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Una News: क्षेत्रीय अस्पताल में न रेडियोलाॅजिस्ट न ही यूरोलॉजिस्ट
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निजी स्तर पर मरीज महंगा उपचार करवाने के लिए मजबूर
गर्भवती महिलाओं को निशुल्क टेस्ट सुविधा का नहीं मिल रहा लाभ
समय के साथ विशेष सुविधाएं में नहीं हो पाई बढ़ोतरी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में समय के साथ विशेषज्ञ सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार नहीं हो पा रहा है। सरकारों की तरफ से जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए वादे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। आलम यह है कि जिले के क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रसाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मशीन धूल फांक रही है। सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को निशुल्क टेस्ट की सुविधा का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा यूरोलाॅजिस्ट की तैनाती भी अस्पताल में नहीं हो पाई है। ऐसे में आम जनता को निजी लैब और अस्पतालों में जाकर जांच और उपचार करवाना पड़ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना औसतन 600 से ऊपर मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर वरिष्ठ नागरिकों को यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाने की आवश्यकता पड़ती है लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ की सुविधा न होने से निजी अस्पतालों में उपचार करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ रेडियोलाॅजिस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं व अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों प्रेम लाल, गुरवचन सिंह, तरसेम लाल, महेंद्र कुमार, राम मूर्ति शर्मा, अनीता देवी, महेश कुमार आदि का कहना है कि बढ़ती उम्र में बुजुर्गों को अक्सर यूरोलाॅजी से संबंधित समस्याएं होती हैं। ऐसे में जिले में सरकारी स्तर पर इसकी कोई सुविधा नहीं है। पीजीआई चंडीगढ़ में जाना पड़ता है। वहां भी कड़ी मशक्कत और कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उपचार नहीं मिल पाता है। विभाग को चाहिए कि समय के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार किया जाए ताकि लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। दूसरी तरफ अल्ट्रसाउंड जैसी मूलभूत सुविधा भी क्षेत्रीय अस्पताल में विशेषज्ञ न होने से बंद पड़ी हैं। इससे आम जन को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कोट्स
वर्तमान में मेडिकल कॉलेजों में ही यूरोलॉजिस्ट की सुविधा मिलती है। जहां तक क्षेत्रीय अस्पताल में अल्ट्रसाउंड सुविधा की बात है तो विशेषज्ञ की तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। तैनाती विभाग के स्तर पर ही होती है।
- डॉ. संजय मनकोटिया, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल ऊना
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गर्भवती महिलाओं को निशुल्क टेस्ट सुविधा का नहीं मिल रहा लाभ
समय के साथ विशेष सुविधाएं में नहीं हो पाई बढ़ोतरी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में समय के साथ विशेषज्ञ सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार नहीं हो पा रहा है। सरकारों की तरफ से जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए वादे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। आलम यह है कि जिले के क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रसाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मशीन धूल फांक रही है। सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को निशुल्क टेस्ट की सुविधा का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा यूरोलाॅजिस्ट की तैनाती भी अस्पताल में नहीं हो पाई है। ऐसे में आम जनता को निजी लैब और अस्पतालों में जाकर जांच और उपचार करवाना पड़ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना औसतन 600 से ऊपर मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर वरिष्ठ नागरिकों को यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाने की आवश्यकता पड़ती है लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ की सुविधा न होने से निजी अस्पतालों में उपचार करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ रेडियोलाॅजिस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं व अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों प्रेम लाल, गुरवचन सिंह, तरसेम लाल, महेंद्र कुमार, राम मूर्ति शर्मा, अनीता देवी, महेश कुमार आदि का कहना है कि बढ़ती उम्र में बुजुर्गों को अक्सर यूरोलाॅजी से संबंधित समस्याएं होती हैं। ऐसे में जिले में सरकारी स्तर पर इसकी कोई सुविधा नहीं है। पीजीआई चंडीगढ़ में जाना पड़ता है। वहां भी कड़ी मशक्कत और कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उपचार नहीं मिल पाता है। विभाग को चाहिए कि समय के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार किया जाए ताकि लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। दूसरी तरफ अल्ट्रसाउंड जैसी मूलभूत सुविधा भी क्षेत्रीय अस्पताल में विशेषज्ञ न होने से बंद पड़ी हैं। इससे आम जन को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कोट्स
वर्तमान में मेडिकल कॉलेजों में ही यूरोलॉजिस्ट की सुविधा मिलती है। जहां तक क्षेत्रीय अस्पताल में अल्ट्रसाउंड सुविधा की बात है तो विशेषज्ञ की तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। तैनाती विभाग के स्तर पर ही होती है।
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- डॉ. संजय मनकोटिया, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल ऊना