंबोटा दर्ज है, ऐसे में नाम परिवर्तन से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायत का विभाजन आवश्यक होने पर अपार और लोअर अंबोटा के रूप में किया जा सकता था जिससे संतुलन और सामाजिक समरसता बनी रहती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
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लोगों का आरोप है कि पंचायत का विभाजन संतुलित और न्यायसंगत तरीके से नहीं किया गया बल्कि इसमें जातीय आधार पर बंटवारे की झलक दिखाई देती है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय पहुंचा और एसडीएम के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करवाई।
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प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे सतीश कुमार गोगी ने बताया कि पहले पंचायत को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव था जिसका विरोध होने के बाद अब इसे दो भागों में विभाजित किया जा रहा है।
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नया फार्मूला भी लोगों को स्वीकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विभाजन जातीय आधार पर किया गया है जिसमें सवर्ण वर्ग और दलित वर्ग को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का विभाजन सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नए परिसीमन में एक पंचायत में लगभग 5000 मतदाता रह जाएंगे जबकि दूसरी पंचायत में मात्र 1000 मतदाता होंगे जो पूरी तरह असंतुलित है। ग्रामीण होशियार सिंह का कहना है कि कई युवा विदेशों में कार्यरत हैं और उनके दस्तावेजों में स्थायी पता अंबोटा दर्ज है, ऐसे में नाम परिवर्तन से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायत का विभाजन आवश्यक होने पर अपार और लोअर अंबोटा के रूप में किया जा सकता था जिससे संतुलन और सामाजिक समरसता बनी रहती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।