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भीषण गर्मी के बीच खुले आसमान तले पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी

Mon, 13 Jun 2022 10:30 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jun 2022 10:30 PM IST
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students studying below trees in the midst of scorching heat
धुसाड़ा स्कूल में भीषण गर्मी के बीच पेड़ की छांव में पढ़ते विद्यार्थी। संवाद - फोटो : Una
सतीश शर्मा
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नारी (ऊना)। अंब उपमंडल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धुसाड़ा में भीषण गर्मी के बीच पेड़ के नीचे कक्षाएं लग रही हैं। ईंट और पत्थरों के बीच डेस्क लगाकर चिल्लचिलाती धूप में पढ़ाई करवाई जा रही है। तीन साल पहले स्कूल के गिराए आठ कमरों के लिए आज तक बजट मंजूर नहीं हो पाया है। ऐसे में जुगाड़ के सहारे ही कक्षाएं चल रही हैं।
धुसाड़ा स्कूल में पिछले तीन सालों से आठ कमरों के पुनर्निर्माण का इंतजार हो रहा है। जर्जर हो चुके कमरों को गिरा तो दिया, लेकिन नए कब बनेंगे इसका उत्तर किसी के पास नहीं। बच्चे 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में पेड़ों की छाया और बरामदे में पढ़ाई करने के मजबूर हैं। बच्चों का सारा दिन गर्मी से राहत पाने की जद्दोजहद में गुजर जाता है। धुसाड़ा स्कूल में छठी से बारहवीं कक्षा तक 400 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकती है, लेकिन स्कूल के हालात इसमें बाधा बने हुए हैं। बैठने के लिए कमरे कम हैं और खुले आसमान तले पेड़ की छाया के सहारे कुछ कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
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कई विद्यार्थियों को बरामदों में बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। खासकर ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में अलग-अलग कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अध्यापकों को एक कक्षा को बरामदे में बिठाकर पढ़ाना पड़ता है। नए कमरों के लिए आकलन दो वर्ष पहले शिक्षा विभाग को भेजा जा चुका, लेकिन अभी तक यह कागजों में ही सिमटा हुआ है। सवाल यही है कि जहां सरकार नई शिक्षा नीति और स्मार्ट कक्षाओं की बात करती है तो धुसाड़ा स्कूल में बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों हो रहा है।
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वहीं, धुसाड़ा स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. देशराज ने बताया कि वर्तमान में कमरों की कमी के कारण कक्षाएं इधर-उधर लगानी पड़ रही हैं। उधर, उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग जनक सिंह का कहना है कि अभी विभागीय स्वीकृति नहीं आई है। इस संबंध में रिमाइंडर भेजा जाएगा। कहा कि मंजूरी मिलते ही लोक निर्माण विभाग कार्य शुरू कर देगा।

बिना कमरों के पेश आ रही दिक्कत: नीरू बाला
धुसाड़ा ग्राम पंचायत प्रधान नीरू बाला का कहना है कि उन्होंने और स्कूल प्रबंधन ने आठ कमरों का आकलन शिक्षा विभाग को भेजा है। बच्चों को बिना कमरों से बैठने में दिक्कत पेश आ रही है। कहा कि जल्द बजट स्वीकृत करके कमरों का निर्माण करवाया जाए। वहीं, स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) प्रधान पवन कुमार ने कहा कि स्कूल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं, लेकिन कमरों की कमी खलती है। नए कमरों का जल्द से जल्द निर्माण किया जाना चाहिए। संवाद
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