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Una News: परिवार को बलिदानी के नाम गांव में गेट, पार्क बनने का इंतजार

Tue, 28 Jan 2025 07:03 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 28 Jan 2025 07:03 AM IST
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The family is waiting for the gate and park to be built in the village in the name of sacrifice.
शहीद दिलवर खान। फाइल फोटो
पिता कर्मदीन ने कहा- कीर्ति चक्र के लिए बेटे पर नाज, सिर फख्र से ऊंचा हुआ
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मां ने कहा, बहादुर बेटे के नाम पर बने गांव में गेट और पार्क, स्कूल का नाम भी दिलवर खान से शुरू हो

सतीश शर्मा

नारी (ऊना)। जिला के बंगाणा के घरवासड़ा गांव के बलिदानी नायक दिलवर खान को अदम्य साहस और वीरता की गाथा पूरा देश जान गया। कैसे उन्होंने दो आतंकियों को मौत के घाट उतारा और तीसरे को जख्मी कर दिया। इसी दौरान घात लगाकर बैठे एक आतंकी ने उन पर गोली चलाई, जिससे वे बलिदान हो गए। उनकी बहादुरी पर भारत सरकार ने मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। राष्ट्रीय राइफल्स की 28वीं बटालियन की आर्टलरी रेजिमेंट में तैनात नायक दिलवर खान के घर में उनके बुजुर्ग माता-पिता, एक बेटा और पत्नी रहते हैं। परिवार को आज भी अपने बहादुर बेटे के नाम पर गांव में गेट व पार्क और स्कूल का नाम उसके नाम पर रखने का इंतजार है।
पिता कर्मदीन (70) बताते हैं कि उनके परिवार ने बहुत गरीबी देखी। मुफलिसी के बीच उन्होंने अपने दो बेटों और एक बेटी का पालन पोषण किया। कहा कि बड़े बेटे की शादी होने के बाद वह परिवार से अलग रहने लगा, जबकि दिलवर खान ने कड़ी मेहनत कर साल 2014 की 20 दिसंबर को भारतीय सेना में सेवा हासिल कर लीं। उन्होंने कहा कि बेटे के सेना में जाने पर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। इसके साथ परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
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उन्होंने बताया कि दिलवर खान चीन की सेना की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली बंदूकों के बारे में सेना के जवानों को ट्रेनिंग भी देते थे। जब दिलवर का शव घर पहुंचा तो 52 जवान अंतिम संस्कार में पहुंचे और 21 तोपों की सलामी भी दी गई। कहा कि बेटे का अचानक देश सेवा करते हुए बलिदान होना परिवार के लिए बड़ा झटका है, लेकिन देश की रक्षा में प्राण त्याग हर किसी के भाग्य में नहीं। इसलिए बेटे के बलिदान ने उनका सिर फख्र से ऊंचा कर दिया। कर्मवीर ने बताया कि दिलवर खान की पेंशन राशि का लाभ अभी मिलना शुरू नहीं हुआ। परंतु अन्य राशि मिली है। जिससे हमारा जीवन यापन चल रहा है।
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दिलवर खान की मां भोला बीबी ने कहा कि बेटे के बलिदान पर प्रदेश सरकार ने उसके नाम पर एक पार्क घोषित किया, लेकिन उस पर अभी कार्रवाई नहीं हुई। गांव में एक गेट भी उनके बेटे के नाम पर बनाया जाए। गांव के राजकीय उच्च पाठशाला का नाम भी उनके बेटे के नाम पर हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह जान पाएं कि उनकी मिट्टी ने देश को एक बहादुर जवान दिया है।

बता दें कि 23 जुलाई 2024 को देर रात कुपवाड़ा जिले की लोलाब घाटी के घने जंगलों में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान दिलवर खान ने दो आतंकियों को मौत के घाट उतारा। जब उन्होंने तीसरे आतंकी पर हमला किया तो घात लगाकर बैठे अन्य आतंकी ने उन पर गोली चला दी, लेकिन घायल हालत में भी उन्होंने आतंकियों से मुकाबला जारी रखा। इस मुठभेड़ में उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराने और एक को घायल करने के साथ अपने चार अन्य साथियों की जान भी बचाई। जिसके लिए उन्हें भारत सरकार ने कीर्ति चक्र से नवाजा है।

शहीद दिलवर खान। फाइल फोटो

शहीद दिलवर खान। फाइल फोटो

शहीद दिलवर खान। फाइल फोटो

शहीद दिलवर खान। फाइल फोटो

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