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Una News: अधिकारी की सूरत मृतक बेटे से मिलती देख बिलख पड़ी मां
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मां की पीड़ा को महसूस कर अधिकारी ने लगाया गले, फूट-फूट कर रो पड़ी बुजुर्ग महिला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। अब तक तो फिल्मों में हमशक्लों को देखा गया था, लेकिन मंडी उपायुक्त कार्यालय में यह प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिला। यहां सुंदरनगर क्षेत्र के जंगमबाग की बुजुर्ग महिला भोमा देवी किसी काम से उपायुक्त अपूर्व देवगन से मिलने उनके कार्यालय पहुंची। कमरे में प्रवेश करते ही वह स्तब्ध रह गई। उपायुक्त की शक्ल उसके मृतक बेटे राहुल मंडयाल से हू-ब-हू मिल रही थी।
सितंबर 2025 में सुंदरनगर उपमंडल के जंगमबाग में भूस्खलन में उनका जवान बेटा, जो कांग्रेस नेता भी था, मौत की आगोश में समा गया था। उपायुक्त को देखते ही महिला को ऐसा लगा जैसे उसके सामने उसका बेटा बैठा हो। वह सिसकते हुए उपायुक्त के पास गई और बेटे जैसी उनकी शक्ल देखकर बिलख पड़ी। महिला के दर्द को महसूस करते हुए उपायुक्त ने उन्हें संभाला और ढांढस बंधाया। अपनापन देख महिला ने उन्हें बेटे की तरह गले लगाया और थपथपाया। भावुक माहौल में वहां मौजूद सभी लोग भी आंसू रोक नहीं पाए। उपायुक्त ने महिला को कुर्सी पर बिठाया और उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनके आंसू रुक नहीं सके। उपायुक्त भी भावुक हो गए और कहा कि मैं हूं न। इस घटना से पता चलता है कि दुनिया में एक जैसी शक्ल के लोग भी होते हैं। अफसरशाही के सामने कभी-कभी एक अधिकारी भी ‘बेटा’ बन सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। अब तक तो फिल्मों में हमशक्लों को देखा गया था, लेकिन मंडी उपायुक्त कार्यालय में यह प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिला। यहां सुंदरनगर क्षेत्र के जंगमबाग की बुजुर्ग महिला भोमा देवी किसी काम से उपायुक्त अपूर्व देवगन से मिलने उनके कार्यालय पहुंची। कमरे में प्रवेश करते ही वह स्तब्ध रह गई। उपायुक्त की शक्ल उसके मृतक बेटे राहुल मंडयाल से हू-ब-हू मिल रही थी।
सितंबर 2025 में सुंदरनगर उपमंडल के जंगमबाग में भूस्खलन में उनका जवान बेटा, जो कांग्रेस नेता भी था, मौत की आगोश में समा गया था। उपायुक्त को देखते ही महिला को ऐसा लगा जैसे उसके सामने उसका बेटा बैठा हो। वह सिसकते हुए उपायुक्त के पास गई और बेटे जैसी उनकी शक्ल देखकर बिलख पड़ी। महिला के दर्द को महसूस करते हुए उपायुक्त ने उन्हें संभाला और ढांढस बंधाया। अपनापन देख महिला ने उन्हें बेटे की तरह गले लगाया और थपथपाया। भावुक माहौल में वहां मौजूद सभी लोग भी आंसू रोक नहीं पाए। उपायुक्त ने महिला को कुर्सी पर बिठाया और उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनके आंसू रुक नहीं सके। उपायुक्त भी भावुक हो गए और कहा कि मैं हूं न। इस घटना से पता चलता है कि दुनिया में एक जैसी शक्ल के लोग भी होते हैं। अफसरशाही के सामने कभी-कभी एक अधिकारी भी ‘बेटा’ बन सकता है।
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