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Una News: सुपर-100 योजना की राशि का मांगा उपयोगिता प्रमाणपत्र
Sat, 05 Sep 2026 12:48 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 05 Sep 2026 12:48 AM IST
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ऊना। स्वर्ण जयंती सुपर-100 योजना के तहत वर्ष 2020-21 और 2021-22 में विद्यार्थियों को जारी वित्तीय सहायता का अब पूरा हिसाब देना होगा। शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के संबंधित स्कूलों से विद्यार्थियों को जारी किस्तों के उपयोगिता प्रमाणपत्र और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड तलब किए हैं। विभाग ने इसे अत्यंत जरूरी बताते हुए निर्धारित समय में दस्तावेज उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
निदेशालय की ओर से सभी संबंधित उपनिदेशकों को निर्देश जारी कर कहा गया है कि वर्ष 2020-21 में वित्तीय सहायता लेने वाले विद्यार्थियों की ओर से खर्च की गई राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र लिए जाएं। वहीं वर्ष 2021-22 में विद्यार्थियों को जारी पहली, दूसरी और तीसरी किस्त से संबंधित पूरा रिकॉर्ड भी निर्धारित प्रारूप में जुटाकर जिला स्तर पर प्रस्तुत करना होगा। जिलों से यह रिकॉर्ड निदेशालय को एक सप्ताह के भीतर भेजने के निर्देश हैं।
ऊना के आठ स्कूलों को पांच दिन का समय
ऊना में उपनिदेशक उच्चतर शिक्षा कार्यालय ने भी जिले के आठ राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। इनमें बसदेहड़ा, धर्मसाल महंता, घनारी, बढेड़ा राजपूतां, बंगाणा, रपोह मिसरां, बहडाला और लठियाणी के स्कूल शामिल हैं। संबंधित प्रधानाचार्यों को निर्धारित प्रारूप में उपयोगिता प्रमाणपत्र और आवश्यक जानकारी पांच दिन के भीतर कार्यालय में जमा करवाने को कहा गया है।
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बिल और हाजिरी प्रमाणपत्र भी जरूरी
विभाग ने उपयोगिता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में मूल बिलों और कोचिंग की नियमित उपस्थिति का रिकॉर्ड भी अनिवार्य किया है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पहले जारी किस्त के मूल बिल और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा होने के बाद ही अगली किस्त जारी की जा सकती है। विद्यार्थियों को कोचिंग संस्थान से हर महीने का उपस्थिति प्रमाणपत्र स्कूल के प्रधानाचार्य के पास जमा करवाना होता है।
निर्धारित प्रारूप में विद्यार्थी को यह भी घोषित करना होगा कि उसने बताई गई राशि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया है, जिसके लिए वित्तीय सहायता जारी हुई थी। साथ ही किसी अन्य वित्तीय सहायता योजना, जैसे मेधा प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं लेने की पुष्टि भी करनी होगी। प्रधानाचार्य को विद्यार्थी की ओर से दिए गए विवरण, बिलों और कोचिंग उपस्थिति का सत्यापन करना होगा। इसके बाद उपनिदेशक स्तर पर भी उपयोगिता प्रमाणपत्र और संलग्न मूल बिलों का सत्यापन किया जाएगा।
उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल तक्खी ने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 और 2021-22 की सहायता से जुड़े मामलों में अब उपयोगिता प्रमाणपत्र मांगे जाने के बाद संबंधित स्कूलों को विद्यार्थियों से रिकॉर्ड जुटाकर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। निदेशालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को समय सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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निदेशालय की ओर से सभी संबंधित उपनिदेशकों को निर्देश जारी कर कहा गया है कि वर्ष 2020-21 में वित्तीय सहायता लेने वाले विद्यार्थियों की ओर से खर्च की गई राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र लिए जाएं। वहीं वर्ष 2021-22 में विद्यार्थियों को जारी पहली, दूसरी और तीसरी किस्त से संबंधित पूरा रिकॉर्ड भी निर्धारित प्रारूप में जुटाकर जिला स्तर पर प्रस्तुत करना होगा। जिलों से यह रिकॉर्ड निदेशालय को एक सप्ताह के भीतर भेजने के निर्देश हैं।
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ऊना के आठ स्कूलों को पांच दिन का समय
ऊना में उपनिदेशक उच्चतर शिक्षा कार्यालय ने भी जिले के आठ राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। इनमें बसदेहड़ा, धर्मसाल महंता, घनारी, बढेड़ा राजपूतां, बंगाणा, रपोह मिसरां, बहडाला और लठियाणी के स्कूल शामिल हैं। संबंधित प्रधानाचार्यों को निर्धारित प्रारूप में उपयोगिता प्रमाणपत्र और आवश्यक जानकारी पांच दिन के भीतर कार्यालय में जमा करवाने को कहा गया है।
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बिल और हाजिरी प्रमाणपत्र भी जरूरी
विभाग ने उपयोगिता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में मूल बिलों और कोचिंग की नियमित उपस्थिति का रिकॉर्ड भी अनिवार्य किया है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पहले जारी किस्त के मूल बिल और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा होने के बाद ही अगली किस्त जारी की जा सकती है। विद्यार्थियों को कोचिंग संस्थान से हर महीने का उपस्थिति प्रमाणपत्र स्कूल के प्रधानाचार्य के पास जमा करवाना होता है।
निर्धारित प्रारूप में विद्यार्थी को यह भी घोषित करना होगा कि उसने बताई गई राशि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया है, जिसके लिए वित्तीय सहायता जारी हुई थी। साथ ही किसी अन्य वित्तीय सहायता योजना, जैसे मेधा प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं लेने की पुष्टि भी करनी होगी। प्रधानाचार्य को विद्यार्थी की ओर से दिए गए विवरण, बिलों और कोचिंग उपस्थिति का सत्यापन करना होगा। इसके बाद उपनिदेशक स्तर पर भी उपयोगिता प्रमाणपत्र और संलग्न मूल बिलों का सत्यापन किया जाएगा।
उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल तक्खी ने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 और 2021-22 की सहायता से जुड़े मामलों में अब उपयोगिता प्रमाणपत्र मांगे जाने के बाद संबंधित स्कूलों को विद्यार्थियों से रिकॉर्ड जुटाकर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। निदेशालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को समय सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।