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Una News: बाजारों में छाया सन्नाटा, गेहूं समेटने में जुटे लोग
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मंदी ने उड़ाई दुकानदारों की नींद, दिनभर सुनसान रहे बाजार
विजय कपिला
बड़ूही (ऊना)। बड़ूही समेत साथ लगते बाजारों में आजकल सन्नाटा है। ग्राहकों की चहल-पहल कम है। दुकानदारों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण गेहूं की फसल की कटाई है। लोग इन दिनों अपने खेतों में गेहूं की कटाई और भंडारण के काम में व्यस्त हैं। गर्मी और खेतों के काम के चलते अधिकतर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोग बाजारों का रुख नहीं कर पा रहे। सुबह से शाम तक बाजारों में इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आते हैं। इससे दुकानदारों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि कई दुकानदार दिनभर खाली बैठे रहते हैं। अधिकतर दुकानदार या तो सोये हुए होते हैं या कुछ मोबाइल पर अपना समय व्यतीत कर रहे होते हैं और बिक्री न के बराबर है।
स्थानीय व्यापार मंडल प्रधान नरेंद्र शर्मा का कहना है कि यह समय वैसे भी बाजारों के लिए थोड़ा ठंडा होता है। इस बार हालात सामान्य से भी ज्यादा खराब हैं। पहले जहां एक दिन में दर्जनों ग्राहक आते थे, अब वहां 3-4 ग्राहक भी मुश्किल से पहुंच रहे हैं। इससे कई छोटे दुकानदारों की रोजमर्रा की आय भी प्रभावित हो रही है। गेहूं की फसल पक चुकी है और कटाई का समय चल रहा है। ऐसे में गांवों के अधिकांश परिवार अपने खेतों में लगे हुए हैं। खाद्यान्न भंडारण और ट्रैक्टर-ट्रॉली की आवाजाही इन दिनों गांवों में आम हो गई है। लोग खरीदारी टाल रहे हैं और केवल जरूरी वस्तुओं पर ही ध्यान दे रहे हैं।
अगले माह जब गेहूं की कटाई और भंडारण का काम पूरा हो जाएगा, तब बाजारों में फिर से रौनक लौट सकती है। फिलहाल दुकानदारों को इस मंदी के दौर में धैर्य बनाए रखना पड़ रहा है। -बड़ूही के व्यापारी विपन चौधरी
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इस समय शादियों का भी सीजन नहीं हैं और अन्य किसी प्रकार के कार्यक्रम बहुत कम हो रहे। इसलिए बाजारों में रौनक कम और बिक्री 10 प्रतिशत रह गई है। -बड़ूही के दुकानदार अश्वनी चौधरी
कोरोना काल के बाद प्रत्येक गांव में छोटी-छोटी दुकानें खुल गईं। लोगों को हर जरूरत का सामान घर के पास ही उपलब्ध हो रहा। इस लिए लोग बाजारों में कम आ रहे। दूसरा बड़े-बड़े मार्ट खुल गए। उनकी ओर लोग रुख कर रहे। फेरी वाले रोजाना बड़ी मात्रा में सामान घर-घर बेच रहे हैं। दुकानदार करें भी तो क्या। -चुरूड़ू के दुकानदार संजय कुमार
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विजय कपिला
बड़ूही (ऊना)। बड़ूही समेत साथ लगते बाजारों में आजकल सन्नाटा है। ग्राहकों की चहल-पहल कम है। दुकानदारों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण गेहूं की फसल की कटाई है। लोग इन दिनों अपने खेतों में गेहूं की कटाई और भंडारण के काम में व्यस्त हैं। गर्मी और खेतों के काम के चलते अधिकतर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोग बाजारों का रुख नहीं कर पा रहे। सुबह से शाम तक बाजारों में इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आते हैं। इससे दुकानदारों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि कई दुकानदार दिनभर खाली बैठे रहते हैं। अधिकतर दुकानदार या तो सोये हुए होते हैं या कुछ मोबाइल पर अपना समय व्यतीत कर रहे होते हैं और बिक्री न के बराबर है।
स्थानीय व्यापार मंडल प्रधान नरेंद्र शर्मा का कहना है कि यह समय वैसे भी बाजारों के लिए थोड़ा ठंडा होता है। इस बार हालात सामान्य से भी ज्यादा खराब हैं। पहले जहां एक दिन में दर्जनों ग्राहक आते थे, अब वहां 3-4 ग्राहक भी मुश्किल से पहुंच रहे हैं। इससे कई छोटे दुकानदारों की रोजमर्रा की आय भी प्रभावित हो रही है। गेहूं की फसल पक चुकी है और कटाई का समय चल रहा है। ऐसे में गांवों के अधिकांश परिवार अपने खेतों में लगे हुए हैं। खाद्यान्न भंडारण और ट्रैक्टर-ट्रॉली की आवाजाही इन दिनों गांवों में आम हो गई है। लोग खरीदारी टाल रहे हैं और केवल जरूरी वस्तुओं पर ही ध्यान दे रहे हैं।
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अगले माह जब गेहूं की कटाई और भंडारण का काम पूरा हो जाएगा, तब बाजारों में फिर से रौनक लौट सकती है। फिलहाल दुकानदारों को इस मंदी के दौर में धैर्य बनाए रखना पड़ रहा है। -बड़ूही के व्यापारी विपन चौधरी
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इस समय शादियों का भी सीजन नहीं हैं और अन्य किसी प्रकार के कार्यक्रम बहुत कम हो रहे। इसलिए बाजारों में रौनक कम और बिक्री 10 प्रतिशत रह गई है। -बड़ूही के दुकानदार अश्वनी चौधरी
कोरोना काल के बाद प्रत्येक गांव में छोटी-छोटी दुकानें खुल गईं। लोगों को हर जरूरत का सामान घर के पास ही उपलब्ध हो रहा। इस लिए लोग बाजारों में कम आ रहे। दूसरा बड़े-बड़े मार्ट खुल गए। उनकी ओर लोग रुख कर रहे। फेरी वाले रोजाना बड़ी मात्रा में सामान घर-घर बेच रहे हैं। दुकानदार करें भी तो क्या। -चुरूड़ू के दुकानदार संजय कुमार