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Una News: श्रद्धालुओं के लिए दिव्य और सुलभ संत थे सुग्रीवानंद

Sun, 02 Mar 2025 07:34 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Mar 2025 07:34 PM IST
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Sugrivananda was a divine and accessible saint for the devotees.
अनुयायी मुख्य सड़क के किनारे दर्शनों के लिए उमड़े
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जय गुरुदेव के घोष के साथ दी विनम्र श्रद्धांजलि
राजिंद्र शर्मा
मुबारिकपुर (ऊना)। उत्तर भारत के प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से विख्यात डेरा बाबा रुद्रानंद आश्रम नारी के 1952 में गद्दी के अधिष्ठाता बने वेदांताचार्य सुग्रीवानंद के ब्रह्मलीन होने के समाचार से समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। डेरा बाबा रुद्रानंद में 1850 से अखंड धूना करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। डेरा अमलैहड़ को भी समय के साथ विकसित करने में सुग्रीवानंद का अतुल्य योगदान रहा है। रविवार सुबह सुग्रीवानंद के ब्रह्मलीन होने का समाचार मिलते ही उनके अनुयायियों को गहरा आघात लगा। पीजीआई से ऊना के लिए निकले काफिले में महाराज के अंतिम दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में उनके अनुयायी मुख्य सड़क के किनारे जय गुरुदेव के घोष के साथ अपनी विनम्र श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ते नजर आए।

घनारी गांव से हरबंस लाल ने कहा कि सुग्रीवानंद वेदों के ज्ञाता, परम संत और संपूर्ण व्यक्तित्व थे। वे 1954 से सुग्रीवानंद के शिष्य के रूप में जुड़े। महाराज ने हमेशा हमें प्रभु सिमरन में मन लगाने, दूसरों की भलाई, सत्य बोलने की शिक्षा दी। कैलाश नगर नकड़ोह के अनुयायी संदीप शर्मा ने कहा कि महाराज तपोनिष्ठ व्यक्तित्व एवं सुलभ संत थे। डेरों के विकास को समय के साथ काफी आगे ले जाने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। श्रीमद्भागवत जैसे भव्य धार्मिक आयोजनों से लाखों अनुयायियों को भागवत महिमा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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भंजाल के अमित ठाकुर ने कहा कि सुग्रीवानंद अपने अनुयायियों के लिए सदैव सुलभ संत रहे हैं। डेरा में विशेष धार्मिक आयोजनों में अपने अनुयायियों को सुलभ संत की भांति दर्शन और आशीर्वाद देने के लिए उपलब्ध रहते थे ।
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भंजाल से जगमोहन ठाकुर ने कहा कि महाराज ने सदैव अपने अनुयायियों को जीवन में सदाचरण का संदेश देते थे। वहीं, सदैव मानवता की सेवा , गोसेवा का संदेश दिया करते थे। उन्होंने कहा कि महाराज के ब्रह्मलीन होने का अत्यंत दुख है। भविष्य में उनके बताए मार्ग पर चलकर ही हम गुरुदेव को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
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