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Una News: 1949 की ऐतिहासिक जलापूर्ति योजना अब बनेगी वाटर सप्लाई हेरिटेज म्यूजियम

Sat, 31 Oct 2026 12:36 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sat, 31 Oct 2026 12:36 AM IST
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The historic 1949 water supply scheme will now become a Water Supply Heritage Museum.
ऊना। कभी बीत क्षेत्र के 31 गांवों की प्यास बुझाने वाली 77 साल पुरानी जलापूर्ति योजना अब इतिहास के पन्नों से निकलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत का जीवंत केंद्र बनेगी। वर्ष 1949 में स्थापित टाहलीवाल के ऐतिहासिक लाजपत राय वाटर वर्क्स परिसर को वाटर सप्लाई हेरिटेज म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शुक्रवार को इसके निर्माण कार्य की आधारशिला रखी।
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तीन करोड़ 30 लाख 29 हजार रुपये की लागत से टाहलीवाल की पुरानी जलापूर्ति योजना के हेरिटेज ढांचे के संरक्षण कार्य, नए पंप हाउस के निर्माण, चहारदीवारी तथा जल शक्ति विभाग की योजना परिसर में नाली का निर्माण किया जाएगा। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने परिसर का निरीक्षण कर इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण एवं विकास की योजना का जायजा भी लिया।
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इस परियोजना के तहत पुराने पंप हाउस, विंटेज पंपिंग मशीनरी और तत्कालीन जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी विरासत को पुनर्संरक्षित कर प्रदर्शित किया जाएगा।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक परिसर की खासियत यह है कि यहां पुराना पंप हाउस और उस दौर की मशीनरी आज भी सुरक्षित है। अब इन्हें सहेजकर आम लोगों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। म्यूजियम बनने के बाद यह परिसर न केवल प्रदेश में पेयजल व्यवस्था के विकास की ऐतिहासिक यात्रा का साक्षी बनेगा, बल्कि विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण अध्ययन एवं आकर्षण का केंद्र बनेगा।

बता दें कि लाजपत राय वाटर वर्क्स का उद्घाटन 6 दिसंबर 1949 को तत्कालीन पूर्वी पंजाब के राज्यपाल सर चंदूलाल एम त्रिवेदी ने किया था। उस दौर में यह योजना बीत क्षेत्र के 31 गांवों की करीब 20 हजार आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। उस समय इंग्लैंड से मंगवाए गए 156 हॉर्स पावर क्षमता के दो रस्टन डीजल इंजन यहां स्थापित किए गए थे। इन्हीं इंजनों के माध्यम से वर्ष 1974 तक क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की जाती रही।
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