{"_id":"661d903bbdd38d8c2b0f9a5c","slug":"the-department-did-not-take-care-of-the-dinghs-of-dhamandari-bridge-which-were-washed-away-two-and-a-half-decades-ago-una-news-c-93-1-una1002-122049-2024-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: ढाई दशक पूर्व बहे धमांदरी पुल के डंगों की विभाग ने नहीं ली सुध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: ढाई दशक पूर्व बहे धमांदरी पुल के डंगों की विभाग ने नहीं ली सुध
Tue, 16 Apr 2024 02:08 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 16 Apr 2024 02:08 AM IST
विज्ञापन
15 गांव की 35000 आबादी को जोड़ता है 200 मीटर लंबा पुल
मरम्मत नहीं हुई तो बरसात में आएगा खतरे की जद में
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नारी (ऊना)। लगभग ढाई दशक पहले निर्मित हुए 200 मीटर लंबे धमांदरी पुल को पिछले दिनों आई बाढ़ से खतरा पैदा हो गया है। बाढ़ से पुल के साथ लगे क्रेट वॉल और डंगे बह गए हैं। लोक निर्माण विभाग भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। यही वजह है कि अब स्थानीय ग्रामीण चिंतित हैं, क्योंकि यह पुल लगभग 15 गांवों की आवाजाही के लिए है और 35000 की आबादी को आपस में जोड़ता है।
बताया जा रहा है कि करीब 3 वर्ष पूर्व पहले पुल की बुनियाद को मजबूती देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने गहरी नींव खोदकर पुल के साथ 10 मीटर चौड़े और लगभग 15 फीट ऊंचे क्रेट वाल लगवाए थे, ताकि पुल को मजबूती मिल सके। अब यह क्रेट वाल पिछले दिनों आई बाढ़ से बह गए हैं, जिनका कोई नामो निशान नहीं है। केवल नींव ही दिखाई दे रही है। खड्ड में कहीं-कहीं इसकी बह चुकी तारें अब भी घास फूस में फंसी हुई नजर आती हैं। यदि ऐसा ही हाल रहा तो आने वाली बरसात में पुल धराशाई हो सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों में ग्राम पंचायत प्रधान सुनीता देवी, सदस्य अमरनाथ, विष्णु कुमार, बलराम, नरेश कुमार, अनु बाला, रामपाल, बलविंदर सिंह, बालकृष्ण, सुरेश कुमार, शीला देवी और धर्म सिंह का कहना है कि यदि इसी तरह की एक और बाढ़ आई तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे धमांदरी, डठवाडा, सतलेटा, कुहडू, पलिया, सतोत्थर, अंबेडा, जोल, चौकी मीनार, बड़साला, टकोली के साथ भी जनता का लिंक टूट जाएगा। पुल लगभग 15 गांवों की आबादी को जोड़ता है। यदि वैकल्पिक मार्ग पर आना-जाना हो तो 12 किलोमीटर का चक्कर लगाकर गांव तियूडी में मुख्य सड़क पर रास्ता मिलता है। पुल के पास कई फैक्ट्रियां तथा अन्य लोगों पर भी असर पड़ेगा। इसके अलावा धमांदरी में बाजार जहां 200 दुकाने हैं, इनका रोजगार भी ठप हो जाएगा। ग्रामीणों ने विभाग और सरकार से मांग की है कि पुल के खतरे को देखते हुए मरम्मत का कार्य शुरू किया जाए।
विज्ञापन
प्रस्ताव भेजा है, विभाग से दोबारा बात करेंगे : पंचायत प्रधान
प्रधान ग्राम पंचायत सुनीता देवी का कहना है कि मामला गंभीर है। पंचायत की तरफ से भी प्रस्ताव डालकर पहले भेजा गया है। विभाग से इस संबंध में दोबारा बात करेंगे।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ई. जीएस राणा का कहना है कि मामला विभाग के संज्ञान में है। बजट का प्रावधान होते ही तुरंत काम शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री से बजट के लिए कहा था, नहीं मिला : भुट्टो
पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुटटो का कहना है कि बड़साला और धमांदरी पुल का दो बार दौरा किया है। दोनों का एस्टीमेट बनाकर भी विभाग को भेजा गया है और उनकी पूरी मरम्मत करवाने के लिए मुख्यमंत्री से बजट का प्रावधान करने के लिए कहा गया था, परंतु बार-बार कहे जाने पर भी आज तक बजट का प्रावधान नहीं किया गया।
सचित्र
विज्ञापन
मरम्मत नहीं हुई तो बरसात में आएगा खतरे की जद में
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नारी (ऊना)। लगभग ढाई दशक पहले निर्मित हुए 200 मीटर लंबे धमांदरी पुल को पिछले दिनों आई बाढ़ से खतरा पैदा हो गया है। बाढ़ से पुल के साथ लगे क्रेट वॉल और डंगे बह गए हैं। लोक निर्माण विभाग भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। यही वजह है कि अब स्थानीय ग्रामीण चिंतित हैं, क्योंकि यह पुल लगभग 15 गांवों की आवाजाही के लिए है और 35000 की आबादी को आपस में जोड़ता है।
बताया जा रहा है कि करीब 3 वर्ष पूर्व पहले पुल की बुनियाद को मजबूती देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने गहरी नींव खोदकर पुल के साथ 10 मीटर चौड़े और लगभग 15 फीट ऊंचे क्रेट वाल लगवाए थे, ताकि पुल को मजबूती मिल सके। अब यह क्रेट वाल पिछले दिनों आई बाढ़ से बह गए हैं, जिनका कोई नामो निशान नहीं है। केवल नींव ही दिखाई दे रही है। खड्ड में कहीं-कहीं इसकी बह चुकी तारें अब भी घास फूस में फंसी हुई नजर आती हैं। यदि ऐसा ही हाल रहा तो आने वाली बरसात में पुल धराशाई हो सकता है।
विज्ञापन
स्थानीय ग्रामीणों में ग्राम पंचायत प्रधान सुनीता देवी, सदस्य अमरनाथ, विष्णु कुमार, बलराम, नरेश कुमार, अनु बाला, रामपाल, बलविंदर सिंह, बालकृष्ण, सुरेश कुमार, शीला देवी और धर्म सिंह का कहना है कि यदि इसी तरह की एक और बाढ़ आई तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे धमांदरी, डठवाडा, सतलेटा, कुहडू, पलिया, सतोत्थर, अंबेडा, जोल, चौकी मीनार, बड़साला, टकोली के साथ भी जनता का लिंक टूट जाएगा। पुल लगभग 15 गांवों की आबादी को जोड़ता है। यदि वैकल्पिक मार्ग पर आना-जाना हो तो 12 किलोमीटर का चक्कर लगाकर गांव तियूडी में मुख्य सड़क पर रास्ता मिलता है। पुल के पास कई फैक्ट्रियां तथा अन्य लोगों पर भी असर पड़ेगा। इसके अलावा धमांदरी में बाजार जहां 200 दुकाने हैं, इनका रोजगार भी ठप हो जाएगा। ग्रामीणों ने विभाग और सरकार से मांग की है कि पुल के खतरे को देखते हुए मरम्मत का कार्य शुरू किया जाए।
विज्ञापन
प्रस्ताव भेजा है, विभाग से दोबारा बात करेंगे : पंचायत प्रधान
प्रधान ग्राम पंचायत सुनीता देवी का कहना है कि मामला गंभीर है। पंचायत की तरफ से भी प्रस्ताव डालकर पहले भेजा गया है। विभाग से इस संबंध में दोबारा बात करेंगे।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ई. जीएस राणा का कहना है कि मामला विभाग के संज्ञान में है। बजट का प्रावधान होते ही तुरंत काम शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री से बजट के लिए कहा था, नहीं मिला : भुट्टो
पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुटटो का कहना है कि बड़साला और धमांदरी पुल का दो बार दौरा किया है। दोनों का एस्टीमेट बनाकर भी विभाग को भेजा गया है और उनकी पूरी मरम्मत करवाने के लिए मुख्यमंत्री से बजट का प्रावधान करने के लिए कहा गया था, परंतु बार-बार कहे जाने पर भी आज तक बजट का प्रावधान नहीं किया गया।
सचित्र