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Una News: बारिश के बाद धूप ने बढ़ाई आलू उत्पादकों की चिंता
Tue, 22 Sep 2026 05:36 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 22 Sep 2026 05:36 AM IST
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ऊना। सितंबर में लगातार बारिश के बाद अब तेज धूप ने आलू उत्पादकों की मुश्किल बढ़ा दी है। खेतों की ऊपरी परत तेजी से सूखने लगी है।
स्वां नदी के आसपास के रेतीले क्षेत्रों में आलू की बिजाई करने वाले किसानों को नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई करनी पड़ रही है। लाल सिंगी में सोमवार को कई किसान और मजदूर खेतों में सिंचाई करते नजर आए।
किसान विनोद कुमार, अजय सैनी, विजय कुमार, योगराज और रघुवीर सिंह ने बताया कि बारिश के कारण सितंबर की शुरुआत में आलू की बिजाई प्रभावित हुई थी। अब मौसम साफ होने के बाद तेज धूप से खेत की ऊपरी परत सूख रही है। रेतीली जमीन में पानी जल्दी नीचे चले जाने के कारण सिंचाई की जरूरत अधिक पड़ रही है।
जिले में इस बार करीब 2000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार की जा रही है। किसानों का कहना है कि आने वाले दिनों में धूप जारी रही तो सिंचाई पर निर्भरता और बढ़ सकती है।
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उधर, उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि बारिश के बाद मौसम साफ होने पर खेतों की ऊपरी सतह सूखना सामान्य है। आलू की बिजाई के बाद आवश्यक नमी बनाए रखना जरूरी है। किसान जमीन की स्थिति देखकर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और अत्यधिक पानी न लगाएं।
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स्वां नदी के आसपास के रेतीले क्षेत्रों में आलू की बिजाई करने वाले किसानों को नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई करनी पड़ रही है। लाल सिंगी में सोमवार को कई किसान और मजदूर खेतों में सिंचाई करते नजर आए।
किसान विनोद कुमार, अजय सैनी, विजय कुमार, योगराज और रघुवीर सिंह ने बताया कि बारिश के कारण सितंबर की शुरुआत में आलू की बिजाई प्रभावित हुई थी। अब मौसम साफ होने के बाद तेज धूप से खेत की ऊपरी परत सूख रही है। रेतीली जमीन में पानी जल्दी नीचे चले जाने के कारण सिंचाई की जरूरत अधिक पड़ रही है।
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जिले में इस बार करीब 2000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार की जा रही है। किसानों का कहना है कि आने वाले दिनों में धूप जारी रही तो सिंचाई पर निर्भरता और बढ़ सकती है।
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उधर, उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि बारिश के बाद मौसम साफ होने पर खेतों की ऊपरी सतह सूखना सामान्य है। आलू की बिजाई के बाद आवश्यक नमी बनाए रखना जरूरी है। किसान जमीन की स्थिति देखकर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और अत्यधिक पानी न लगाएं।