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Una News: दो स्टोन क्रशर खुले पर राहत अधूरी, एक को बिजली का इंतजार, दूसरे के दस्तावेज पूरे नहीं
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ऊना। आपदा के बाद बंद किए गए जिले के दो स्टोन क्रशरों को खोलने की मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन लोगों के लिए यह राहत अधूरी है। इसका कारण एक क्रशर में बिजली का कनेक्शन कटना और दूसरे में खनन विभाग की औपचारिकताएं पूरी न कर पाना है। जिले में 20 के करीब स्टोन क्रशर हैं, इनमें दो को बंद किया गया था। जबकि बाकी स्टोन क्रशर चालू थे। बंद किए गए क्रशर में एक मरवाड़ी और दूसरा दौलतपुर चौक में स्थित है। इनमें के मरवाड़ी में स्थित स्टोन क्रशर प्रबंधन को बिजली बोर्ड की ओर से काटे गए विद्युत कनेक्शन को दोबारा बहाल किए जाने का इंतजार है।
वहीं, दौलतपुर चौक में स्थित स्टोन क्रशर को सरकार की ओर से खोलने की मंजूरी मिल चुकी, लेकिन उससे जुड़े दस्तावेजों की औपचारिकता अभी अधूरी है। जिसे पूरा किए जाने के बाद ही खोला जाएगा। मरवाड़ी पर फैसले से स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है।
घटेगा बोझ, मिलेगी राहत
क्षेत्र के निवासी अजय कुमार, राकेश कुमार, बलबीर चंद, सतीश कुमार, नीलम कुमारी, सिद्धांत शर्मा ने कहा कि क्रशर बंद होने से रेत बजरी 1,000 से 1,500 रुपये तक महंगी मिल रही थी। एक ट्राली रेत बजरी पहले 1,500 रुपये मिलती थी, लेकिन अब करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित क्रशर से सामान लाना पड़ रहा है। जिसका किराया 1,000 से 1,500 रुपये तक पड़ जाता है। इससे रेत और बजरी के लिए उन्हें दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही थी। सरकार के नए आदेशों ने राहत दी है। उम्मीद है कि जल्द क्रशर संचालित होंगे, जिससे निर्माण कार्यों में खर्च हो रही अतिरिक्त राशि का बोझ घटेगा।
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दो स्टोन क्रशर दोबारा संचालित करने को लेकर खनन विभाग की ओर से हमें सूचना दी गई है, लेकिन अभी स्टोन क्रशर संचालकों की ओर से विद्युत कनेक्शन बहाल करने के लिए कोई आवेदन नहीं आया है। इसके साथ स्टोन क्रशरों से पुराने देय भुगतान को लेकर भी औपचारिकता पूरी करवाने के बाद उन्हें तुरंत कनेक्शन दे दिए जाएंगे।
मंगल चौधरी, सहायक अभियंता, विद्युत उपमंडल दौलतपुर चौक
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वहीं, दौलतपुर चौक में स्थित स्टोन क्रशर को सरकार की ओर से खोलने की मंजूरी मिल चुकी, लेकिन उससे जुड़े दस्तावेजों की औपचारिकता अभी अधूरी है। जिसे पूरा किए जाने के बाद ही खोला जाएगा। मरवाड़ी पर फैसले से स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है।
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घटेगा बोझ, मिलेगी राहत
क्षेत्र के निवासी अजय कुमार, राकेश कुमार, बलबीर चंद, सतीश कुमार, नीलम कुमारी, सिद्धांत शर्मा ने कहा कि क्रशर बंद होने से रेत बजरी 1,000 से 1,500 रुपये तक महंगी मिल रही थी। एक ट्राली रेत बजरी पहले 1,500 रुपये मिलती थी, लेकिन अब करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित क्रशर से सामान लाना पड़ रहा है। जिसका किराया 1,000 से 1,500 रुपये तक पड़ जाता है। इससे रेत और बजरी के लिए उन्हें दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही थी। सरकार के नए आदेशों ने राहत दी है। उम्मीद है कि जल्द क्रशर संचालित होंगे, जिससे निर्माण कार्यों में खर्च हो रही अतिरिक्त राशि का बोझ घटेगा।
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दो स्टोन क्रशर दोबारा संचालित करने को लेकर खनन विभाग की ओर से हमें सूचना दी गई है, लेकिन अभी स्टोन क्रशर संचालकों की ओर से विद्युत कनेक्शन बहाल करने के लिए कोई आवेदन नहीं आया है। इसके साथ स्टोन क्रशरों से पुराने देय भुगतान को लेकर भी औपचारिकता पूरी करवाने के बाद उन्हें तुरंत कनेक्शन दे दिए जाएंगे।
मंगल चौधरी, सहायक अभियंता, विद्युत उपमंडल दौलतपुर चौक